महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में धामी का प्रस्ताव

Dakshita Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित

महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में धामी का प्रस्ताव

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान– लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सदन में सर्वसम्मत संकल्प लाने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह कानून केवल महिलाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने संसद में इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ने नहीं दिया और अब लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के जरिए किसी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा, इस बारे में केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है।

धामी ने महिला सशक्तिकरण के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ भी दिए और रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर कल्पना चावला तक के उदाहरणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जेंडर बजट में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाओं को महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम बताया। साथ ही तीन तलाक के खिलाफ कानून को मुस्लिम महिलाओं के लिए सुरक्षा देने वाला कदम बताया।

प्रदेश स्तर पर सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष जेंडर बजट के तहत करीब 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं को कई सामाजिक कुरीतियों से राहत दी गई है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

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