Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़4 new labor code will not reduce monthly salaries for the time being but companies will have to make several changes
नए लेबर कोड: मंथली सैलरी फिलहाल कम नहीं होगी, कंपनियों को करने होंगे कई बदलाव

नए लेबर कोड: मंथली सैलरी फिलहाल कम नहीं होगी, कंपनियों को करने होंगे कई बदलाव

संक्षेप:

New Labor Code: नई गणना में ग्रेच्युटी बढ़ सकती है लेकिन हाथ आए मासिक वेतन (टेक-होम सैलरी) पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसमें कटौती नहीं होगी। इसका कारण ईपीएफ पर लागू 15 हजार रुपये की मूल वेतन सीमा है।

Nov 24, 2025 05:42 am ISTDrigraj Madheshia मिंट
share Share
Follow Us on

शिप्रा सिंह

केंद्र सरकार ने देश के पुराने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं और इन्हें चार नई श्रम संहिताओं में बदल दिया है। इसके बाद कंपनियों को अपने सैलरी स्ट्रक्चर को बदलना होगा, जिसका असर ग्रेच्युटी और पीएफ की गणना पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नई गणना में ग्रेच्युटी बढ़ सकती है लेकिन हाथ आए मासिक वेतन (टेक-होम सैलरी) पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसमें कटौती नहीं होगी। इसका कारण ईपीएफ पर लागू 15 हजार रुपये की मूल वेतन सीमा है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

विशेषज्ञों के अनुसार, नई श्रम संहिता में पीएफ में फिलहाल बदलाव नहीं किया गया है। ईपीएफ नियमों के अनुसार, पीएफ योगदान की अनिवार्य गणना ₹15,000 रुपये की मूल वेतन सीमा पर की जाती है और अब भी लागू रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएफ योगदान केवल उन कर्मचारियों के लिए बदल सकता है, जिनका मूल वेतन और डीए ₹15,000 से कम है। उनके वेतन का कुछ हिस्सा पीएफ में थोड़ा ज़्यादा कट सकता है, लेकिन यह ₹15,000 की सीमा से ऊपर नहीं जाएगा।

इस मामले में ईवाई इंडिया से जुड़े पुनीत गुप्ता कहते हैं कि ₹15,000 रुपये की सीमा जारी रहेगी। नई वेतन परिभाषा केवल उन्हीं कर्मचारियों को प्रभावित करेगी, जिनका मूल वेतन और डीए ₹15,000 से कम है। वहीं, केपीएमजी इंडिया में पार्टनर और ग्लोबल मोबिलिटी सर्विसे, टैक्स की प्रमुख परिज़ाद सिरवाला ने कहा कि सरकार ने अभी पुराने पीएफ प्रावधान में बदलाव नहीं किया है, इसलिए इससे जुड़े मौजूदा नियम पहले जैसे ही लागू रहेंगे।

ऐसे समझें नए बदलावों को

1. सैलरी: नई परिभाषा तय

सरकार ने ‘वेतन’ की परिभाषा बदल दी है। अब तक कंपनियां मूल सैलरी (बेसिक पे) को कम रखती थीं और बाकी रकम को अन्य भत्तों के रूप में देती थीं। लेकिन नए नियमों में मूल वेतन कुल सीटीसी का कम से कम 50% रखना होगा। वेतन में बेसिक पे (मूल वेतन), महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य प्रतिदेय भत्ते शामिल होंगे, जबकि एचआरए और यात्रा भत्ता को शामिल नहीं किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इससे सेवानिवृत्ति लाभ बढ़ेंगे। 50 फीसदी मूल वेतन सीमा के आधार पर ग्रेच्युटी, पीएफ, ईएसआईसी, मातृत्व लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा की गणना की जाएगी।

2. ग्रेच्युटी : नई गणना में अधिक ‌फायदा पहुंचेगा

अब तक ग्रेच्युटी की गणना केवल मूल वेतन और डीए के आधार पर होती थी, इसलिए कंपनियां मूल वेतन का हिस्सा कम रखती थीं और बाकी रकम भत्तों के रूप में देकर ग्रेच्युटी को कम रखती थीं। लेकिन अब ग्रेच्युटी की गणना कुल सीटीसी के कम से कम 50% हिस्से के अनुसार होगी। यानी 21 नवंबर के बाद नौकरी छोड़ने वाले या सेवानिवृत्ति होने वाले कर्मचारी को पहले से ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी।

3. ग्रेच्युटी पात्रता: निश्चित अवधि वाले कर्मियों को बड़ा लाभ

1. अनुबंधित कर्मचारी : निश्चित अवधि के लिए अनुबंधित कर्मचारियों को पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम-से-कम पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य थी। अब इनके एक वर्ष की सेवा पूरी करना ही पर्याप्त होगा।

2. स्पष्टता जरूरी : विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यदि निश्चित अवधि का अनुबंध बार-बार नवीनीकृत होता है और सेवा में कोई अंतराल नहीं होता है तो क्या इसे निश्चित अवधि का रोजगार नहीं जाएगा। इस पर स्पष्टता जरूरी है।

2. स्थायी कर्मचारी : वहीं, जो कर्मचारी स्थायी हैं, उनके लिए अब भी ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल पूरे करना जरूरी हैं, जब तक कि मामला मृत्यु या विकलांगता का न हो।

4. वेतन घटने की संभावना कम

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएफ योगदान फिलहाल ₹15,000 रुपये पर सीमित है, जिसका मतबल है कि अधिकांश कर्मचारियों के हाथ आए वेतन (टेक होम सैलरी) पर तुरंत कोई प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। कंपनियां नए कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव कर सकती हैं ताकि नई वेतन परिभाषा के अनुरूप भुगतान संरचना तैयार हो सके, लेकिन मौजूदा कर्मचारियों की वेतन में बदलाव की संभावना कम है।

5. महिला को राहत : ससुराल पक्ष भी परिवार की श्रेणी में शामिल

इन श्रम संहिता के तहत महिला कर्मचारियों के लिए ‘परिवार’ की परिभाषा में पहली बार सास-ससुर को भी शामिल किया गया है। साथ ही अब महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इसके अलावा कार्यस्थल के शिकायत निवारण मंच में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है।

6. नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य

हर कंपनी को अब सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। चाहे वो छोटे दफ्तर में काम करते हों या किसी फैक्ट्री में। इसके साथ ही वेतन हर महीने की सात तारीख तक देना जरूरी होगा और शिकायतों के निपटारे के लिए एक मजबूत प्रणाली भी तैयार की जाएगी।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
जानें Hindi News, Business News की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।