8वां वेतन आयोग इस स्कीम में करेगा बदलाव! केंद्रीय कर्मचारियों पर बड़ा असर

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मुख्य बातें

  • 8वें वेतन आयोग से कई बड़े बदलाव की मांग हो रही है
  • इसमें से एक मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम भी है
  • आइए जानते हैं कि इस स्कीम में क्या कुछ बदलाव की उम्मीद की जा रही है

8th pay commission news
आठवां वेतन आयोग कर रहा विचार

8th Pay commission latest news: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस योजना में बदलाव की मांग की गई है। अब वेतन आयोग इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

क्या है मामला?

मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि MACP के तहत फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (वित्तीय लाभ) केवल अगले पे मैट्रिक्स लेवल पर नहीं, बल्कि कर्मचारी के अगले प्रमोशनल पद के पे लेवल के हिसाब से दिया जाना चाहिए। MSA ने यह भी कहा कि अपग्रेडेशन की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जानी चाहिए, जो नौकरी के 8, 15, 22, 28 और 32 साल पूरे होने पर मिलें। MSA के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत MACP में असल 'प्रमोशनल हायरार्की' के अगले वेतनमान के बजाय 'पे मैट्रिक्स' में अगला लेवल दिया जाता है।

इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने 6, 12, 18, 24 और 30 वर्षों में पांच बार प्रमोशन का प्रस्ताव रखा। FNPO ने एक और अहम बदलाव की मांग की है। संगठन के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी किसी प्रमोशन को स्वीकार नहीं करता है, तो उसके MACP लाभ को रोका या टाला नहीं जाना चाहिए। यानी MACP का लाभ प्रमोशन से अलग रखा जाना चाहिए।

उदाहरण से समझें

मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी लेवल-7 पर है और उसका अगला प्रमोशनल पद लेवल-10 का है, तो मौजूदा व्यवस्था में उसे MACP के तहत केवल लेवल-8 मिल सकता है। इससे वास्तविक प्रमोशन और वित्तीय लाभ के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहाँ ज्यादा जिम्मेदारियों (जैसे ऑफिस सुपरिटेंडेंट) पर प्रमोट किए गए जूनियर स्टाफ लेवल 6 में ही बने रहते हैं जबकि उनके जूनियर, जिन्हें प्रमोशन नहीं मिला, उन्हें MACP के तहत लेवल 7 मिल जाता है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम स्टाफ साइड ने मांग की है कि प्रमोशन क्रम में MACP प्रोवाइड किया जाए, जिसका समर्थन कई अन्य यूनियनों ने भी किया है। रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 10 साल के अंतराल के मानवीय नुकसान को उजागर करते हुए कहा कि फाइनेंशियल अपग्रेडेशन के बीच 10 साल का लंबा अंतराल लंबे समय तक गतिरोध का कारण बनता है, खासकर उन कैडरों में जहां प्रमोशन के पद सीमित हैं। बता दें कि पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन हुआ था। वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की डेडलाइन मिली हुई है।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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