बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों के मुआवजे में गुजरात सरकार की बड़ी बढ़ोतरी

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

गुजरात सरकार ने बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए नई नीति का ऐलान किया है। अब किसानों को प्रचलित बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर मुआवजा मिलेगा, जिससे उन्हें संपत्ति के बेहतर मूल्यांकन और समर्थन की उम्मीद है।

बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों के मुआवजे में गुजरात सरकार की बड़ी बढ़ोतरी

गुजरात सरकार ने बिजली ट्रांसमिशन लाइन और टावर परियोजनाओं से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए मुआवजे की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की है। नई नीति के तहत अब किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा जंत्री दरों के बजाय प्रचलित बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर दिया जाएगा।

अब जंत्री दरों नहीं, बाजार मूल्य के दोगुने पर मिलेगा मुआवजा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में लिया गया यह निर्णय किसानों और किसान संगठनों के साथ व्यापक चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया गया। कृषि मंत्री जितुभाई वाघाणी, ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल और ऊर्जा राज्यमंत्री कौशिकभाई वेकारिया ने भी किसानों के साथ कई दौर की बातचीत की।

अब तक कृषि भूमि से गुजरने वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और पोलों के लिए मुआवजा जंत्री मूल्य के 200 प्रतिशत के आधार पर दिया जाता था। किसान संगठनों का लंबे समय से कहना था कि जंत्री दरें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम होती हैं, जिससे किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता।

किसानों की मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने अब बाजार मूल्य आधारित मुआवजा प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार मार्केट रेट कमेटी (एमआरसी) का गठन करेगी, जो भूमि का प्रचलित बाजार मूल्य निर्धारित करेगी।

इस समिति में जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित अधिकृत मार्केट वैल्यूअर और ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार का कहना है कि समिति में किसानों की भागीदारी से मूल्य निर्धारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।

किसानों को काम शुरू होने से पहले मिलेगा पूरा भुगतान

नई नीति के तहत ट्रांसमिशन टावरों के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले मुआवजा केवल टावर के वास्तविक बेस एरिया पर दिया जाता था। अब टावर के चारों ओर अतिरिक्त एक-एक मीटर क्षेत्र को भी मुआवजा क्षेत्र में शामिल किया जाएगा, जिससे किसानों को अधिक राशि प्राप्त होगी।

उदाहरण के तौर पर, 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए मुआवजा क्षेत्र 625 वर्गमीटर से बढ़ाकर 729 वर्गमीटर कर दिया गया है।

राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए पहले से लागू किस्त आधारित भुगतान प्रणाली को भी समाप्त कर दिया है। पहले मुआवजा तीन चरणों में दिया जाता था—40 प्रतिशत फाउंडेशन कार्य के दौरान, 40 प्रतिशत टावर निर्माण के समय और शेष 20 प्रतिशत ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के बाद।

अब नई व्यवस्था के तहत किसानों को परियोजना कार्य शुरू होने से पहले ही 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा।

राइट ऑफ वे (RoW) कॉरिडोर के तहत भी मुआवजा बाजार मूल्य से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को बाजार मूल्य का 30 प्रतिशत, नगरपालिका क्षेत्रों में 45 प्रतिशत और नगर निगम क्षेत्रों में 60 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की मुआवजा प्रक्रिया पुरानी नीति के तहत तय हो चुकी है लेकिन परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं, उन्हें भी नई नीति का लाभ मिलेगा।

गुजरात सरकार ने कहा कि संशोधित नीति किसानों के हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और बाजार आधारित उचित मुआवजा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Dakshita Ojha

लेखक के बारे में

Dakshita Ojha

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।