27 सप्ताह में जन्मी बच्ची को मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मिला ₹3 लाख का कैशलेस उपचार

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नवांशहर की 700 ग्राम वजनी बच्ची को 50 दिनों की विशेष एनआईसीयू देखभाल के बाद अस्पताल से स्थिर हालत में छुट्टी दी गई

27 सप्ताह में जन्मी बच्ची को मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मिला ₹3 लाख का कैशलेस उपचार
नवांशहर में गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में जन्मी 700 ग्राम वजनी बच्ची को 50 दिनों की विशेष एनआईसीयू देखभाल के बाद अस्पताल से स्थिर हालत में छुट्टी दी गई। करीब ₹3 लाख का उपचार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस उपलब्ध कराया गया।

पंजाब के नवांशहर में गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में जन्मी एक बच्ची को मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत करीब ₹3 लाख का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया गया। जन्म के समय बच्ची का वजन केवल 700 ग्राम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। गंभीर श्वसन समस्या के कारण उसे एक सूचीबद्ध निजी अस्पताल की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां 50 दिनों तक उपचार के बाद उसे स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बच्ची का जन्म 9 जून, 2026 को नवांशहर के शिव शंकर मोहल्ला निवासी सूरज और उनकी पत्नी के घर हुआ था। समय से करीब तीन महीने पहले जन्म होने के कारण बच्ची को तत्काल विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और लगातार उसकी स्थिति की निगरानी की।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को उपचार के दौरान होने वाले खर्च से राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “किसी भी परिवार को जीवन बचाने और इलाज के लिए पैसे जुटाने के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। हर मां सुरक्षित प्रसव की हकदार है और हर नवजात को जीवन की लड़ाई लड़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।”

50 दिनों तक दी गई विशेष चिकित्सा देखभाल

बच्ची का उपचार करने वाले डॉ. हरतेश सिंह पाहवा ने बताया कि गर्भावस्था की इतनी कम अवधि में जन्म लेने वाले बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते और उन्हें चौबीसों घंटे विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि बच्ची को श्वसन सहायता देने के साथ उचित पोषण, संक्रमण से बचाव और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई गई। उपचार के दौरान उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और 50 दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकी।

डॉ. पाहवा के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत करीब ₹3 लाख के पूरे उपचार खर्च को कैशलेस आधार पर कवर किया गया। इससे परिवार को अस्पताल के बिल की व्यवस्था करने के बजाय बच्ची के उपचार और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिली।

बच्ची के पिता सूरज ने कहा कि लंबे समय तक चले एनआईसीयू उपचार का खर्च स्वयं उठाना उनके परिवार के लिए कठिन होता। उन्होंने कहा, “ऐसे कई पल आए जब हमें लगा कि हम अपनी बेटी को खो देंगे। डॉक्टरों ने हमें उम्मीद दी और सरकार की योजना के कारण हमें इलाज के लिए पैसे जुटाने की चिंता नहीं करनी पड़ी।”

राज्य सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों में पात्र लाभार्थियों को विभिन्न बीमारियों और चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। नवजात शिशुओं की स्थिति और आवश्यक उपचार के आधार पर योजना में अलग-अलग स्तर के नियोनेटल केयर पैकेज शामिल किए गए हैं।

चार नियोनेटल पैकेज के तहत 4,404 मामले कवर

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब सात महीनों में स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज के तहत 1,869 नवजातों के उपचार से संबंधित ₹2.50 करोड़ के दावे दर्ज किए गए। इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज के तहत 1,719 नवजातों के उपचार के लिए ₹3.78 करोड़ के दावे स्वीकृत किए गए।

इन दोनों श्रेणियों के तहत कुल ₹6.28 करोड़ के दावों के माध्यम से 3,588 नवजातों का उपचार किया गया। इसके अतिरिक्त, एडवांस्ड नियोनेटल केयर पैकेज के तहत 434 और क्रिटिकल केयर नियोनेटल पैकेज के अंतर्गत 382 मामलों को कवर किया गया। इस प्रकार चारों नियोनेटल पैकेज के तहत कुल 4,404 मामले दर्ज किए गए।

एजेंसी के अनुसार, योजना से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं से जुड़ी 474 महिलाओं को भी लाभ मिला है। इनमें मां और गर्भस्थ शिशु से संबंधित जटिल स्थितियां, समयपूर्व प्रसव के 70 मामले, गंभीर एनीमिया के 45 मामले, गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया या एक्लेम्पसिया के 19 मामले और भ्रूण में गंभीर जन्मजात विकृति के दो मामले शामिल हैं।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं तथा विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले नवजातों के उपचार पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर कैशलेस उपचार उपलब्ध होने से चिकित्सकीय जोखिम के साथ लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने से परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी कम किया जा सकता है।

Shivani Navin Vahalia Pareek

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