मोदी सरकार की 6 बड़ी आर्थिक योजनाएं, जिन्होंने बदली देश की तस्वीर

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मुख्य बातें

  • पीएम नरेंद्र मोदी ने सबसे लंबे समय 4,399 दिनों तक लगातार सेवारत प्रधानमंत्री होने का गौरव हासिल किया है
  • जानें जनधन से लेकर AI मिशन तक, 12 साल में मोदी सरकार की वो योजनाएं जो हर भारतीय के काम आईं
मोदी सरकार की 6 बड़ी आर्थिक योजनाएं, जिन्होंने बदली देश की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बुधवार, 10 जून 2026 एक ऐतिहासिक दिन है। आज उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वे लगातार 4,399 दिनों तक पद पर रहकर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले यह कीर्तिमान देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने लगातार 4,398 दिनों तक शासन किया।

यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के 12 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन 12 वर्षों में भाजपा नीत सरकार ने कई दूरगामी आर्थिक योजनाएं शुरू कीं, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन को नई दिशा दी। आइए उनमें से कुछ प्रमुख योजनाओं पर एक नजर डालते हैं।

प्रधानमंत्री जन धन योजना

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प्रधानमंत्री जन धन योजना की घोषणा पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए की थी और इसे 28 अगस्त 2014 को लॉन्च किया गया। यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसका लक्ष्य देश के हर परिवार तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना था। इस योजना के तहत बुनियादी बचत खाते, जरूरत के मुताबिक कर्ज, फंड ट्रांसफर की सुविधा, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की गई।

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया पहल को इन्वेस्टमेंट इनोवेशन, कौशल विकास और वर्ल्ड लेवल का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए शुरू किया गया, ताकि कंपनियां भारत में ही उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित हों। यह योजना चार स्तंभों पर टिकी है, नई प्रक्रियाएं, नया बुनियादी ढांचा, नए क्षेत्र और नई सोच। नए प्रोसेस के तहत बिजनेस लाइफ साइकिल को आसान बनाने के लिए लाइसेंसिंग और रेगुलेशन में ढील दी गई।

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नए मैन्युफैक्चरिंग के अंतर्गत अत्याधुनिक तकनीक वाले इंडस्ट्रियल कॉरीडोर और स्मार्ट सिटी विकसित करने की योजना बनाई गई। नए क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रा और सर्विसेज के 25 सेक्टरों की पहचान की गई। वहीं नई सोच के जरिये सरकार ने उद्योग जगत के साथ मिलकर आर्थिक विकास को गति देने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई थी। इसके तहत गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि आय वाले छोटे कारोबारों को बिना किसी गारंटी के 20 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाता है। कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, एमएफआई और एनबीएफसी इस योजना के माध्यम से ऋण प्रदान करती हैं। अभी तक इस योजना के अंतर्गत लगभग 3.97 करोड़ लोन मंजूर किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PIL) योजना की शुरुआत 2020 में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को सशक्त बनाने के लिए की गई थी। इसके तहत पात्र कंपनियों को उनकी बढ़ी हुई बिक्री के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाता है। शुरुआत में तीन सेक्टरों के लिए बनी यह योजना अब 14 क्षेत्रों तक विस्तार पा चुकी है।

1.97 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज के साथ यह सिर्फ एक वित्तीय पैकेज नहीं बल्कि औद्योगिक आत्मनिर्भरता की व्यापक रणनीति है। अब तक 14 रणनीतिक सेक्टरों में 806 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो उद्योग जगत के भरोसे और योजना की सफलता को दर्शाता है। इनमें मोबाइल विनिर्माण, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, सफेद वस्तुएं और विशेष इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

इंडिया एआई मिशन

इंडिया एआई मिशन का उद्देश्य कंप्यूटिंग पावर की पहुंच बढ़ाना, शोध को सपोर्ट करना और स्टार्टअप्स तथा संस्थानों को जनहितकारी समाधान बनाने में मदद करना है। यह मिशन इस सोच पर काम कर रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को खुला, किफायती और सबकी पहुंच में बनाया जाए।

AI का बढ़ता इस्तेमाल बढ़ा सकता है पानी की किल्लत

अपनी शुरुआत के बाद से मिशन ने देश के कंप्यूटिंग ढांचे में ज़बरदस्त प्रगति की है। पहले 10,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब भारत ने 38,000 जीपीयू हासिल कर लिए हैं, जिससे विश्व स्तरीय एआई संसाधनों तक सस्ती पहुंच संभव हो रही है।

उज्ज्वला योजना

PM Kisan to Ujjwala

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मई 2016 में शुरू की गई, जिसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को बिना किसी जमा राशि के एलपीजी कनेक्शन दिए जाते हैं। शुरुआत में लाभार्थियों को साल में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे, जिसे बाद में पहले नौ और फिर चार कर दिया गया, लेकिन हर सिलेंडर पर 300 रुपये तक की सब्सिडी जारी रही।

अब तक 2025 तक यह योजना 10.50 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन प्रदान कर चुकी है, जिसने ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ रसोई ईंधन से जोड़कर एक बड़ी सामाजिक क्रांति की है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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