योजनाबद्ध विकास का नया अध्याय लिख रहा देहरादून विकास प्राधिकरण
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की पिछले 25 वर्षों की यात्रा नवाचार, दक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक जीवंत उदाहरण है।

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की पिछले 25 वर्षों की यात्रा नवाचार, दक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक जीवंत उदाहरण है। डिजिटल शासन में अग्रणी होने से लेकर, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा, आवास और रिवर फ्रंट जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को कुशलतापूर्वक पूरा करने तक, एमडीडीए ने देहरादून और मसूरी के नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के सफल प्रबंधन और ₹10,000 करोड़ के एमओयू जैसे कीर्तिमानों के साथ, प्राधिकरण ने राज्य के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
एमडीडीए गढ़ रहा विकास की नई परिभाषा
पिछले 25 वर्षों में, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने खुद को एक नियामक संस्था से बदलकर एक गतिशील और परिणाम-उन्मुख विकास उत्प्रेरक के रूप में स्थापित किया है। उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर जारी विस्तृत रिपोर्ट एमडीडीए की उन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को रेखांकित करती है, जिन्होंने देहरादून और मसूरी के शहरी और सामाजिक ताने-बाने को नया आकार दिया है। चाहे वह आवास योजनाओं के माध्यम से आम नागरिक को छत प्रदान करना हो, या जी-20 जैसे वैश्विक आयोजनों के लिए शहर को विश्व स्तरीय स्वरूप देना हो, एमडीडीए की कुशलता हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। प्राधिकरण की यात्रा, जो अब तक की चुनौतियों के समाधान और भविष्य की सुनियोजित कार्ययोजना पर केंद्रित है, यह सिद्ध करती है कि सुशासन और नवाचार किसी भी विकास प्राधिकरण की सफलता की कुंजी है।
डिजिटल प्रशासन और शासन में उत्कृष्टता
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने उत्तराखंड में डिजिटल मानचित्र स्वीकृत करने वाले पहले विकास प्राधिकरण के रूप में डिजिटल युग में नेतृत्व किया है। वर्ष 2000 से वर्तमान तक, प्राधिकरण ने लगभग 67,476 आवासीय और 6,617 गैर-आवासीय मानचित्रों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता और त्वरित गति से किया है। यह न केवल गति का मामला है, बल्कि पारदर्शिता और सुनियोजित विकास के प्रति एमडीडीए की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। प्रशासनिक दक्षता के लिए, एमडीडीए ने ई-ऑफिस प्रणाली को अपनाया है और यह उत्तराखंड का प्रथम करड प्रमाणित प्राधिकरण बन गया है।
बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: शहर का भविष्य निर्माण
एमडीडीए ने देहरादून के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई मील के पत्थर स्थापित किए हैं।
मेगा-परियोजनाएं और यातायात प्रबंधन
* आई०एस०बी०टी० और सिटी जंक्शन मॉल (2004/2010): जनहित और सुचारू यातायात व्यवस्था के लिए 4.255 हेक्टेयर भूमि पर पीपीपी मोड के तहत निर्मित, यह परिसर अब यात्रियों के लिए विश्राम स्थल, चिल्ड्रन पार्क, स्मार्ट टॉयलेट, पिंक टॉयलेट, सोलर ट्री और प्लास्टिक बॉटल शेल्टर मशीन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
प्रतिष्ठित पुरस्कारों से प्रमाणित
इंडिया प्राइड अवार्ड्स (2015-16 और 2017-18): उत्कृष्टता, विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और परिवहन क्षेत्र में नेतृत्व के लिए।
नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड (2018-19): शहरी शासन में प्रौद्योगिकी के अभिनव उपयोग के लिए।
बेस्ट डिजिटल इनिशिएटिव अवार्ड (2019): टऊऊअ ऑनलाइन/वन टाइम मैप अप्रूवल सिस्टम के लिए।
स्कॉच अवार्ड और ऑर्डर-ऑफ-मेरिट (2018, 2019): एफढ और आवासीय योजनाओं (उत्तरा आवास योजना) में डिजिटल परिवर्तन और नेतृत्व के लिए।
1. हेमवती नंदन बहुगुणा कॉम्पलैक्स, घंटाघर (2010)
चकराता रोड विस्तारीकरण से विस्थापित दुकानदारों के लिए निर्मित इस भवन में 598 ईसीएस पार्किंग की सुविधा है, जिसने घंटाघर क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को काफी हद तक हल किया है।
2. राजीव गांधी बहुउद्देशीय भवन, डिस्पेंसरी रोड (2011)
तहसील कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के लिए निर्मित इस भवन में भी आम जनता के लिए पार्किंग का प्रावधान है और इसमें 69 विस्थापित व्यापारियों को दुकानें आवंटित की गई हैं।
3. स्मार्ट पार्किंग और ट्रैफिक सिस्टम
शहर के विभिन्न स्थानों पर ऑन-स्ट्रीट ऑफ-स्ट्रीट स्मार्ट पार्किंग विकसित करने के लिए नगर निगम और ब्रिडकुल के साथ अनुबंध किए गए हैं। साथ ही, यातायात सुरक्षा के लिए रोड स्टड, कैट आई, सोलर ब्लिंकर और मीडियन बैरियर भी लगाए गए हैं।
वैश्विक मंच पर देहरादून : इवेंट मैनेजमेंट और सौंदर्यीकरण
एमडीडीए ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर लाने वाले प्रमुख आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ग्लोबल इवेंट्स का सफल क्रियान्वयन
’ जी-20 समिट 2023
: एमडीडीए ने ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम और नरेंद्र नगर में कार्यक्रम स्थलों और यात्रा मार्गों का उत्कृष्ट फसाड/सौंदर्यीकरण, त्रिवेणी घाट का सौंदर्यीकरण और देहरादून एयरपोर्ट का लैंडस्केपिंग कुशलतापूर्वक किया।
’ उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023:
दिसंबर 2023 में आयोजित इस समिट के दौरान एमडीडीए ने देहरादून शहर के मुख्य मार्गों पर स्थित डिवाइडर, वाणिज्यिक और आवासीय भवनों के फसाड को रंग-रोगन और साइन बोर्ड के माध्यम से एकरूपता प्रदान करते हुए लगभग 111 किलोमीटर सड़कों का सौंदर्यीकरण किया। प्रधानमंत्री जी द्वारा भी कार्यों की सराहना की गई। इस समिट के दौरान एमडीडीए द्वारा जनपद के विकास हेतु विभिन्न इन्वेस्टर्स के साथ लगभग ₹10,000 करोड़ के समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किए गए, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।
भविष्य की ओर: सुनियोजित विकास का रोडमैप
चुनौतियों का समाधान करते हुए, एमडीडीए अब भविष्यमुख्य प्रस्तावित परियोजनाए
* जी०आई०एस० आधारित मास्टर प्लान 2041: भारत सरकार की योजना के अंतर्गत देहरादून शहर के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान 2041 तैयार किया जा रहा है। यह सैटेलाइट इमेज पर आधारित होगा और भू-उपयोग की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएगा।
* आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना: सहारनपुर चौक से तहसील चौक तक सड़क की चौड़ाई 18 मीटर से बढ़ाकर 24 मीटर की जानी प्रस्तावित है। इसके लिए, प्रभावित दुकानदारों/आढ़तियों को स्थानांतरित करने हेतु ग्राम ब्राह्मनवाला में नवीन आढ़त बाजार विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में 864 ईसीएस पार्किंग के प्रावधान के साथ बहुमंजिला पार्किंग भवन का निर्माण किया जा रहा है।
* इंदिरा मार्केट पुनर्विकास परियोजना: देहरादून के मुख्य बाजारों में से एक, इंदिरा मार्केट का पुनर्विकास पीपीपी मोड के अंतर्गत किया जा रहा है। इससे 400 से अधिक दुकानदारों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त दुकानें आवंटित होंगी। तीन बेसमेंट में 1050 वाहनों की पार्किंग का निर्माण भी किया जा रहा है, जिसमें लिफ्ट, शौचालय, हरित क्षेत्र और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
* लैंड पूलिंग: विभिन्न आय वर्गों के लिए टाउनशिप/प्लॉटेड सोसाइटी विकसित करने के उद्देश्य से लैंड पूलिंग की कार्यवाही की जा रही है।
* गंगा घाट विकास: देहरादून चकराता राष्ट्रीय राजमार्ग 507 पर शीतली देवी महाकाली मंदिर के पास गंगा घाट का निर्माण किया जा रहा है।
के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है, जो देहरादून के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करेगा।
मसूरी मॉल रोड का पुनरुत्थान
राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक, मसूरी की मॉल रोड का रेस्टोरेशन और ब्यूटीफिकेशन कार्य ₹20.00 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। इस कार्य में लाइटिंग, सेल्फी पॉइंट का निर्माण, लाइब्रेरी चौक की रोटरी को कम करना, अंबेडकर चौक का जीर्णोद्धार, और बिजली/टेलीफोन के लटकते खंभों और तारों को हटाना शामिल है, जिससे मसूरी के आकर्षण में वृद्धि हुई है।
पार्कों और हरित क्षेत्रों का विकास
* सिटी फॉरेस्ट परियोजना (2024): सहस्त्रधारा रोड पर 12.45 हेक्टेयर भूमि पर विकसित यह इको-फ्रेंडली पार्क सघन वृक्षारोपण, मुक्ताकाश मंच, रज्जू पुल, साइकिल ट्रैक, स्कैटिंग रिंक और मोशन चेयर जैसी सुविधाओं से युक्त है। ₹3697.63 लाख की लागत से निर्मित यह परियोजना देहरादून के जनमानस के लिए मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बन गया है।
* डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क, राजपुर (2019): 1.2 एकड़ में फैला यह पार्क ₹562.00 लाख की लागत से नेचर गार्डन, लेक गार्डन, वुडलैंड गार्डन, सेंसरी गार्डन, और चिल्ड्रन गार्डन जैसे थीम पर आधारित है। पार्क में उत्तराखंड के राज्य पुष्प, पक्षी और पशु की टोपेरी स्थापित की गई है, और यहां लाइट एंड साउंड शो (विषय: देवभूमि नमो: और नमामि गंगे) आयोजित किया जाता है, जो राज्य के इतिहास और गंगा अवतरण की गाथा सुनाता है।
* गौरा देवी पार्क (2025): इस ऐतिहासिक जलाशय के सौंदर्यीकरण में जॉगिंग ट्रैक, योगा डेक, ओपन जिम, एक्यूप्रेशर पाथ-वे, और मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है, जिसकी लागत ₹653.27 लाख है।
* सौर ऊर्जा को बढ़ावा: प्राधिकरण पर्यावरण के अनुकूल विकास के लिए शहर में सौर ऊर्जा संचालित सोलर लाइट्स, डेकोरेटिव सोलर ट्री और हाईमास्ट सोलर लाइट्स स्थापित कर रहा है।
आवास और सामाजिक न्याय की दिशा में कदम
एमडीडीए का मुख्य मिशन समाज के हर वर्ग को किफायती और सुव्यवस्थित आवास प्रदान करना रहा है।
अन्य नागरिक सुविधाएं
* इंदिरा अम्मा भोजनालय: सचिवालय, दून अस्पताल, ट्रांसपोर्ट नगर और घंटाघर सहित 4 प्रमुख स्थानों पर भोजनालयों का निर्माण किया गया, जिससे आमजन को सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध हो सके।
* रैन बसेरा: ट्रांसपोर्ट नगर में ₹125.00 लाख की लागत से रैन बसेरा का निर्माण किया गया।
* टपकेश्वर मंदिर में लिफ्ट: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ₹117.00 लाख की लागत से लिफ्ट का निर्माण किया गया।
* हरबर्टपुर बस अड्डा (2023): 15290 वर्ग मीटर भूमि पर ₹374.38 लाख की लागत से निर्मित इस बस अड्डे से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ चार धाम यात्रियों को भी सुविधा प्राप्त हो रही है।
* खेल प्रोत्साहन: जनपद देहरादून के 8 राजकीय विद्यालयों में ₹484.00 लाख की लागत से बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे खेल-कूद गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
आलयम आवासीय योजना की सौगात
हिमालय की गोद में बसे देहरादून में, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण आपके घर के सपने को पूरा करने के लिए 'आलयम आवासीय योजना' लाया है।
सहस्त्रधारा मुख्य मार्ग के समीप, प्रकृति के बीच स्थित इस योजना में सीमित फ्लैट्स अवशेष हैं। प्रस्तावित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे द्वारा दिल्ली का सफर मात्र 2.5 घंटे में संभव होगा।
सुनहरा अवसर: बुकिंग के समय 10% का भुगतान करें। शेष 90% राशि एकमुश्त, एक माह में देने पर 2% की विशेष छूट पाएं। महिला / सीनियर सिटीजन / दिव्यांग को 1% की अतिरिक्त छूट। (नियम और शर्तें लागू)।
प्रकृति और विरासत का संरक्षण: हरित विकास की ओर
एमडीडीए ने शहर के सौंदर्यीकरण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे देहरादून की 'देवभूमि' पहचान को बल मिला है।
नदी पुनर्जीवन और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट
रिस्पना और बिंदाल रिवर फ्रंट डेवलपमेंट परियोजना (2015) साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर शुरू की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य नदियों में अतिक्रमण और प्रदूषण की समस्या का समाधान करना था। परियोजना के तहत, रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया गया (बिंदाल पर 1.7 किमी और रिस्पना पर 1.0 किमी) और बैड इरोजन को रोकने के लिए रिस्पना नदी पर 4 चेक डैम बनाए गए। प्राधिकरण भूमिगत जलस्तर बढ़ाने और हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए नियमित रूप से नदी तटों पर वृक्षारोपण भी करता रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)प्रगति पर
प्राधिकरण ने दुर्लभ आय वर्ग को किफायती मूल्य पर आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ढटअ (शहरी) के अंतर्गत हजारों ईडब्ल्यूएस (एहर) इकाइयों का निर्माण किया है:
*आईएसबीटी इंटीग्रेटेड हाउसिंग स्कीम (2014): 144 ईडब्ल्यूएस इकाइयां।
*ट्रांसपोर्टनगर आवासीय परियोजना (2018): 224 ईडब्ल्यूएस इकाइयां।
* आमवाला तरला आवासीय परियोजना (2021): 240 ईडब्ल्यूएस इकाइयां।
* धौलास आवासीय परियोजना (वर्तमान में जारी): 240 ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण।
अन्य आवासीय परियोजनाएं
टऊऊअ ने निम्न आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग, और उच्च आय वर्ग के लिए भी विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर आवासीय परियोजनाओं का निर्माण किया है, ताकि आवास की मांग को पूरा किया जा सके:
नजूल भूमि का फ्री-होल्ड
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से, प्राधिकरण को नजूल भूमि फ्री-होल्ड करने हेतु लगभग 490 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 406 आवेदनों को स्वीकृत किया जा चुका है। इस प्रक्रिया से शासन के कोष में ₹2459.75 लाख की धनराशि जमा कराई गई है।
जन सुविधाओं का विस्तार: सामुदायिक केंद्र और नागरिक कल्याण
टऊऊअ ने सामाजिक समरसता और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सामुदायिक भवन निर्माण
विभिन्न क्षेत्रों में सामुदायिक भवनों के निर्माण से अल्प और मध्यमवर्गीय परिवारों को कम दरों पर सामाजिक समारोह आयोजित करने की सुविधा मिली है:
* मसूरी टाउन हॉल (2017): मल्टीपरपज ऑडिटोरियम और 59 ईसीएस पार्किंग के साथ निर्मित, इसकी लागत ₹18.20 करोड़ है।
* हरबंस कपूर मैमोरियल सामुदायिक केंद्र, गढ़ी कैंट (2025): ₹1251.00 लाख की लागत से निर्मित, यह केंद्र लगभग 2650 वर्गमीटर क्षेत्रफल पर बना है, जिसमें 1000 से अधिक व्यक्तियों की क्षमता वाला हॉल, डाइनिंग एरिया, अतिथि कक्ष और 60 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था है। इसका लोकार्पण 11/05/2025 को किया गया है।
*इसके अतिरिक्त डालनवाला, इंदिरापुरम, नत्थनुपर और गल्जवाड़ी में भी सामुदायिक भवनों का निर्माण किया गया है।
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(अस्वीकरण : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है)
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Sonam Tripathiलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


