पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाया 5% का कैप, वन विभाग के 516 दिहाड़ी कर्मचारियों की सेवाएं नियमित
जिसके तहत दैनिक कर्मचारी स्थायी बन जाएंगे, पंजाब सरकार ने शिक्षा और कल्याण में महत्वपूर्ण नीतियों की घोषणा की। अब निजी स्कूलों को वार्षिक परीक्षा में 5% से अधिक फीस वृद्धि के लिए अनुमति लेनी होगी। यह कदम छात्रों और कर्मचारियों को आर्थिक राहत प्रदान करेगा।

पंजाब सरकार ने सोमवार को शिक्षा और कर्मचारी कल्याण से जुड़े दो बड़े फैसलों का ऐलान किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि राज्य सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू कर निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण लगाया है। इसके साथ ही वन विभाग के 516 दिहाड़ी कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए।
निजी स्कूलों को 10 दिन में चार साल की फीस का ब्योरा देना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यादेश लागू होने के बाद अब निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल सालाना 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक फीस बढ़ाने के लिए संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर 15% से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।
सरकार ने सभी निजी स्कूलों को अगले 10 दिनों के भीतर पिछले चार वर्षों में वसूली गई फीस का पूरा विवरण निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। इसके बाद रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और यदि किसी संस्थान द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूले जाने की पुष्टि होती है तो अतिरिक्त राशि लौटानी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विद्यार्थियों या अभिभावकों से किसी भी नाम से वसूला जाने वाला शुल्क, जैसे परिवहन शुल्क, बिल्डिंग फंड या अन्य मदों में लिया गया पैसा, फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कई संस्थान अलग-अलग मदों में शुल्क लेकर वास्तविक फीस बढ़ा देते थे, इसलिए नई व्यवस्था में सभी प्रकार के शुल्क को रेगुलेशन के दायरे में लाया गया है।
उन्होंने बताया कि उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला रेगुलेटरी कमेटियां फीस वृद्धि के प्रस्तावों की जांच करेंगी। साथ ही निजी स्कूलों की फीस संरचना की जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट भी कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर पहली बार 50,000 रुपये, दूसरी बार 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि तीसरी बार उल्लंघन होने पर मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार के अनुसार पंजाब के करीब 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं और नया अध्यादेश इन्हीं विद्यार्थियों तथा उनके परिवारों को मनमानी फीस वृद्धि से राहत देने के उद्देश्य से लाया गया है।
वन विभाग के 516 कर्मचारियों को नियमित किया, 237 पदोन्नतियां भी बहाल
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वन विभाग के 516 दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति पत्र सौंपते हुए विभाग के 237 अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियां बहाल करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि नियमित किए गए कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा मिलेगी और वे 5% वार्षिक वेतन वृद्धि के भी पात्र होंगे।
मान ने कहा कि नियमित किए गए कर्मचारियों में कई ऐसे हैं जिन्होंने 10 वर्ष से अधिक और कुछ ने लगभग 25 वर्ष तक दिहाड़ी कर्मचारी के रूप में काम किया है। इनमें से कई कर्मचारी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा पूरी नहीं कर पा रहे थे, इसलिए मंत्रिमंडल ने विशेष छूट देकर उन्हें नियमित करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले चार वर्षों में वन विभाग के 1,458 दिहाड़ी कर्मचारियों की सेवाएं नियमित की जा चुकी हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में विभाग में 342 नियमित नियुक्तियां भी की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तक 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां मेरिट के आधार पर दे चुकी है और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार वन विभाग के पुराने और जर्जर फॉरेस्ट रेस्ट हाउसों के पुनरुद्धार की योजना पर भी काम कर रही है ताकि विभाग की आय बढ़ाई जा सके। कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले कर्मचारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वर्षों से चली आ रही रोजगार संबंधी अनिश्चितता समाप्त हुई है और उनके परिवारों को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।
इन दोनों फैसलों के जरिए पंजाब सरकार ने एक ओर निजी स्कूलों की फीस पर नियमन का ढांचा मजबूत करने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी सेवा में स्थायित्व देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
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