सैलरी, पेंशन और लीव…केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के सामने प्रस्ताव
केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों पर सुझाव लेने के लिए गठित इस वेतन आयोग ने 18 सवालों वाला एक प्रश्नपत्र जारी किया है। वेतन आयोग ने प्रश्नावली के माध्यम से हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी है।

8th Pay Commission latest update: केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें साल 2027 की पहली छमाही में सरकार को सौंप सकता है। इससे पहले, केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों पर सुझाव लेने के लिए गठित इस वेतन आयोग ने 18 सवालों वाला एक प्रश्नपत्र जारी किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की शीर्ष संस्था NC-JCM (स्टाफ साइड) ने वेतन आयोग से कुछ अहम बिंदुओं को जोड़ने की अपील की है। ये अहम मुद्दे केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और लीव से जुड़े हैं।
क्या हैं मांग?
NC-JCM का कहना है कि जो कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आते हैं और जिन्होंने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को चुना है, उन्हें कई तरह की समस्याओं, शिकायतों और मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों पर कोई भी कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम लागू नहीं की जानी चाहिए।
NC-JCM के मुताबिक कर्मचारियों की मांग है कि CCS (पेंशन) नियम 1972 (अब 2021) के तहत नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम को फिर से बहाल किया जाए। इस संबंध में सभी संबंधित पक्षों के विचार प्रस्तुत करने के लिए एक प्रावधान की मांग की गई है। पेंशनर्स के मुद्दों को भी विशेष रूप से शामिल करने की मांग की गई है। वेतन आयोग से कहा गया है कि पेंशन संशोधन, समानता, कम्यूटेड वैल्यू की बहाली और अन्य कल्याणकारी उपायों पर अलग से विचार किया जाना चाहिए।
महिला कर्मचारियों के लिए मांग
महिला कर्मचारियों के लिए भी कई अहम मांग किए गए हैं। कर्मचारियों की सिक्योरिटी, मैटरनिटी बेनिफिट, पीरियड से जुड़े लीव, चाइल्ड केयर लीव (CCL), कार्यस्थल पर समानता और अन्य वेलफेयर स्कीम्स की मांग की गई। NC-JCM ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों की समस्याएं अलग होती हैं, इसलिए उनके लिए अलग से सुझाव देने का विकल्प होना चाहिए।
डेडलाइन बढ़ाने की मांग
सुझाव देने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की गई है। एनसी-जेसीएम ने कहा कि देशभर में फैले संगठनों से राय लेने में समय लगता है, इसलिए विभागीय ज्ञापन जमा करने की तारीख 31 मई 2026 तक बढ़ाई जाए। NC-JCM ने लिखा है कि अटैचमेंट साइज की मौजूदा 2 MB की सीमा काफी सीमित है। इसे बढ़ाकर 10 एमबी किया जाना चाहिए ताकि विस्तृत दस्तावेज, रिपोर्ट और डेटा एनेक्सचर जमा करने में आसानी हो।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि ऑनलाइन के अलावा ई-मेल और हार्ड कॉपी के जरिए भी ज्ञापन देने की अनुमति होनी चाहिए, ताकि तकनीकी बाधाएं कम हों और सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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