8th Pay Commission: ₹18,000 से ₹68,940 तक पहुंच सकती है बेसिक सैलरी, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
मुख्य बातें
- 8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था
- इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था
- अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 होता है तो Basic Pay करीब ₹68,940 हो जाएगा

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं।
7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर?
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था।
8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें?
विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है।
फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन?
मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है...
1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560
2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260
2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480
3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000
3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500
3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240
3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940
अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी।
कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


