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बदल रहा है इंडिया और उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है हमदर्द इंडिया

HT Brand StudioPublished By: Pratyush Chaurasia
Tue, 27 Jul 2021 07:06 PM
बदल रहा है इंडिया और उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है हमदर्द इंडिया

इंडिया के हर घर में एक कहावत बहुत चलती है "जब भी हम दर्द में होते हैं तो हमदर्द के प्रोडक्ट्स हमारे साथ होते हैं"। हमदर्द से जुड़ी यह बात रातों रात नहीं बनी, इसके लिए इन्होनें तय किया है पूरे 115  सालों का लम्बा सफर। एक शताब्दी से ज़्यादा वक़्त तक बाज़ार में अपनी लोकप्रियता बनाए रखना किसी भी कंपनी के लिए एक मील का पत्थर होता है जिसमें ये पूरी तरीके से खरे उतरे हैं। देश के लगभग हर घर में किसी ना किसी तरह से मौजूद हमदर्द ने ना सिर्फ़ इस अद्भुत उपलब्धि को अपने नाम किया है, बल्कि साल 2021 के साथ-साथ आने वाले कल में भी लोगों की सेवा करने और अपने नाम को एक नयी ऊंचाई देने के लिए एक मज़बूत खाका तैयार किया है। हमदर्द इंडिया के चेयरमैन, अब्दुल मजीद जी ने कंपनी के अब तक के शानदार सफर और नए इंडिया के साथ वो कैसे कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं, सब विषयों पर खुलकर बात करी। 
 
उन्होनें बताया, साल 1906 में जब हकीम अब्दुल मजीद ने हमदर्द की नींव रखी थी तब उन्होनें शायद ही कभी सोचा होगा कि एक दिन यह कंपनी देश में यूनानी औषधि का पर्याय बन जाएगी। बहरहाल, हमदर्द ने पिछले 115 सालों में ऐसा कर दिखाया है। सिर्फ़ इतना ही नहीं, आने वाले वक़्त में भी इसी तरह अपनी विरासत बनाए रखने के लिए हमदर्द पूरी तरह तैयार है। चाहे वो नये सिरे से बाज़ार में अपने वर्तमान स्थिति का आकलन करना हो या यूनानी औषधि में मिलेनियल्स की रुचि का अंदाज़ा लगाना, हमदर्द वो सब कर रहा है जो आज के दौर की हर बेहतरीन कंपनी करती है और इसे हर वर्ग में काफी पसंद भी किया जा रहा है। 
 
जब पूरे देश और दुनिया में कोरोना का कहर आया तब हमदर्द ने रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने वाली और श्वसन अंगों को दुरुस्त रखने वाली कई नयी दवाइयों को बाज़ार में उतारा| इनमें कलौंजी पाउडर और अश्वगंधा पाउडर जैसी दवाइयां लोगों में बेहद लोकप्रिय भी हुई| लोगों ने प्राकृतिक दवाओं की तरफ रुख किया और हमदर्द ने भी इसमें उनका बखूबी साथ दिया| हमदर्द हमेशा से ही गुणवत्ता से लेकर स्वच्छता पर विशेष ज़ोर देता रहा है और कोरोना काल में जब पूरी दुनिया ने भी इसके महत्व को समझा तो कंपनी का अपने काम करने के तरीकों पर भरोसा और भी मजबूत हुआ। अब्दुल मजीद जी ने ये भी बताया कि हमदर्द कंपनी का फोकस हैल्थ और एजुकेशन है और इसी कड़ी में वो देश की राजधानी दिल्ली में एक मेडिकल कॉलेज और 500 बिस्तर का एक अस्पताल भी चलाते हैं, जहां पर लोगों की सेहत का ख्याल रखने के लिए हर प्रकार के शोध पर विशेष ध्यान दिया जाता है|
 
हमदर्द ने वक़्त से साथ अपनी कार्य प्रणाली और अन्य क्षेत्रों में भी लगातार सुधार किया है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हम सबके जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। इस बात को बखूबी समझते हुए हमदर्द ने भी इसपर काफी ध्यान दिया है। इसके अलावा सेल्स, मार्केटिंग, डिस्ट्रिब्यूशन, सप्लाइ चेन और अन्य सभी प्रणालियों में लगातार सुधार करते हुए हमदर्द एक बेहतर भविष्य की तरफ मज़बूती से आगे बढ़ रहा है। हमदर्द इंडिया के चेयरमैन ने कहा कि कंपनी आने वाले पांच सालों में हज़ार करोड़ का टर्नओवर पार करने के विज़न की तरफ तेज़ी से बढ़ रही है। जिस तरह से देश कोरोना की दोनों लहरों से पूरी मजबूती से उबर कर निकला है, ऐसे में हमदर्द भी अपनी नयी ज़िम्मेदारियों को अच्छी तरह से समझ कर आगे बढ़ रहा है। हाल ही में हमदर्द इंडिया की नई पहल ‘सेहत है तो वतन है’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। इससे जुड़े एक विडियो को यूट्यूब पर बहुत ही कम समय में 15 लाख से भी ज़्यादा लोग देख चुके हैं, जो हमदर्द के प्रति लोगों का अटूट भरोसा दिखाता है। इसी भरोसे को और मज़बूत बनाने के लिए हमदर्द कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।


 

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