400000 टन भारतीय बासमती अटका, ईरान वॉर के बीच माल ढुलाई हुई दोगुना से ज्यादा
करीब 200,000 टन भारतीय बासमती चावल रास्ते में अटका हुआ है और इतना ही बासमती चावल भारतीय बंदरगाहों पर है, क्योंकि लड़ाई शुरू होने से मिडिल ईस्ट में शिपिंग रूट्स बाधित हो गए हैं।

करीब 400,000 मीट्रिक टन भारतीय बासमती चावल बंदरगाहों पर अटका और रास्ते में है। साथ ही, वीकेंड में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर अटैक किए जाने के बाद से माल ढुलाई की दरें (फ्रेट रेट्स) दोगुना से ज्यादा बढ़ने से एक्सपोर्ट डील्स खत्म हो गई हैं। यह बात ट्रेड ऑफिशियल्स ने कही है। भारत एरोमैटिक और प्रीमियम बासमती चावल का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक है। मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब, ईरान और यूएई भारतीय बासमती चावल के बायर्स हैं। भारतीय बासमती के शिपमेंट में मिडिल ईस्ट की आधे से ज्यादा हिस्सेदारी है।
करीब 2 लाख टन बासमती रास्ते में अटका
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) के प्रेसिडेट सतीश गोयल का कहना है, 'करीब 200,000 टन भारतीय बासमती चावल रास्ते में अटका हुआ है और इतना ही बासमती चावल भारतीय बंदरगाहों पर अटका है, क्योंकि लड़ाई शुरू होने से मिडिल ईस्ट में शिपिंग रूट्स बाधित हो गए हैं।' गोयल ने बताया कि निर्यातक पहले ही बासमती चावल का स्टॉक बंदरगाहों तक पहुंचा चुके थे, लेकिन बढ़ती कंटेनर फ्रेट कॉस्ट की वजह से इसे मिडिल ईस्ट नहीं भेज सके और कोई भी वैकल्पिक मार्केट इतने बासमती चावल को खरीद नहीं सकता है।
ग्लोबल शिपिंग रेट्स में तेज उछाल
टैंकर्स और कंटेनर शिप समुद्री रास्तों से बच रहे हैं, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियों ने उनके वेसेल्स के कवरेज को कैंसल कर दिया है, जबकि ग्लोबल शिपिंग रेट्स में तेज उछाल आया है। गोयल ने बताया कि ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने मदद के लिए ट्रेड मिनिस्ट्री से भी संपर्क साधा है, क्योंकि निर्यातकों को बंदरगाहों पर रखे गए स्टॉक्स के लिए स्टोरेज कॉस्ट्स देनी पड़ रही है। कुछ मामलों में उन्हें ऊंची माल ढुलाई का सामना करना पड़ रहा है।
मिडिल ईस्ट से नए ऑर्डर नहीं ले रहे हैं एक्सपोर्टर्स
निर्यातक, मिडिल ईस्ट से नए ऑर्डर नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वे मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत ही शिपमेंट्स को प्राथमिकता देते हैं। यह बात नई दिल्ली स्थित एक डीलर ने बताई है। भारत में इस साल बासमती की रिकॉर्ड फसल हुई है और निर्यात डिमांड में आई अचानक सुस्ती से बासमती की कीमतें करीब 6 पर्सेंट घट गई हैं। मुंबई बेस्ड एक ट्रेडर ने बताया कि मिडिल ईस्ट में बासमती चावल एक प्रमुख उत्पाद है और असल में भारतीय सप्लाई का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि जैसे ही लड़ाई खत्म होगी, ये देश फिर से स्टॉक करना शुरू कर देंगे।
लेखक के बारे में
Vishnu Soniविष्णु सोनी लाइव हिन्दुस्तान में बिजनेस, गैजेट्स और ऑटो सेक्शन संभाल रहे हैं। वह दिसंबर 2020 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ हैं। वह स्टॉक मार्केट, कॉरपोरेट, पर्सनल फाइनेंस, गैजेट्स और ऑटो की खबरें लिखते हैं। पत्रकारिता में विष्णु को 20 साल पूरे होने को हैं। विष्णु के करियर का ज्यादातर हिस्सा बिजनेस जर्नलिज्म से जुड़ा रहा है। वह दैनिक भास्कर, इकनॉमिक टाइम्स-हिंदी, अमर उजाला, नेटवर्क-18 और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। विष्णु ने पत्रकारिता की पढ़ाई इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन (IIMC), दिल्ली से की है। विष्णु, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट हैं। GST को लेकर बनाए गए विष्णु के एक वीडियो को अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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