सैलरी आते ही पैसा हो जाता है खत्म? आज से ही अपनाएं ये 7 मनी रूल, खत्म हो जाएगी सारी समस्या

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • अगर सैलरी आते ही पैसा खत्म हो जाता है, तो कुछ आसान तरीके आपकी स्थिति बदल सकते हैं
  • इमरजेंसी फंड, सैलरी मिलते ही बचत, हर खर्च का हिसाब, क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल, जल्दी निवेश शुरू करना, अपनी स्किल बढ़ाकर कमाई बढ़ाना और सही सैलरी के लिए बातचीत करना ऐसे 7 मनी रूल्स हैं

7 financial rules
आज से ही अपनाएं 7 फाइनेंशियल नियम।

अगर हर महीने सैलरी आने के बाद आपको लगता है कि पैसा कहां चला गया, पता ही नहीं चला, तो सिर्फ ज्यादा कमाई करना ही समाधान नहीं है। आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए कमाई के साथ-साथ पैसे को सही तरीके से बचाना, खर्च करना और निवेश करना भी जरूरी है। अगर आप लंबे समय में अपनी संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं, तो कुछ आसान वित्तीय आदतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकते हैं। ये आदतें आपको अचानक आने वाले खर्चों से बचाने के साथ भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक आधार तैयार करने में मदद कर सकती हैं।

पहला नियम

पहला नियम इमरजेंसी फंड बनाना है। नौकरी जाने, मेडिकल इमरजेंसी या अचानक बड़े खर्च की स्थिति में इमरजेंसी फंड काफी मददगार साबित होता है। आमतौर पर वित्तीय विशेषज्ञ जरूरी मासिक खर्च के करीब 3 से 6 महीने के बराबर रकम आसानी से उपलब्ध खाते या सुरक्षित साधन में रखने की सलाह देते हैं। इसे ऐसे पैसे के रूप में देखें जिसे सिर्फ वास्तविक आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जाए।

दूसरा नियम

दूसरा नियम सैलरी मिलते ही पहले बचत करना है। अक्सर लोग महीने के अंत में बचा हुआ पैसा सेव करने की कोशिश करते हैं, लेकिन तब तक ज्यादातर रकम खर्च हो जाती है। इसके बजाय सैलरी आते ही एक तय रकम अपने सेविंग या निवेश खाते में ऑटोमैटिक ट्रांसफर कर दें। इससे बचत आपकी आदत बन जाएगी और गैर-जरूरी खर्च का मौका कम होगा।

तीसरा नियम

तीसरा नियम हर खर्च का हिसाब रखना है। रोजाना होने वाले छोटे-छोटे खर्च महीने के अंत में बड़ी रकम बन सकते हैं। मोबाइल ऐप, स्प्रेडशीट या साधारण डायरी में खर्च लिखने से पता चलेगा कि पैसा कहां जा रहा है। अनावश्यक सब्सक्रिप्शन, बार-बार बाहर खाना या छोटी-छोटी ऑनलाइन खरीदारी जैसी आदतों की पहचान करके खर्च कम किया जा सकता है।

चौथा नियम

चौथा नियम क्रेडिट कार्ड को समझदारी से इस्तेमाल करना है। क्रेडिट कार्ड सुविधा देता है, लेकिन इसे अतिरिक्त कमाई समझना भारी पड़ सकता है। अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च न करें और कोशिश करें कि हर महीने पूरा बिल तय तारीख से पहले चुका दें। इससे महंगे ब्याज से बचने और अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

5वां नियम

5वां नियम निवेश जल्दी शुरू करना है। निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाए, कंपाउंडिंग को उतना ज्यादा समय मिलता है। लंबे समय के लक्ष्यों के लिए कम लागत वाले इंडेक्स फंड जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन निवेश हमेशा अपने लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और समय अवधि के हिसाब से होना चाहिए। बाजार से जुड़े निवेश में जोखिम भी होता है, इसलिए बिना समझे पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है।

छठा नियम

छठा नियम अपनी कमाई बढ़ाने पर ध्यान देना है। सिर्फ खर्च कम करने की भी एक सीमा होती है, लेकिन अपनी कमाई बढ़ाने की क्षमता लंबे समय में काफी ज्यादा हो सकती है। नई स्किल सीखना, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन करना, ट्रेनिंग या वर्कशॉप में हिस्सा लेना बेहतर नौकरी और ज्यादा आय के अवसर खोल सकता है। इसलिए अपनी शिक्षा और स्किल पर खर्च को सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की कमाई में निवेश समझें।

7वां नियम

7वां और बेहद जरूरी नियम है अपनी सैलरी पर बातचीत करना। आपकी सैलरी का असर सिर्फ आज की कमाई पर नहीं पड़ता, बल्कि बोनस, भविष्य की बचत और रिटायरमेंट योगदान पर भी पड़ सकता है। नौकरी बदलते समय या अप्रेजल के दौरान अपनी इंडस्ट्री की औसत सैलरी और अपनी उपलब्धियों की जानकारी रखें। अपनी वैल्यू को आत्मविश्वास के साथ सामने रखकर उचित और मार्केट के अनुरूप वेतन की मांग करें। इन सात आदतों को धीरे-धीरे अपनाने से वित्तीय अनुशासन मजबूत हो सकता है और लंबे समय में बेहतर आर्थिक भविष्य बनाने में मदद मिल सकती है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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