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बाल रोग के लिए खास है संस्कृति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

HT Brand StudioPratyush Chaurasia
Wed, 10 Nov 2021 03:43 PM
बाल रोग के लिए खास है संस्कृति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

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संस्कृति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (शिशु स्वास्थ्य के लिए सुविधाएं). संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कई विभागों में ओपीडी सुविधा प्रदान करता है.

कौमारभृत्य विभाग (बाल रोग) नवजात ​शिशुओं के जन्म के समय से परिपक्व होने तक देखभाल करता है. इसमें नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों की चिकित्सा देखभाल शामिल है. हमारे अस्पताल में योग्य और कुशल डॉक्टर बच्चों की देखभाल और कई रोगों के उपचार के लिए उपलब्ध हैं.

यह सुविधाएं उपलब्ध हैं:

कौमारभृत्य विभाग में रोजाना ओपीडी की उपलब्धता (सोमवार-शनिवार सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे).

नवजात देखभाल इकाई (एनआईसीयू) और नवजात जांच भी उपलब्ध है.

बचपन में होने वाली विशिष्ट बीमारियां जैसे व्यवहार संबंधी विकार, वृद्धि संबंधी विकार, दीर्घकालिक संक्रमण, त्वचा रोग आदि के लिए विशेष आयुर्वेद उपचार उपलब्ध हैं.

विभिन्न प्रकार के बचपन के रोगों के लिए विशेष पंचकर्म उपचार मौजूद हैं.

बच्चे जो देर से सक्रिय होते हैं यानि जो समय से बैठने या खड़े होने में असमर्थ होते हैं उनका  पंचकर्म प्रक्रियाओं जैसे षष्ठीशाली पिंडा स्वेडा (Shastikashali Pinda Sweda) के साथ अच्छे परिणामों के साथ उपचार किया जाता है.

अन्य प्रक्रियाएं जैसे उदवर्तन (सूखे पाउडर से मालिश), सर्वांग या एकंग अभ्यंग (औषधीय तेल से पूरे शरीर या विशिष्ट क्षेत्र की मालिश), स्वेदन (भाप) विशिष्ट रोगों में जरूरत के हिसाब से या मजबूती प्रदान करने के लिए उपयोग की जाती है.

नस्य, शिरोधारा प्रक्रियाएं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार और तंत्रिका संबंधी समस्याओं के लिए उपयोग की जाती हैं.

डॉक्टरों द्वारा माता-पिता के लिए परामर्श सत्र भी आयोजित किया जाता है जिसमें बच्चे की स्नायविक विकास की देखभाल के लिए और पोषण संबंधित जानकारी के लिए माता पिता को प्रोत्साहित किया जाता है. तंत्रिका संबंधी विकास और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए यह महत्वपूर्ण है.

आईपीडी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिसमें अच्छी तरह से प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा बच्चों का इलाज होता है.

एसएएमसीएच बच्चों की जागरूकता और जनता की सेवा के लिए विभिन्न बाल स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों की भी व्यवस्था करता है जैसे स्कूल स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण कार्यक्रम, योग और प्राणायाम शिविरों को आयोजित किया जाता है.

सुवर्ण प्राशन शिविर (Suvarna Prashan Camp) हर महीने पुष्य नक्षत्र के दिन आयोजित किया जाता है. औषधीय घी और शहद के साथ पिघला हुआ गोल्ड बच्चों (उम्र 0-16 वर्ष) को दिया जाता है जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में मदद करता है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने में मदद करता है जो विभिन्न संक्रमणों से लड़ता है. इस शिविर के माध्यम से हर महीने कई बच्चे लाभान्वित होते हैं.

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