केंद्रीय कर्मचारियों को 5 प्रमोशन की गारंटी? 8वें वेतन आयोग के फैसले पर नजर

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मुख्य बातें

  • आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंपे जाने की उम्मीद है
  • यह देखना अहम होगा कि वेतन आयोग क्या सिफारिशें करता है
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8th Pay Commission latest: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग अब अपनी सिफारिशें तैयार करने में जुट गया है। बीते कुछ महीनों से वेतन आयोग देश के अलग-अलग राज्य में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन वेतन आयोग से तरह-तरह की डिमांड कर रहे हैं। ऐसी ही एक डिमांड केंद्रीय कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़ा है।

क्या है डिमांड?

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ पक्ष ने 8वें वेतन आयोग से आग्रह किया है कि वह किसी कर्मचारी के 30 साल के सेवाकाल के दौरान पांच पक्के फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (यानी प्रमोशन) देने पर विचार करे। इस प्रस्ताव का मकसद ग्रुप C और ग्रुप B कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना है। इनमें से कई कर्मचारियों के पास तरक्की के सीमित मौके होते हैं, जिसकी मुख्य वजह सख्त कैडर सिस्टम और ऊंचे स्तर पर खाली पदों की कमी है। डिमांड के हिसाब से बदलाव लागू किया जाता है तो इससे कर्मचारियों का मनोबल काफी बढ़ेगा और काम करने का एक अच्छा माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

प्रस्तावित करियर प्रोग्रेशन फ्रेमवर्क

NC-JCM स्टाफ पक्ष की ओर से 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए मेमोरेंडम में विस्तार से बताया गया है कि कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से हर 6 साल के निश्चित अंतराल पर फाइनेंशियल अपग्रेडेशन मिलना चाहिए। इसके दायरे में मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS), ड्राइवर, क्लर्कियल स्टाफ, स्टेनोग्राफर, स्टोरकीपिंग कर्मचारी, टेलीफोन ऑपरेटर, कारीगर, रसोइए और फायरफाइटिंग स्टाफ आदि शामिल हैं। ऐसे कर्मचारी अक्सर अपनी पूरी सर्विस के दौरान 3 प्रमोशन भी नहीं पा पाते हैं।

कब तक सरकार को मिलेंगी सिफारिशें

8वां वेतन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट 18 महीने के अंदर सरकार को देना है। ये अवधि अगले साल की पहली छमाही तक पूरी हो जा रही है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जून 2027 तक सरकार को वेतन आयोग की सिफारिशें मिल जाएंगी। बता दें कि यह वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को बनाया गया था। इस वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट इसी साल फरवरी महीने में लॉन्च की थी।

यूनियनों का तर्क है कि मौजूदा स्थिति को सुधारने और कर्मचारियों का आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाने के लिए 'टाइम-स्केल प्रमोशन सिस्टम' जरूरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऊंचे पदों पर वैकेंसी कम ही निकलती हैं, जिससे कई कर्मचारी 'मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम पर निर्भर हो जाते हैं। इस स्कीम से कम फायदे मिलते हैं।

यह भी तर्क दिया गया है कि चूंकि ग्रुप A अधिकारियों के लिए समय-सीमा पर आधारित तरक्की का सिस्टम पहले से मौजूद है, इसलिए इसे ग्रुप B और ग्रुप C कर्मचारियों तक बढ़ाने से ज्यादा निष्पक्षता और पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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