8वां वेतन आयोग: ‘₹18,000 बोनस +DA से 12 लाख रेलवे कर्मचारियों को होगा फायदा’

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मुख्य बातें

  • 8th Pay Commission: रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों का PLB 2014-15 से 17,951 रुपये बना हुआ है, जब छठे वेतन आयोग की वेतन स्लैब लागू थीं
  • यदि 60% DA दर को ध्यान में रखा जाता, तो यह राशि 27,824 रुपये हो जाती

8th pay commission
₹18,000 बोनस +DA से 12 लाख रेलवे कर्मचारियों को होगा फायदा

इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि गैर-राजपत्रित यानी नॉन-गजेटेड लेवल-1 कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन आधारित बोनस (PLB) की लिमिट को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्लस DA किया जाए। लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए यह सीमा उनके हाई सैलरी लेवल के अनुपात में बढ़ाई जाए।

8 सितंबर, 2026 को IRTSA के महासचिव केवी रमेश ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में तय की गई 7,000 रुपये की वर्तमान PLB सीमा 7वें वेतन आयोग के स्तरों और वर्तमान 60% DA दर से मेल नहीं खाती।

रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों का PLB 2014-15 से 17,951 रुपये बना हुआ है, जब छठे वेतन आयोग की वेतन स्लैब लागू थीं। यदि 60% DA दर को ध्यान में रखा जाता, तो यह राशि 27,824 रुपये हो जाती, 7वें वेतन आयोग की स्लैब तो अलग ही बात है। ईटी के मुताबिक रमेश ने बताया कि अगर हाई सैलरी लिमिट की मांग मान ली जाती है, तो 12 लाख रेलवे कर्मचारियों को लाभ होगा।

NC-JCM की क्या है मांग

IRTSA की यह मांग ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रीय परिषद – संयुक्त परामर्श मशीनरी (NC-JCM) ने पिछले महीने केंद्र सरकार से सभी गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए PLB वेतन सीमा 7,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का अनुरोध किया था।

PLB क्या है

गैर-राजपत्रित ग्रुप C और B केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दशहरा के अवसर पर हर साल प्रदर्शन के आधार पर बोनस मिलता है। 2014-15 से PLB की गणना 7,000 रुपये की सैलरी लिमिट पर की जाती है। इस सीमा के अनुसार, अधिकांश केंद्र सरकारी कर्मचारियों का बोनस 6,908 रुपये बनता है।

PLB = सैलरी लिमिट × 30/30.4 = 7,000 × 30/30.4 = 6,908 रुपये

चूंकि 7वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये है, इसलिए कर्मचारी संघों का कहना है कि 7,000 रुपये की बोनस सैलरी लिमिट वर्तमान वेतन स्तरों और DA दर को पूरा नहीं करती। रेलवे कर्मचारियों के लिए PLB की गणना 78 दिनों पर की जाती है, जबकि अन्य केंद्र सरकारी कर्मचारियों के लिए यह 30 दिनों पर होती है। IRTSA का कहना है कि अगर न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये पर 78 दिनों का PLB दिया जाए, तो यह 46,184 रुपये होगा।

न्यूनतम मांगा गया PLB = 18,000 × 78 दिन ÷ 30.4 = 46,184 रुपये

रेलवे PLB फॉर्मूला: IRTSA ने पत्र में कहा कि PLB का फॉर्मूला आउटपुट-इनपुट अनुपात पर आधारित है, जहां आउटपुट को नेट टन किलोमीटर में और इनपुट को गैर-राजपत्रित स्टाफ संख्या (RPF/RPSF कर्मियों को छोड़कर) के रूप में गिना जाता है।

पत्र के अनुसार, माल ढुलाई के लिए नेट टन किमी (मिलियन में) 2014-15 के 6,82,612 से 42.32% बढ़कर 2024-25 में 9,71,460 हो गया। इसी अवधि में स्टाफ संख्या 7.32% घटकर 13,26,000 से 12,99,000 हो गई।

आउटपुट-इनपुट अनुपात में वृद्धि

पत्र में बताया गया कि 2014-15 और 2024-25 के बीच माल ढुलाई के नेट टन किमी (मिलियन में) और स्टाफ संख्या के संदर्भ में आउटपुट-इनपुट अनुपात 53.55% बढ़ा।IRTSA का दावा है कि यदि माल ढुलाई के नेट टन किमी (मिलियन में) के अनुपात में वृद्धि दी जाती, तो PLB राशि 27,564 रुपये होनी चाहिए थी।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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