8th Pay Commission: 10 लाख पेंशनर्स की ‘पुकार’, DA में तेजी की दरकार और मर्जर 25%

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मुख्य बातें

  • 8th Pay Commission: महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) की समीक्षा हर तीन महीने में की जाए
  • साथ ही, जब डीआर 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे मूल पेंशन में विलय कर दिया जाए
  • इन कदमों से सेवारत और रिटायर्ड कर्मचारियों को महंगाई से लड़ने में मदद मिलेगी
8th pay commission
10 लाख पेंशनर्स की ‘पुकार’, DA में तेजी की दरकार और मर्जर 25%

8th Pay Commission: भारत पेंशनभोगी समाज (BPS) ने 8वें वेतन आयोग से महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। यह संगठन लगभग 10 लाख पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करता है। बीपीएस ने मांग की है कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) की समीक्षा हर तीन महीने में की जाए। साथ ही, जब डीआर 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे मूल पेंशन में विलय कर दिया जाए। इन कदमों से सेवारत और रिटायर्ड कर्मचारियों को महंगाई से लड़ने में मदद मिलेगी।

अभी क्या है सिस्टम: अभी डीए और डीआर की समीक्षा साल में दो बार होती है। बीपीएस ने बताया कि महंगाई पेंशनर्स के जीवन स्तर पर बुरा असर डालती है। इसलिए उन्होंने तीन महीने की औसत के आधार पर इस मीट्रिक की तिमाही समीक्षा की मांग की है। साथ ही, उन्होंने प्वाइंट टू प्वाइंट मुआवजे की भी बात की है।

7 अगस्त की बैठक में उठाए गए मुद्दे: संघ ने 7 अगस्त को आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पेंशन में समान संशोधन की भी मांग की। उन्होंने 1 जनवरी 2026 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त होने वाले समान स्तर के पेंशनर्स के बीच समानता की भी मांग की।

मूल वेतन 69,000 रुपये का प्रस्ताव

बीपीएस ने न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये और न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उन्होंने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया है। उन्होंने फिटमेंट फैक्टर की गणना के लिए 5.2 वेटेज यूनिट फैमिली फार्मूले का भी सुझाव दिया है। बीपीएस न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये और 3.83 फैक्टर की मांग एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड की तर्ज पर कर रहा है। संगठन ने वेतन और पेंशन की समीक्षा हर पांच साल में करने की भी मांग की है, न कि 10 साल के साइकिल का इंतजार करने की।

यह संगठन 1955 में स्थापित हुआ था। यह 245 संबद्ध संघों के माध्यम से लगभग 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी ताजा मांगों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तावों की बढ़ती सूची में इजाफा किया है। पेंशनभोगियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आयोग उनकी मांगों को स्वीकार करेगा। खासकर महंगाई से जुड़ी अधिक बार राहत और 25 प्रतिशत डीआर मर्जर की मांग।

अगले साल मिलेगा अपडेट

इन मांगों के मंजूर होने की कोई अपडेट अगले साल के मध्य तक आने की उम्मीद है। तब न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली 8वीं वेतन आयोग की पैनल अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी। बता दें कल आयोग की दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठकें समाप्त हुईं। आने वाले महीनों में आयोग की चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर में भी बैठकें होंगी।

कब पेश होगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट

8वां वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। 11 अगस्त तक 18 महीनों में से आधे से अधिक समय बीत चुका है। अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2026 के आसपास पेश होने की उम्मीद है। फिलहाल आयोग कर्मचारियों, संघों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा और परामर्श जारी रखे हुए है। आयोग पेंशन भुगतान, वेतन संशोधन और भत्तों से संबंधित मांगों की जांच कर रहा है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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