8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर 3.83 या 4.0 हुआ तो कितनी बढ़ेगी सैलरी?

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मुख्य बातें

  • 8th Pay Commission: छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 रखा गया था
  • फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, गणना के हिसाब से संशोधित मूल वेतन उतना ही ज्यादा होगा
  • इसका असर आगे मिलने वाले वेतन और भविष्य की इंक्रिमेंट के आधार पर भी पड़ सकता है

8th pay commission latest update
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस समय फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इस बार फिटमेंट फैक्टर पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रखा जाए, ताकि नए सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा इजाफा हो सके।

छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 रखा गया था। अब 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन इससे काफी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग रख रहे हैं।

3.83 और 4.0 के फिटमेंट फैक्टर की मांग

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पेंशनर्स एसोसिएशंस यानी AIFPA ने 8वें वेतन आयोग के लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया है। वहीं भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ यानी BPMS ने अपने ज्ञापन में 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। हालांकि, अभी यह केवल कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों की मांग है। 8वें वेतन आयोग ने फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।

फिलहाल आयोग देश के अलग-अलग बड़े शहरों में कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके संगठनों के साथ बैठकें कर रहा है। इन्हीं बैठकों में वेतन, पेंशन और दूसरे मुद्दों पर सुझाव लिए जा रहे हैं।

18000 की बेसिक सैलरी कितनी हो जाएगी

  • अगर किसी कर्मचारी का मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 3.83 तय होता है तो गणना इस तरह होगी...
  • 18,000 × 3.83 = 68,940 रुपये यानी संभावित नया मूल वेतन 68,940 रुपये हो सकता है।
  • अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 रहता है तो 18,000 × 4 = 72,000 रुपये यानी इसी मूल वेतन पर नया बेसिक 72,000 रुपये हो सकता है।

35,400 रुपये बेसिक वालों को कितना फायदा?

अब इसे अलग-अलग पे लेवल के उदाहरण से समझते हैं। लेवल-6 में अगर किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन 35,400 रुपये है तो 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर 1,35,582 रुपये और 4.0 फिटमेंट फैक्टर पर 1,41,600 रुपये होगा। यानी दोनों प्रस्तावों के बीच ही 6,018 रुपये का अंतर दिखाई देता है।

इसी तरह लेवल-10 में 56,100 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी के लिए बेसिक पे 3.83 पर 2,14,863 रुपये और 4.0 पर 2,24,400 रुपये हो जाएगा। यहां दोनों फिटमेंट फैक्टर के बीच 9,537 रुपये का अंतर बनता है।

फिटमेंट फैक्टर ज्यादा हुआ तो क्या फायदा होगा?

फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, गणना के हिसाब से संशोधित मूल वेतन उतना ही ज्यादा होगा। इसका असर आगे मिलने वाले वेतन और भविष्य की इंक्रिमेंट के आधार पर भी पड़ सकता है, लेकिन सिर्फ फिटमेंट फैक्टर देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि कर्मचारी की जेब में हर महीने कितने रुपये ज्यादा आएंगे। अंतिम वेतन में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता और दूसरे घटक भी शामिल होते हैं।

कब पता चलेगा कितना होगा फिटमेंट फैक्टर?

आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद अभी प्रक्रिया चल रही है। आयोग अलग-अलग पक्षों से सुझाव और मांगें ले रहा है। इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। सरकार की मंजूरी के बाद ही यह साफ होगा कि फिटमेंट फैक्टर कितना रखा गया है और कर्मचारियों के वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी।

केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आठवें वेतन आयोग का गठन किया था और आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की रिपोर्ट 2027 में आने की संभावना है।

यानी अभी 3.83 और 4.0 दोनों ही मांग और संभावित गणना के आंकड़े हैं। अंतिम फिटमेंट फैक्टर क्या होगा, इसका फैसला आठवें वेतन आयोग की सिफारिश और उस पर सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

नोट: ध्यान रखें, ये केवल उदाहरण हैं। इससे यह नहीं माना जा सकता कि आठवें वेतन आयोग में बेसिक पे वास्तव में इतना ही तय होगा।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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