पंजाब में स्वास्थ्य योजना का विस्तार, 40 लाख से अधिक परिवारों को 10 लाख रुपये तक का कवर
पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 40 लाख से अधिक हेल्थ कार्ड जारी हो चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। अब हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल रहा है, जिससे मरीजों का इलाज समय पर हो रहा है।

पंजाब में मुख्य मंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत 40 लाख से अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच तेजी से बढ़ रही है। 23 अप्रैल को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह योजना शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक लोगों को किफायती और सम्मानजनक इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना के तहत हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कवर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, पहले इलाज महंगा होने के कारण मरीज उपचार टाल देते थे, जांच नहीं कराते थे और दवाइयां बीच में छोड़ देते थे। इससे लोगों की सेहत तो खराब होती ही था, आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता।
आंकड़ों के अनुसार, 21 अप्रैल को एक ही दिन में 28,766 पंजीकरण हुए। जिला स्तर पर लुधियाना 4.20 लाख कार्ड के साथ सबसे आगे है, जबकि पटियाला (3.82 लाख) और जालंधर (2.85 लाख) भी प्रमुख स्थान पर हैं। खास बात यह है कि यह योजना अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि होशियारपुर, अमृतसर, मानसा, फाजिल्का और बरनाला जैसे टियर 2 और टियर 3 जिलों में भी तेजी से फैल रही है।
जमीनी स्तर पर बदलाव और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
डॉक्टरों के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव मरीजों के व्यवहार में बदलाव के रूप में सामने आया है। उप-मंडलीय अस्पताल खन्ना के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनिंदर सिंह भसीन ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा किसी विशेष अधिकार की तरह नहीं होनी चाहिए। पहले कवरेज सीमित थी, लेकिन अब हर निवासी को शामिल किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “हाल के महीनों में हमने 200 से अधिक गॉलब्लैडर (पित्ताशय) सर्जरी की हैं। आम तौर पर इसकी लागत 40,000 से 80,000 रुपये होती है, लेकिन मरीजों को इस योजना के अंतर्गत कोई भुगतान नहीं करना पड़ा।”
उन्होंने बताया, “घुटने और कूल्हे की रिप्लेसमेंट, जिनकी लागत 1 लाख रुपये से अधिक है, अब मुफ्त हो रही हैं। हम हर रोज लगभग 10 सर्जरी करते हैं, वह भी सभी कैशलेस।” आपातकालीन उपचार के बारे में उन्होंने कहा, “एसटी एलिवेशन मायोकॉर्डियल इन्फार्कशन (एसटीईएमआई) हार्ट-अटैक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। टेनेक्टेप्लाज़ नाम की थ्रोम्बोलिटिक दवा से हम खून का प्रवाह जल्दी बहाल करते हैं और अब तक हमने करीब 100 मरीजों की जान बचाई है।”
बरनाला के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करन चोपड़ा ने कहा, “पहले मरीज महीनों तक सर्जरी टालते थे और अब वे तुरंत इलाज के लिए आ रहे हैं। हर सर्जरी के पीछे लोगों को एक से डेढ़ लाख रुपये की बचत हो रही है।”
नीति और सामाजिक प्रभाव
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाएं अब भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं रहीं। मुख्य मंत्री सेहत योजना के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का कवर मिल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि बिना किसी आर्थिक बोझ के हर घर-परिवार तक मानक इलाज पहुंचे।”
यह योजना महंगी बीमारियों, जैसे कैंसर के इलाज में भी बड़ी राहत दे रही है। पहले जहां परिवारों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे, अब वे कैशलेस इलाज का लाभ उठा पा रहे हैं।
सरकार के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा असर मानसिक स्तर पर देखा जा रहा है। पहले जहां मरीज बीमारी बढ़ने तक इंतजार करते थे, अब वे शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होने की उम्मीद है।
पंजाब सरकार का कहना है कि यह पहल केवल स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार नहीं, बल्कि एक ऐसा मॉडल तैयार कर रही है जिसमें खर्च के डर से इलाज रुके नहीं। जिसे भी जरूरत हो, उसका इलाज तुरंत हो। लगातार बढ़ते पंजीकरण और उपयोग के साथ यह योजना राज्य की स्वास्थ्य नीति का केंद्रीय स्तंभ बनती जा रही है।
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