संघर्ष की भट्ठी से तपकर निकले द डिवाइन पब्लिक स्कूल के चेयरमैन अखिलेश कुमार की प्रेरक कहानी

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बिहार की धरती हमेशा से ज्ञान, तप और संघर्ष की भूमि रही है। इसी पावन धरा के रोहतास जिले में स्थित बिक्रमगंज अनुमंडल आज शैक्षणिक क्रांति का एक नया केंद्र बन चुका है।

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बिहार की धरती हमेशा से ज्ञान, तप और संघर्ष की भूमि रही है। इसी पावन धरा के रोहतास जिले में स्थित बिक्रमगंज अनुमंडल आज शैक्षणिक क्रांति का एक नया केंद्र बन चुका है। इस क्रांति के सूत्रधार कोई बड़े उद्योगपति या वंशवादी विरासत के वाहक नहीं हैं, बल्कि एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जिसने जीवन के अभावों को अपनी ताकत बनाया। हम बात कर रहे हैं द डिवाइन पब्लिक स्कूल के संस्थापक व चेयरमैन अखिलेश कुमार की। वर्ष 2011 में बोया गया एक छोटा सा पौधा आज 2026 में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। अखिलेश कुमार न केवल बच्चों को आधुनिक शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि अनाथ और वंचित बच्चों के जीवन में 'अंधेरे से उजाले' की ओर ले जाने वाली मशाल बनकर उभरे हैं।

अखिलेश कुमार की जीवन यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, लेकिन इसमें प्रामाणिकता और कड़ा संघर्ष है। रोहतास जिले के दीनारा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव पंजरी में जन्मे अखिलेश जी का बचपन आम बच्चों की तरह सहज नहीं था। जब वे मात्र छठी कक्षा के विद्यार्थी थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया।

एक छोटे से बच्चे के लिए पिता को खोना पूरी दुनिया के उजड़ जाने जैसा होता है। घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। ऐसी विकट परिस्थिति में उनकी दादी मां संकटमोचक बनकर सामने आईं। दादी को मिलने वाली मासिक पेंशन से अखिलेश जी की स्कूली शिक्षा आगे बढ़ी। लेकिन अखिलेश जी केवल भाग्य के भरोसे बैठने वाले इंसान नहीं थे।

ट्यूशन से तय हुआ शिक्षक बनने का सफर

मैट्रिकुलेशन (दसवीं) की परीक्षा पास करते ही उन्होंने समझ लिया था कि अगर आगे बढ़ना है, तो आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। उन्होंने एक अद्भुत दर्शन अपनाया पढ़ाकर भी पढ़ा जा सकता है। उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया।

आरा से पटना तक का सफर

शिक्षा की भूख और काम के प्रति समर्पण उन्हें पहले आरा शहर और फिर बिहार की राजधानी पटना ले गया। इन दोनों शहरों में उन्होंने दिन में खुद पढ़ाई की और सुबह-शाम ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च निकाला। इस दौरान उन्होंने बीसीए की डिग्री हासिल की।

शिवखेड़ा की 'जीत आपकी' ने बदला जीवन का रुख

बीसीए करने के बाद अखिलेश कुमार को उनकी योग्यता के बल पर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कंप्यूटर प्रोग्रामर की प्रतिष्ठित नौकरी मिल गई। कॉर्पोरेट लाइफ अच्छी थी, वेतन सुरक्षित था लेकिन उनके भीतर का शिक्षक और समाज सुधारक संतुष्ट नहीं था।

इसी नौकरी के दौरान उनके हाथ प्रबंधन गुरु शिवखेड़ा की प्रसिद्ध पुस्तक 'जीत आपकी' लगी। इस पुस्तक की एक सीख ने उन्हें जागृत कर दिया "व्यक्ति को अपने मनपसंद क्षेत्र का चुनाव करना चाहिए, जिसमें उसका दिल और दिमाग दोनों पूरी तरह से रमे।"

जब मैंने अपनी आंखें बंद कीं और अपने भीतर झांका, तो मुझे साफ दिखाई दिया कि मेरा वजूद कॉर्पोरेट के कोड्स लिखने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य लिखने के लिए बना है। मेरा मनपसंद काम सिर्फ पढ़ना और पढ़ाना ही था।

इस बोध के होते ही उन्होंने एमएनसी की नौकरी को अलविदा कह दिया और वापस अपनी मिट्टी, अपने अनुमंडल बिक्रमगंज की ओर रुख किया, ताकि वहां के बच्चों के लिए कुछ ऐतिहासिक किया जा सके।

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द डिवाइन पब्लिक स्कूल की स्थापना: एक नए युग का सूत्रपात

अखिलेश कुमार ने वर्ष 2011 में 'द डिवाइन पब्लिक स्कूल' की नींव रखी। शुरुआत आसान नहीं थी। बिक्रमगंज में पहले से कई स्थापित स्कूल थे, लेकिन द डिवाइन पब्लिक स्कूल का लक्ष्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना था।

सीबीएसई और एसओएफ में शानदार कीर्तिमान

स्थापना के बाद से ही विद्यालय ने शिक्षा के स्तर से कभी समझौता नहीं किया। आज यह स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (उइरए) से संबद्ध है और यहां 10वीं और 12वीं के परिणाम हर साल शत-प्रतिशत और अनुकरणीय रहते हैं।

अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ स्कूल का विशेष फोकस साइंस ओलंपियाड फाउंडेशन की परीक्षाओं पर रहता है। विद्यालय के छात्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ओलंपियाड में लगातार शीर्ष स्थान और शानदार रिजल्ट हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं।

अनाथ बच्चों को सहारा, मुफ्त शिक्षा और हॉस्टल

द डिवाइन पब्लिक स्कूल को जो बात इस पूरे इलाके के अन्य सभी विद्यालयों से पूरी तरह अलग और अनूठा बनाती है, वह है इसकी सामाजिक संवेदनशीलता।

पूर्णत: नि:शुल्क आवासीय शिक्षा

चेयरमैन अखिलेश कुमार स्वयं बचपन में पिता को खोने के दर्द और आर्थिक तंगी से गुजरे थे, इसलिए वे अनाथ बच्चों की पीड़ा को भली-भांति समझते हैं। विद्यालय प्रबंधन ने एक बेहद सराहनीय और अनुकरणीय नियम बनाया है बिक्रमगंज और आसपास के क्षेत्र में जो भी बच्चे अनाथ हैं, उन्हें विद्यालय अपने साथ जोड़ता है। उनके लिए रहना, खाना, कपड़े, किताबें और उच्च स्तरीय शिक्षा पूरी तरह से नि:शुल्क है।

इसके लिए विद्यालय परिसर में ही एक सर्वसुविधायुक्त बॉयज हॉस्टल संचालित किया जाता है, जहां इन बच्चों को पारिवारिक माहौल और सुरक्षा दी जाती है। वर्तमान में नामांकित ऐसे सभी बच्चों की सूची विद्यालय के पास पारदर्शी रूप से उपलब्ध है, जो इस बात का प्रमाण है कि यह संस्था विज्ञापन के लिए नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाने के लिए काम कर रही है।

अनूठा प्रबंधन सिद्धांत: 'पनिशमेंट' नहीं, 'प्रोत्साहन' से सुधार

आधुनिक शिक्षा पद्धतियों में जहां आज भी कई जगहों पर बच्चों को नियंत्रित करने के लिए दंडात्मक रुख अपनाया जाता है, वहीं द डिवाइन पब्लिक स्कूल ने एक पूरी तरह से सकारात्मक मार्ग चुना है।

पुरस्कार और सकारात्मकता की संस्कृति

अखिलेश कुमार के अनुसार, मैनेजमेंट के पास दो रास्ते होते हैं एक डर दिखाकर काम कराना और दूसरा सम्मान देकर काम कराना। उनका विद्यालय पुरस्कार और प्रोत्साहन के सिद्धांत पर काम करता है।

* 100% उपस्थिति का सम्मान: स्कूल में जो छात्र पूरे वर्ष एक दिन भी अनुपस्थित नहीं होते, उन्हें मंच पर बुलाकर विशेष रूप से प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाता है।

* शिक्षकों का सम्मान: यह नियम सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, शिक्षकों पर भी लागू होता है। जो शिक्षक साल भर नियमित रहकर अपनी सेवाएं देते हैं, उन्हें मैनेजमेंट द्वारा सम्मानित किया जाता है। इससे पूरे संस्थान में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक माहौल का निर्माण होता है।

* सकारात्मक सुबह की शुरुआत: विद्यालय में हर दिन की शुरुआत मॉर्निंग असेंबली से ही सकारात्मक विचारों और ऊर्जा के साथ होती है, जिससे बच्चों का मानसिक विकास सुदृढ़ हो सके। स्वयं चेयरमैन साहब ने कोरोना काल के दौरान 'आपकी जीत' नामक एक प्रेरक पुस्तक भी लिखी है, जिसके विचार स्कूल के माहौल में रचे-बसे हैं।

केवल दावों में नहीं, हकीकत में द डिवाइन पब्लिक स्कूल का बुनियादी ढांचा किसी भी बड़े महानगर के स्कूल को टक्कर देता है। यहां विज्ञान और तकनीक को किताबी ज्ञान से निकालकर सीधे बच्चों के हाथों तक पहुंचाया गया है।

वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर

फिजिक्स लैब: आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित, जहां छात्र भौतिकी के सिद्धांतों का व्यावहारिक अनुभव लेते हैं।

केमिस्ट्री लैब: सभी आवश्यक रसायनों और सुरक्षा मानकों के साथ डिज़ाइन की गई उन्नत प्रयोगशाला।

बायोलॉजी लैब: सूक्ष्मदर्शी और मानव शरीर व वनस्पति विज्ञान के मॉडल्स से समृद्ध।

कंप्यूटर लैब: भव्य और हाई-टेक कंप्यूटर लैब, जहां हर छात्र को व्यक्तिगत रूप से सिस्टम उपलब्ध कराया जाता है।

लाइब्रेरी: ज्ञान का खजाना, जिसमें हजारों संदर्भ पुस्तकें, साहित्य और ज्ञानवर्धक पत्रिकाएं मौजूद हैं।

खेलकूद और सह-शैक्षणिक गतिविधियां

"पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब" इस पुरानी कहावत को द डिवाइन पब्लिक स्कूल ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यहां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल और कला को मुख्य पाठ्यक्रम जितना ही महत्व दिया जाता है।

स्कूल के नेशनल सिल्वर मेडलिस्ट सत्यम की प्रेरक कहानी

विद्यालय की खेल प्रतिभाओं का लोहा पूरे देश ने माना है। पिछले वर्ष सीबीएसई द्वारा आयोजित नेशनल लेवल की 100 मीटर रेस में स्कूल के छात्र सत्यम कुमार ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

इनडोर और आउटडोर गेम्स की समृद्ध व्यवस्था

स्कूल में दो-दो समर्पित पीटीआई नियुक्त हैं, जो सीबीएसई के स्पोट्र्स कैलेंडर के अनुसार टीमों को तैयार करते हैं।

=आउटडोर गेम्स: वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो और बैडमिंटन की यहां बेहद शानदार और अजेय टीमें हैं।

=इनडोर गेम्स: दिमागी कसरत के लिए चेस और कैरम जैसी विधाओं का नियमित संचालन होता है।

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संगीत और व्यक्तित्व विकास

बच्चों के भीतर के कलाकार को जगाने के लिए संगीत के विशेष शिक्षक मौजूद हैं। स्कूल के बच्चे तबला वादन, हारमोनियम वादन और विभिन्न वाद्य यंत्रों को बजाने में निपुण हैं। इसके अलावा, बच्चों की झिझक दूर करने, उनके कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाने और स्टेज फियर खत्म करने के लिए विशेष पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लासेस आयोजित की जाती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था: सीसीटीवी से हर मोड़ पर निगरानी

एक अभिभावक के लिए सुरक्षा सर्वोपरि होती है। द डिवाइन पब्लिक स्कूल इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाता है।

=सीसीटीवी सर्विलांस: पूरा स्कूल परिसर और हर एक क्लासरूम तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में रहता है।

=सुरक्षा गाड्र्स की तैनाती: मुख्य द्वारों और संवेदनशील पॉइंट पर प्रशिक्षित गाड्र्स तैनात रहते हैं।

'धान का कटोरा' बनेगा 'हिंदुस्तान का सिरमौर'

बिक्रमगंज अनुमंडल भौगोलिक रूप से बहुत समृद्ध है। चेयरमैन अखिलेश कुमार बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारा इलाका बेहद सौभाग्यशाली है। यहां न बाढ़ का खतरा है और न सुखाड़ का। यहां बहुत कम गहराई पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध है और यह पूरी बेल्ट धान का कटोरा कहलाती है।

अखिलेश जी का मानना है कि जिस क्षेत्र के पास आर्थिक और प्राकृतिक स्थिरता हो, वहां के बच्चे अगर अपनी पूरी ऊ र्जा शिक्षा पर लगा दें, तो चमत्कार हो सकता है।

वह कहते हैं कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि 'शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।' हमारे रोहतास और बिक्रमगंज के बच्चों में कूट-कूट कर प्रतिभा भरी है। हमारा लक्ष्य इस प्रतिभा को तराशना है ताकि आने वाले समय में यह पूरा क्षेत्र शिक्षा और नवाचार के मामले में पूरे हिंदुस्तान का नेतृत्व कर सके।

मजबूत पारिवारिक संबल

अखिलेश जी की इस महामुहिम में उनके भाई, उनकी धर्मपत्नी और उनके दोनों बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ देते हैं। पूरा परिवार विद्यालय के बच्चों को ही अपना विस्तारित परिवार मानता है।

अभिभावकों के लिए संदेश: बच्चों को उंगली पकड़कर दिखाएं सहज मार्ग

अभिभावकों को सीख देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों की परवरिश दो तरीकों से होती है एक कंधे पर बिठाकर और दूसरा उंगली पकड़कर।

अभिभावकों को बच्चों को कंधे पर बिठाकर दुनिया नहीं घुमानी चाहिए, बल्कि उनकी उंगली पकड़नी चाहिए ताकि वे खुद जमीन पर चलना सीखें। जब वे खुद चलेंगे, तो हो सकता है वे गिरें, उन्हें ठेस लगे। उस वक्त अभिभावक को उन्हें संभालना चाहिए, न कि उनके हिस्से का चलना खुद चल लेना चाहिए। खुद गिरने और संभलने से बच्चों का आत्मबल बढ़ेगा और वे भविष्य के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के मजबूत नागरिक बनेंगे।

साथ ही छात्र, अपने माता-पिता के पसीने की कमाई और उनके त्याग का सम्मान करें। अगर माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई बच्चों की शिक्षा में निवेश कर रहे हैं, तो छात्रों का यह परम कर्तव्य है कि वे पूरी ईमानदारी से पढ़ाई करें और अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य का उपहार दें।

पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया

द डिवाइन पब्लिक स्कूल, बिक्रमगंज में नए सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुव्यवस्थित है। कोई भी इच्छुक अभिभावक जो अपने बच्चे को एक सकारात्मक, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक माहौल देना चाहता है, वह सही समय पर विद्यालय परिसर में आकर संपर्क कर सकता है।

तुम खास हो यह विश्वास करो,

तुम लक्ष्य के पास हो यह विश्वास करो,

जीतना ही तुम्हारा मकसद है,

उठो, जागो और फिर से प्रयास करो।

- अखिलेश कुमार,

चेयरमैन, द डिवाइन पब्लिक स्कूल

संक्षिप्त जीवन परिचय

नाम : अखिलेश कुमार

चेयरमैन : द डिवाइन पब्लिक स्कूल

संस्था की नींव:वर्ष 2011 में बिक्रमगंज

(रोहतास) में 'द डिवाइन पब्लिक स्कूल' की स्थापना कर शैक्षणिक क्रांति की शुरुआत की।

अनाथ बच्चों के मसीहा :क्षेत्र के अनाथ बच्चों को स्कूल से जोड़कर उनके रहने, खाने और पढ़ाई की पूरी व्यवस्था मुफ्त की है।

प्रोत्साहन आधारित प्रबंधन: विद्यालय में पुरस्कार की नीति अपनाते हैं।

अखिलेश कुमार और उनका संस्थान द डिवाइन पब्लिक स्कूल आज बिहार के गौरव हैं। वे साबित करते हैं कि अगर इरादे नेक हों और संकल्प में दृढ़ता हो, तो रोहतास के एक छोटे से कस्बे में बैठकर भी देश के सर्वश्रेष्ठ नागरिकों और नेशनल चैंपियंस का निर्माण किया जा सकता है।

(अस्वीकरण : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति / संस्थान की है)

Anup Prakash

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