ट्रंप के टैरिफ से भारत के इन 5 सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे अधिक असर
मुख्य बातें
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर आयात शुल्क को दोगुना कर दिया है
- पहले 25 फीसदी शुल्क लग रहा था, जिसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया है
- टैरिफ से आभूषण, कपड़ा, ऑटो, झींगा उद्योग का मुनाफा घट सकता है
- करीब 48.2 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर आयात शुल्क को दोगुना कर दिया है। पहले 25 फीसदी शुल्क लग रहा था, जिसे बढ़ाकर 50 फीसद कर दिया गया है। ट्रंप के इस कदम से प्रमुख भारतीय निर्यातक उद्योगों को तेज झटका लग सकता है और अमेरिका को भारत के 48 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के निर्यात पर असर पड़ेगा। इनमें प्रमुख तौर पर वाहन, कपड़ा और कृषि उद्योग शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामान से सबसे अधिक छोटे और मझोले उद्योग (एमएसएमई) जुड़े हुए हैं, जिनकी भारत के कुल निर्यात में लगभग 45 फीसदी हिस्सेदारी है। अमेरिका का 50 फीसद टैरिफ लागू होने के पांच क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ऊंचे शुल्क के चलते एमएसएमई पर दबाव बढ़ेगा। उनके पहले से ही कम मार्जिन और कम हो जाएंगे और प्रतिस्पर्धा के लिए उनके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।
उदाहरण के लिए अमेरिका के भेजे जाने वाले ऑटो कुलपुर्जों में गियरबॉक्स और ट्रांसमिशन उपकरण की मांग सबसे अधिक है। इसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता एमएसएमई क्षेत्र हैं। ऊंचे टैरिफ के चलते इनका कारोबार सीधे पर पर प्रभावित होगा।
नए गंतव्य ढूंढ रहे निर्यारक
अमेरिकी शुल्क की मार से बचने के लिए भारतीय निर्यातक नए गंतव्य देश की तलाश में जुट गए हैं। खासकर आभूषण और रत्न क्षेत्र के निर्यातक दुबई और मैक्सिको जैसे देशों में नए मैन्युफैक्चरिंग आधार बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी शुल्क बढ़कर 52 फीसद के करीब हो जाएगा, जबकि दुबई पर सिर्फ 10 फीसद और मैक्सिको पर 25 फीसद टैक्स लगता है।
एशिया में सबसे ज्यादा शुल्क
दुनिया में ब्राजील के बाद भारत पर सबसे अधिक 50 फीसद का आयात शुल्क लगाया गया है। वहीं, एशिया और पड़ोसी देशों के मुकाबले भी यह सर्वाधिक है। अमेरिका ने पाकिस्तान पर 19 फीसद, श्रीलंका पर 30 फीसद, बांग्लादेश पर 35 फीसदी और चीन पर 30 फीसद शुल्क लगाया है।
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़े बताते हैं कि कैलेंडर वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को निर्यात 79.44 अरब डॉलर का रहा, जिसमें वर्ष 2023 के मुकाबले 4.8 फीसद अधिक रहा। अगर वित्तीय वर्ष 2024 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार की बात करें तो वह रिकॉर्ड 118.2 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा।
बीते वर्ष (2024) भारत ने अमेरिका को 7,346 वस्तुओं का निर्यात किया जबकि अमेरिका से 5,749 वस्तुओं का आयात किया गया। भारत से अमेरिका को सर्वाधिक निर्यात करने वाले शीर्ष तीन उद्योग इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न एवं आभूषण तथा फार्मास्यूटिकल्स हैं, जिन पर अब सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
ये क्षेत्र हो सकते हैं सबसे अधिक प्रभावित
1. वाहन और कलपुर्जा उद्योग : छोटे और मझोले कारोबारियों पर सीधी मार
सबसे तेज झटका ऑटोमोटिव उद्योगों को लगेगा। भारत के कुल ऑटो कलपुर्जों का निर्यात 22.9 अरब डॉलर रहा। इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 27 फीसद तक है और करीब सात अरब डॉलर का निर्यात उसे किया गया। वहीं, कुल निर्यात में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 20 फीसद और तुर्की, मैक्सिको तथा ब्राजील की संयुक्त हिस्सेदारी 20 फीसद तक है। 50 फीसद शुल्क लगने के बाद लागत अत्यधिक बढ़ जाएगी, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ेगा।
चुनौती : ट्रक, ट्रैक्टर और निर्माण उपकरणों के पार्ट्स का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
2. आभूषण-रत्न क्षेत्र : 10 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित होगा
अमेरिका, भारत के लिए सबसे बड़ा आभूषण बाजार है। देश का रत्न और आभूषणों का कुल निर्यात 28.5 अरब डॉलर का है। इसमें एक तिहाई यानी करीब 10 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को होता है। अन्य देशों में यूएई, हांगकांग और ईयू की संयुक्त हिस्सेदारी 40% तक है। अब भारत को इस क्षेत्र पर कुल 52 फीसद शुल्क चुकाना होगा। इसे निर्यात लागत बढ़ेगी, आपूर्ति में देरी होगी और छोटे कारीगरों से लेकर बड़े निर्माताओं तक पर दबाव बढ़ेगा।
चुनौती : भारतीय निर्यातक दुबई और मैक्सिको जैसे देशों में नए मैन्युफैक्चरिंग आधार बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
3. कपड़ा उद्योग : पड़ोसी देशों से भारत को सीधी चुनौती मिलेगी
इस क्षेत्र में अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारत के कुल वस्त्र और परिधान निर्यात में अमेरिकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत के करीब है। इसके बाद यूरोपीय संघ है, जिसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाने से इस क्षेत्र पर कुल टैरिफ बढ़कर 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। इससे करीब 10 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
चुनौती : भारत को बांग्लादेश, चीन, वियतनाम जैसे एशियाई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी होगी, क्योंकि इन पर भारत के मुकाबले काफी कम टैरिफ लगाया गया है।
4. कृषि क्षेत्र : बासमती चावल निर्यातकों की चुनौतियां बढ़ेंगी
भारत का कुल कृषि निर्यात लगभग 48 से 50 अरब डॉलर का है। इनमें अमेरिका की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत तक है। वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5.8 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका को किया गया। अन्य देशों में ईयू की हिस्सेदारी 20%, मध्य पूर्व देशों की 15% और अन्य यशियाई देशों की 20 प्रतिशत रही। अमेरिका को मुख्य तौर पर बासमती और गैर बासमती चावल, मसाले, चाय, कॉफी और अन्य कृषि उत्पाद भेजे गए।
चुनौती : अमेरिका हर साल 3.5 लाख टन बासमती खरीदता है। इसके निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं। इस क्रम में अन्य वस्तुएं जैसे तिलहन, अरंडी का तेल और प्रसंस्कृत फल, मसाले और काजू का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।
5. झींगा उद्योग : 24 हजार करोड़ का नुकसान संभव
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल समुद्री उत्पाद निर्यात 7.45 अरब डॉलर रहा, जिसमें झींगे का हिस्सा 66% (लगभग 4.9 अरब डॉलर) है। झींगा निर्यात में अमेरिकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही। यानी लगभग 2.24 अरब के झींगे भेजे गए। अब इस पर 60 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। इससे लगभग 24,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर पर असर पड़ सकता है।
चुनौती : भारत के मुकाबले इक्वाडोर, इंडोनेशिया और वियतनाम पर शुल्क काफी कम है, इसलिए अमेरिकी खरीदार अब आसानी से उनकी ओर रुख कर सकते हैं।
सेक्टरवार असर : अमेरिकी टैरिफ का भारतीय निर्यात पर प्रभाव
सोर्स: जीटीआरआई विश्लेषण, डीजीसीआईएस डाटा और अमेरिकी टैरिफ अधिसूचनाओं के आधार पर
अप्रैल-जून 2025 के दौरान भारत के शीर्ष 10 निर्यात गंतव्य
देश अप्रैल-जून 2024 अप्रैल-जून 2025
अमेरिका 20.89 25.52
यूएई 8.83 9.04
नीदरलैंड 7.19 5.65
चीन 3.74 4.41
यूके 3.39 3.52
सिंगापुर 3.32 3.29
जर्मनी 2.77 2.77
बांग्लादेश 2.60 2.69
सऊदी अरब 2.50 2.51
ऑस्ट्रेलिया 1.99 2.17
पहली तिमाही में कितना निर्यात
चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत ने अमेरिका को 25.52 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में 20.89 बिलियन डॉलर था। वहीं, अमेरिका से 12.86 अरब डॉलर का आयात हुआ है, जो बीते वित्तीय वर्ष की समान तिमाही में 11.52 बिलियन डॉलर का रहा था।
टैरिफ का असर
1. उद्योग
- आभूषण, कपड़ा, ऑटो, झींगा उद्योग का मुनाफा घट सकता है। करीब 48.2 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर को अभी टैरिफ से छूट मिली हुई है। इसलिए अभी इनके निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- दवाओं पर शुल्क 0% है लेकिन ट्रंप ने डेढ़ साल बाद 150% और बाद में 250% टैरिफ की चेतावनी दी है। फिलहाल उन्हें छूट मिलती रहेगी।
2. आम आदमी
- 50% शुल्क से अमेरिका में ये चीजें महंगी हो जाएंगी और वहां से ऑर्डर मिलने कम हो जाएंगे।
- यहां कंपनियों को उत्पादन घटाना पड़ेगा, जिससे छंटनी हो सकती है। यानी प्रभावित क्षेत्रों में नौकरियां जाने का खतरा है।
3. अर्थव्यवस्था
- भारी भरकम शुल्क से निर्यात कम हो जाएगा। इससे सरकार के राजस्व में भी कमी आएगी।
- विशेषज्ञों का अनुमान है देश की जीडीपी में 0.2% से 0.6% तक कम हो सकती है और विकास दर 6 फीसदी के करीब आ सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था निर्यात पर कम निर्भर
देश निर्यात (जीडीपी का %)
वियतनाम 87%
थाईलैंड 65%
तुर्किये 32%
फिलीपींस 27%
भारत 22%
इंडोनेशिया 22%
बांग्लादेश 13%
स्रोत: विश्व बैंक
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


