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दृढ़ निश्चय, लगन और मेहनत से मिली सफलता : अरूण गुप्ता

अशोक मसाले ने 14 दिसंबर 1957 को किदवईनगर में भारत सेवक समाज के माध्यम से एक नुमाइश का आयोजन कराया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में मसाला उद्योग का जन्म हुआ। इसी के बाद अशोक मसाले ने छोटे पाउच (सैशे) निकाल...

दृढ़ निश्चय, लगन और मेहनत से मिली सफलता : अरूण गुप्ता
लाइव हिन्दुस्तान टीम,KANPUR, UTTAR PRADESHFri, 21 Jan 2022 04:07 PM
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अशोक मसाले ने 14 दिसंबर 1957 को किदवईनगर में भारत सेवक समाज के माध्यम से एक नुमाइश का आयोजन कराया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में मसाला उद्योग का जन्म हुआ। इसी के बाद अशोक मसाले ने छोटे पाउच (सैशे) निकाल इतिहास रच डाला। वर्ष 1980 के दशक में कंपनी के प्रोडक्शन टीम से अरूण गुप्ता भी जुड़ गए और तब से लेकर आजतक वह कंपनी का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं। अरुण गुणवत्ता में भरोसा करते हैं। उनके सक्षम नेतृत्व में आज यह कंपनी दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर रही है।

अशोक मसाले के डायरेक्‍टर अरुण गुप्ता बताते हैं कि शुरुआत में सब्जी मसाले के छोटे पाउच लॉन्च करने के पीछे तर्क बस इतना सा था कि गरीब मजदूर प्रतिदिन डेढ़ से दो रूपए कमाकर आता है, वह शाम को जब सुकून की दो रोटी खाए तो उसमें कम से कम शुद्ध मसालों का स्वाद मिल सके। ग्राहकों के अटूट विश्वास के दमपर पिछले 65 वर्षों से अशोक मसाला यूपी, उत्तराखंड, एमपी, बिहार, झारखंड, नई दिल्ली,असम, पश्चिम बंगाल, हरियाणा,महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर की हर घर की किचन का किंग बना हुआ है।

अरूण गुप्ता की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा कानपुर के हिंदी मीडियम स्कूल से हुई। तत्पश्चात उन्होंने साइंस में बीएससी करने के बाद लॉ की पढ़ाई की। वकालत की पढ़ाई के बाद साल 1980 में वह अशोक मसाले के प्रोडक्शन टीम का हिस्सा बने और आज भी यह सफर अनवरत जारी है। उसी वर्ष उनकी शादी भी हो गई। उनकी पत्नी कानपुर के चार्टेड एकाउंटेट परिवार से संबंध रखती हैं। अपने प्रारंभिक जीवन के बारे में बात करते हुए अरूण गुप्ता यह बताते हैं कि शुरूआत के दिनों में उन्होंने प्रोडक्शन टीम के अंदर कई रातें काम के सिलसिले में जागकर गुजारी। साईकिल से खुद की गाड़ी तक का सफर इतना आसान न था। पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दमपर 500 रूपए महीने की सेलिंग वाली कंपनी को आज उन्होंने ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया है।

वर्ष 1980 के दशक में कंपनी के प्रोडक्शन टीम से अरूण गुप्ता जुड़ गए और तब से लेकर आजतक वह कंपनी का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं। उन्होंने शुरूआत प्रोडक्शन टीम से जुड़कर की, लेकिन बाद में धीरे-धीरे फाइनेंस और मार्केटिंग में भी अपनी धाक जमाई। अपने नए -नए आइडियाज और कुशल नेतृत्व के जरिए
उन्होंने अशोक मसाले को एक नई ऊंचाई दी।

अपने पिता रामकिशोर गुप्ता के बारे में बात करते हुए अरूण गुप्ता कहते हैं कि उनके पिता हमेशा से ही उनके सच्चे मार्गदर्शक रहे। स्वर्गीय रामकिशोर गुप्ता ने बहुत ही छोटे स्तर पर इस कंपनी की शुरूआत की। धीरे-धीरे अच्छे और ईमानदार लोगों के सहयोग से व अरूण गुप्ता ने खुद की मेहनत के दमपर कंपनी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। गुणवत्ता युक्त उत्पादन अशोक मसाले की असली व एकमात्र पहचान है।

यहां सभी उत्पाद लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तथा शुद्ध सामग्री द्वारा निर्मित हैं और यह सुनिश्चित किया जाता है कि इन उत्पादों को बनाते समय स्वच्छता और गुणवत्ता से समझौता न किया गया हो। इन उत्पादों द्वारा खाना बनाना अधिक आसान हो जाता है, साथ ही स्वाद बढ़ता है। कंपनी दाल का मसाला, बिरयानी मसाला, रायता मसाला, पाव भाजी मसाला, चना मसाला, गरम मसाला, सांभर मसाला, चाट मसाला, तवा चाट, मीट मसाला, जलजीरा मसाला, शिकंजी मसाला, सब्जी मसाला, मिर्च अचार, गोल गप्पा मसाला, शाही पनीर मसाला, राजमा मसाला, दाल मखनी मसाला, सलाद मसाला आदि उपलब्ध कराती है।

अरूण कुमार ने अशोक मसाले के नए आइडियाज पर बात करते हुए बताया कि इजी टू कुक वर्तमान समय में कंपनी की यूएसपी बन चुकी है। इजी टूट कुक में चिकन, पनीर या किसी भी तरीके का जो व्यंजन बनाना हो वह डालकर बस स्वादनुसार नमक डाल दें बाकि आइटम बनकर तैयार हो जाता है।

• अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इंडस्ट्री बनाना है प्राथमिकता

• इजी टू कुक के अंतर्गत रेडी टू ईट प्रोग्राम लांच करने की योजना है, जिसमें विभिन्न स्नैक और सूप को मिक्स करने की सुविधा रहेगी। डोसा, इडली, ढ़ोकला, उपमा, मन्चूर्यन, कॉर्न, टोमैटो सूप को मार्केट में लाने की प्लानिंग है।

अरूण गुप्ता का कहना है कि शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जिसके जरिए समाज की रीढ़ को सशक्त और मजबूत बनाया जा सकता है। इसी मकसद से वह और उनकी कंपनी समय -समय पर जरूरतमंद बच्चों के बीच किताब-कॉपी, ड्रेस आदि बांटते रहते हैं। कई बच्चों को उन्होंने निजी स्तर पर गोद भी लिया है। शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही उन्होंने एकल अभियान से जुड़कर 40 विद्यालयों की स्थापना की, जिसके जरिए आज लाखों बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

कोरोना काल में जहां पूरी दुनिया एक हो गई थी। हर कोई एक -दूसरे की सहायता कर रहा था। उनदिनों भी अरूण गुप्ता और अशोक मसाला ब्रांड अपने निस्वार्थ सेवा की वजह से लोगों के बीच चर्चा में बना रहा। कोरोना पीड़ितों की सहायतार्थ मुफ्त राशन बंटवाए, जरूरत मंद लोगों को खाना खिलाया, उनके दवाई की व्यवस्था की साथ ही मसालों के सैंपल बंटवाए।

आपकी जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर है। मान लिया तो हार, ठान लिया तो जीत। खुलकर जीवन जीएं और जीवन में आने वाली बाधाओं से डरें नहीं बल्कि उनका डटकर सामना करें। अगर कोई गलती हो भी जाए तो सुधार कर आगे बढ़ जाएं। जीवन में इस मंत्र को अपनाने से सफलता निश्चित है।

(इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/संस्थान की है।)