मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना से जुड़ी रीलों ने सोशल मीडिया पर बनाई पहचान
लाभार्थी महिलाएं रील, गीत और हास्य वीडियो के जरिए योजना के अनुभव साझा कर रही हैं, जिससे मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।

पंजाब सरकार ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गई है। सरकार के अनुसार, योजना की लाभार्थी महिलाएं रील, डांस वीडियो, लिप-सिंक और हास्य आधारित कंटेंट बनाकर अपने अनुभव साझा कर रही हैं, जिससे योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान मिली है।
सरकार ने एक बयान में कहा कि आमतौर पर सरकारी योजनाओं का प्रचार सरकारी अभियानों तक सीमित रहता है, लेकिन इस योजना में लाभार्थी स्वयं इसके बारे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा कर रहे हैं। सरकार के मुताबिक, यह ट्रेंड बिना किसी सेलिब्रिटी या पेड इन्फ्लुएंसर के सहयोग के स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ है।
'टूँ-टूँ' नोटिफिकेशन बना सोशल मीडिया ट्रेंड का हिस्सा
सरकार के अनुसार, मोबाइल पर आने वाली "टूँ-टूँ" नोटिफिकेशन की ध्वनि अब योजना से जुड़ी हजारों सोशल मीडिया रीलों का प्रमुख हिस्सा बन गई है। बयान में कहा गया कि महिलाएं स्थानीय बोली, लोकप्रिय ऑडियो ट्रैक और रोजमर्रा के हास्य का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार कर रही हैं, जिन्हें परिवारों और मित्रों के बीच व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
सरकार ने कहा कि योजना से जुड़े कई गीत भी सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुए हैं, जिनकी धुन पर बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने वीडियो बना रहे हैं। बयान के मुताबिक, पुरुषों द्वारा भी हल्के-फुल्के अंदाज में इस योजना पर आधारित वीडियो और रैप साझा किए जा रहे हैं, जिससे यह चर्चा का विषय बन गई है।
सरकार ने डिजिटल भागीदारी को बताया सकारात्मक संकेत
सरकार ने कहा कि यह रुझान दिखाता है कि छोटे वीडियो वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोग इनके माध्यम से सरकारी योजनाओं और नीतियों को अपने अनुभवों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं।
बयान के अनुसार, लाभार्थी अब केवल योजना के प्राप्तकर्ता नहीं रहे, बल्कि वे अपने अनुभव साझा करने वाले कंटेंट क्रिएटर और योजना के अनौपचारिक प्रचारक भी बन गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे समुदायों के भीतर योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली है।
सरकार ने यह भी कहा कि यह पहल पंजाब की संगीत, हास्य और कहानी कहने की परंपरा को डिजिटल माध्यमों से आगे बढ़ाने का उदाहरण है। उसके अनुसार, लाभार्थियों की स्वैच्छिक भागीदारी यह दर्शाती है कि व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित संवाद कई बार पारंपरिक प्रचार अभियानों की तुलना में अधिक व्यापक पहुंच बना सकते हैं।
योजना के तहत महिलाओं के खातों में सहायता राशि पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी सामग्री की संख्या लगातार बढ़ी है। कई लाभार्थी अपने वीडियो में राशि प्राप्त होने की सूचना और उससे जुड़ी खुशियां भी साझा कर रही हैं, जिससे इस ट्रेंड को और गति मिली है।
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