ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू, विकास गतिविधियों को मिल सकती है राहत
उत्तराखंड सरकार ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत 400 मीटर फ्रीज जोन की समीक्षा शुरू की है। इसमें तकनीकी परीक्षण के बाद विकास गतिविधियों को अनुमति देने की संभावना पर चर्चा की जाएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उत्तराखंड सरकार ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत लागू 400 मीटर के रेलवे फ्रीज जोन की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि जिन क्षेत्रों में रेलवे निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है, वहां तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति देने की संभावना पर विचार किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार के अनुसार, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है और इसके पूरा होने के बाद पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा से समझौता किए बिना स्थानीय विकास की संभावनाओं का आकलन करना है।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को उन क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं जहां रेलवे ट्रैक और उससे संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इन क्षेत्रों में तकनीकी परीक्षण के बाद विकास गतिविधियों पर लागू प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने की संभावना पर विचार किया जाएगा।
रेलवे सुरक्षा के लिए लगाया गया था फ्रीज जोन
राज्य सरकार ने 9 जनवरी 2024 को ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेलवे कॉरिडोर से जुड़े कई क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। इसके तहत रेलवे लाइन के दोनों ओर 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
यह व्यवस्था योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर सहित कई क्षेत्रों में लागू की गई थी। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे सुरंगों, पुलों और अन्य तकनीकी ढांचों की सुरक्षा को प्रभावित न करें।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्रतिबंधों ने परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, समय के साथ इन क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानीय लोगों और निवेशकों ने सरकार से उन इलाकों में प्रतिबंधों की समीक्षा की मांग की थी जहां रेलवे निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
पर्यटन और निवेश को मिल सकता है बढ़ावा
आवास विभाग के अनुसार, समीक्षा प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक क्षेत्र का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा। रेलवे सुरक्षा, भूगर्भीय स्थिति और इंजीनियरिंग मानकों की जांच के बाद ही किसी प्रकार की राहत पर निर्णय लिया जाएगा।
यदि चयनित क्षेत्रों में प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी जाती है तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। राज्य सरकार का मानना है कि रेल परियोजना के शुरू होने के बाद गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी, जिसके लिए पर्यटन संबंधी आधारभूत ढांचे का विस्तार भी आवश्यक होगा।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रतिबंध हटाना नहीं है, बल्कि ऐसा व्यावहारिक समाधान तैयार करना है जिससे रेलवे परियोजना की सुरक्षा और स्थानीय विकास दोनों सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में रेलवे निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि समीक्षा के बाद प्रस्तावित राहत को मंजूरी मिलती है तो लंबे समय से रुकी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
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