टेंडर पाम हॉस्पिटल में 44 और 62 वर्षीय पुरुष मरीजों पर सफल ऑर्टोफेमोरल बाईपास सर्जरी
- टेंडर पाम हॉस्पिटल लखनऊ में वास्कुलर सर्जन डॉ. अशुतोष पांडे द्वारा 44 वर्षीय और 62 वर्षीय पुरुष मरीजों पर सफल ऑर्टोफेमोरल बाईपास सर्जरी की गई।

टेंडर पाम हॉस्पिटल लखनऊ में वास्कुलर सर्जन डॉ. अशुतोष पांडे द्वारा 44 वर्षीय और 62 वर्षीय पुरुष मरीजों पर सफल ऑर्टोफेमोरल बाईपास सर्जरी की गई। इन सर्जरी ने न केवल उनके पैरों को बचाया बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार किया।
पहला मरीज: 44 वर्षीय, गंभीर गैंग्रीन और पैर के अल्स से ग्रस्त
44 वर्षीय मरीज जो मधुमेह और गंभीर रक्त प्रवाह रुकावट से ग्रस्त था, उसके पैर में बड़ा अल्सर और गैंग्रीन था। अन्यत्र डॉक्टरों ने पैर के विच्छेदन (अम्प्युटेशन) की सलाह दी थी। लेकिन टेंडर पाम हॉस्पिटल में डॉप्लर और सीटी एंजियोग्राफी से स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद ऑर्टोफेमोरल बाईपास को अंग बचाने का सही विकल्प माना गया।
दूसरा मरीज: 62 वर्षीय, कई अल्सर और रेस्ट पेन से पीड़ित
62 वर्षीय मरीज, जो धूम्रपान और पुरानी धमनी रोग से पीड़ित था, उसके पैरों में कई अल्सर और अत्यधिक 'रेस्ट पेन' था। चलने-फिरने में असमर्थता और दर्द ने उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया था। सीटी एंजियोग्राफी ने निचले अंगों की धमनियों में कई रुकावटों को उजागर किया।
सर्जरी की प्रक्रिया:
-ग्राफ्ट प्लेसमेंट- दोनों मरीजों में कृत्रिम डैक्रॉन ग्राफ्ट को एब्डॉमिनल ऑर्टा से फीमोरल धमनियों तक जोड़ा गया।
- रक्त प्रवाह बहाली- सर्जरी के बाद डॉप्लर अल्ट्रासाउंड ने उत्कृष्ट रक्त प्रवाह की पुष्टि की।
-सर्जरी का परिणाम- दोनों मरीजों को रक्त प्रवाह की बहाली और दर्द में राहत मिली।
परिणाम और फॉलो-अप:
दोनों मरीजों ने सर्जरी के बाद तेजी से सुधार किया और सातवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आज वे नियमित फॉलो-अप पर हैं और उनकी स्थिति स्थिर है।
टीम का सहयोग
-डॉ. महेंद्र (आईसीयू और फॉलो-अप समर्थन)- सर्जरी के बाद के देखभाल और फॉलो-अप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
-एनेस्थीसिया टीम- प्रक्रिया के दौरान उत्कृष्ट एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।
-डॉ. महेंद्र (आईसीयू और फॉलो-अप समर्थन)- सर्जरी के बाद के देखभाल और फॉलो-अप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
-डॉ. संतोष और डॉ. अशुतोष परिहार (एनेस्थीसिया टीम)- प्रक्रिया के दौरान उत्कृष्ट एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।
-डॉ. नीलम (प्लास्टिक सर्जन)- घाव देखभाल और उपचार प्रक्रिया में विशेष योगदान।
निष्कर्ष:
टेंडर पाम हॉस्पिटल में इन सफल सर्जरी ने दिखाया कि सही समय पर विशेषज्ञता और उन्नत तकनीक का उपयोग जीवन और अंग दोनों को बचा सकता है। 44 और 62 वर्षीय इन मरीजों की कहानियां चिकित्सा के क्षेत्र में संभावनाओं का प्रतीक हैं।
यह सर्जरी डॉ. अशुतोष पांडे द्वारा की गई, जो एम.एस. (सर्जरी) और एम.च. (वास्कुलर सर्जरी) में प्रशिक्षित हैं। डॉ. पांडे ने अपनी शिक्षा प्रतिष्ठित संस्थानों,पीजीआई चंडीगढ़ और श्री चित्रा तिरुनल संस्थान से प्राप्त की है। वह उत्तर प्रदेश में एकमात्र एम.च. वास्कुलर सर्जन हैं।
अस्वीकरण : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति / संस्थान की है।
लेखक के बारे में
Anant Joshiलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


