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Hindi News ब्रांड स्टोरीज़कानपुर के कर्मयोगी : रमेश अवस्थी

कानपुर के कर्मयोगी : रमेश अवस्थी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की देशभक्ति की भावना जिनकी रगों में रक्त बनकर दौड़ती है।

Anant JoshiBrand PostSun, 12 May 2024 12:09 PM
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की देशभक्ति की भावना जिनकी रगों में रक्त बनकर दौड़ती है। जिनके हृदय में समाज और राष्ट्र के सरोकार सर्वोपरि हैं। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के सपनों के नए भारत को कानपुर की सरजमीं से साकार करने में जुटे हैं, वो हैं रमेश अवस्थी।

उत्तरप्रदेश ही नहीं देश के सबसे प्रतिष्ठित संसदीय सीटों में शुमार कानपुर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रमेश अवस्थी का जीवन सफर ‘सिफर से शिखर तक’ की एक शानदार यात्रा है। मेनस्ट्रीम मीडिया में बतौर पत्रकार 3 दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले रमेश अवस्थी करीब एक दशक से कानपुर-बुंदेलखंड की जनता के बीच सेवा भाव से सियासत में सक्रिय हैं। कानपुर से भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रमेश अवस्थी का जन्म एक छोटे से गांव के किसान परिवार में हुआ था। संघ की शाखाओं में बचपन बीता और युवावस्था में छात्र राजनीति में अपनी असरदार मौजूदगी दर्ज कराई। 1990 में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने सामाजिक और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी कुशल कार्यशैली से देश ही नहीं विदेशों में भी अपना मुकाम बनाया। कानपुर के एस.डी. कॉलेज, हलीम मुस्लिम कॉलेज और डीएवी कॉलेज में अपनी पढ़ाई के दौरान भी रमेश अवस्थी सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में लगातार सक्रिय रहे। इसलिए वो कानपुर की हर समस्या और जरूरतों से वाकिफ हैं। वो पूरे कानपुर को अपना परिवार मानते हैं और सबकी मदद के लिए तत्पर रहते हैं। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने उनको कानपुर की देवतुल्य जनता की सेवा के लिए चुना है। कानपुर की संवेदनशील और जागरूक जनता भी अपनी धरती के इस लाल को बेइंतहा प्यार करती है। लोकसभा का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद जब रमेश अवस्थी दिल्ली से कानपुर पहुंचे तो रेलवे स्टेशन पर उनके स्वागत के लिए जिस तरह से जनसैलाब उमड़ा, वो सचमुच ऐतिहासिक था। रमेश अवस्थी आम जनता से बिना लाग लपेट के सीधा संवाद स्थापित करते हैं। उनके सहज और सरल स्वाभाव की वजह से जनता का उनसे गहरा लगाव है। कानपुर में चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर भी हजारों की तादाद में समाज के हर तबके के आम-ओ-खास की मौजूदगी ने ये साबित कर दिया कि रमेश अवस्थी हर कानपुरवासी के दिलों पर राज करते हैं। 

साधारण परिवार से ताल्लुक

साधारण मगर शिक्षित और संस्कारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले रमेश अवस्थी को जनसेवा की भावना विरासत में मिली। उनके बड़े भाई डॉ. ब्रह्म दत्त अवस्थी 1967 में भारतीय जनसंघ से चुनाव लड़ चुके हैं। ब्रह्मदत्त अवस्थी आपातकाल में जेल भी गए। रमेश अवस्थी स्वयं बाल्यकाल से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े हुए हैं। वो बचपन में अपने पैतृक गांव में संघ की शाखाओं का आयोजन भी किया करते थे।

समाजसेवा का था जुनून

शुरुआती दिनों से ही समाज उत्थान, देश कल्याण और मानव मात्र की सेवा रमेश अवस्थी के जीवन का उदेश्य रहा है। लिहाजा उन्होंने इस बदलाव के लिए पत्रकारिता का रास्ता चुना। तीन दशक तक पत्रकारिता की दुनिया में उच्च पदों पर काम करते हुए रमेश अवस्थी ने प्रदेश से लेकर देश और विदेश का चप्पा चप्पा छान लिया। फिर जनता की जरूरतों से उनके जुड़ाव और विकसित राष्ट्र के निर्माण की चाहत ने उन्हें सक्रिय राजनीति की मुख्यधारा में उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

पीएम मोदी के संकल्पों को कर रहे साकार

2014 में जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार पीएम पद की कुर्सी संभाली तबसे ही रमेश अवस्थी पीएम मोदी के संकल्पों और सपनों को जमीनी स्तर पर सार्थक करने में जुट गए। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी की विकसित भारत की विकास यात्रा में बढ़चढ़कर भागीदारी दर्ज कराई।

इस दौरान वो पीएम मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े और उत्तर प्रदेश स्वच्छता अभियान समिति के सदस्य भी रहे। इसके साथ ही राजभाषा सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य भी रहे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देने के लिए भी कई अहम कदम उठाए। खास बात ये कि इन व्यस्तताओं के बीच भी वो कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में संघ और भाजपा के लिए समर्पित रहे। 

रमेश अवस्थी कानपुर की जनता की विकास यात्रा के ध्वजवाहक हैं। कानपुर उनका अपना है और वो कानपुर के अपने हैं। इसलिए उन्होंने विकसित भारत, विकसित कानपुर का नारा देकर इसे पूरा करने का संकल्प भी लिया है। उन्होंने पिछले एक दशक में अपनी कर्मभूमि कानपुर में कई ऐतिहासिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कराकर आम जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई है। संघ और संगठन के सपने को अपना मिशन बनाकर इसे साकार करने में दिन-रात जुटे रहने वाले रमेश अवस्थी को कभी किसी पद की आकांक्षा नहीं रही। लेकिन कानपुर की जनता के प्यार और विकसित कानपुर के सपने ने उन्हें मुख्यधारा की राजनीति में लाकर खड़ा कर दिया। अब कानपुर की ऐतिहासिक विरासत के गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना उनका सपना है।   

सनातन का बढ़ाया मान

सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की अलख जगाने के लिए भी रमेश अवस्थी पिछले कई सालों से सक्रिय रहे हैं। रमेश अवस्थी कानपुर की सरजमीं से सनातन को सम्मान दिलाने में जुटे हैं। अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के पहले कानपुर में भव्य और विशाल सनातन यात्रा का आयोजन उनके इसी प्रयास का परिणाम है।

अटल जी के विचारों से हैं प्रभावित

अटल जी के जन्मदिवस पर कवि सम्मेलन के आयोजन की बात हो या फिर वाल्मीकि महोत्सव के जरिए समाज को एकता के सूत्र में पिरोने की पहल, रमेश अवस्थी देशहित में कुछ अच्छा और नया करते रहे। कानपुर में मैंगो फेस्टिबल और होली मिलन समारोह के अलावा देश की राजधानी दिल्ली में बहुचर्चित भारत आम महोत्सव का आयोजन उनकी विराट सोच का प्रतीक है। 2023 में आयोजित इस भव्य, ऐतिहासिक और अनोखे आम महोत्सव में 14 देशों के राजदूतों के अलावा 16 केंद्रीय मंत्री और 135 से ज्यादा सांसदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से प्रभावित रमेश अवस्थी सच्चे साहित्य प्रेमी भी हैं। करीब डेढ़ दशक से अटल जी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर वो हर साल अटल काव्यांजलि का आयोजन कर रहे हैं। 2019 में बांदा में आयोजित अटल काव्यांजलि में प्रख्यात  कवि कुमार विश्वास की सुरमयी काव्य प्रस्तुति में हजारों की संख्या में बुंदेलखंडवासी शामिल हुए थे।

परिवार भी समाजसेवा में रत

हर कानपुर वासी की तरह रमेश अवस्थी भी परिवार और परंपरा के मूल्यों में विश्वास रखते हैं। दो सुयोग्य पुत्रों और एक पुत्री के पिता रमेश अवस्थी की इच्छा है कि कानपुर का हर एक परिवार मोदी के परिवार का हिस्सा बने। देशसेवा की इसी निष्ठा का परिणाम उन संस्कारों में दिखता है, जो उन्होंने अपने पुत्रों और पुत्री को दिया। रमेश अवस्थी के बड़े पुत्र सचिन अवस्थी भी पिता के रास्ते पर चलते हुए राष्ट्र सेवा का प्रण ले चुके हैं। सचिन अवस्थी भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, उत्तर प्रदेश में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रह चुके हैं। साथ ही श्री राम सेवा मिशन के राष्ट्रीय संजोजक भी हैं, जबकि छोटे पुत्र शुभम अवस्थी सर्वोच्य न्यायालय में अधिवक्ता हैं, वो सामाजिक हित में अपनी जनहित याचिकाओं के लिए जाने जाते हैं। वहीं पुत्री डॉक्टर प्रियम अवस्थी ओरल एंड मैक्सोफ़ेशियल सर्जन के तौर पर सामाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

दुनिया भर में सुनाई दे रही कामयाबी और उपलब्धियों की गूंज

रमेश अवस्थी के जीवन सफर में उनकी कामयाबी और उपलब्धियों की गूंज दुनिया भर में सुनाई दे रही है। वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनातन संस्कृति के लिए प्रतिबद्ध, श्रीराम सेवा मिशन के संरक्षक भी हैं। जनसेवा और भारतीयता की भावना को जीवन का मूलमंत्र बनाने वाले रमेश अवस्थी की मेहनत, योग्यता और क्षमता को भारत में ही नहीं वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स लंदन की ओर से ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ़ कॉमन्स में वर्ष 2023 में उनको इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, वर्ष 2022 में ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स, लंदन में वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन और ट्राइडेंट कम्युनिकेशन द्वारा आयोजित ग्लोबल कल्चरल डाइवर्सिटी समिट में पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक के योगदान के लिए उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। यहां ये बताना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने के बाद रमेश अवस्थी ने इस अवार्ड को देश के लिए समर्पित उन पत्रकारों का सम्मान बताया था, जो क्षेत्रीय स्तर पर मुश्किल हालात में भी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निष्पक्ष पत्रकारिता की मशाल को थामे हुए हैं। रमेश अवस्थी नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक भी हैं। पत्रकारों का ये संगठन सामाजिक सरोकारों को निभाने का जरिए भी बना हुआ है। स्थापना के समय से ही इस संगठन के जरिए रमेश अवस्थी उन लोगों के कार्यों को पहचान दिलाने की कोशिश करते रहे हैं, जो अपने सामाजिक दायित्वों का निष्ठा के साथ निर्वहन कर रहे थे। नेशनल मीडिया क्लब की ओर से हरिद्वार से वाराणसी तक स्वच्छता जन जागरण यात्रा की प्रशंसा खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। जीवन के हर क्षेत्र में विराट उपलब्धियों के बीच रमेश अवस्थी की सरलता, सहजता और विनम्रता उनको एक दूरदर्शी जननेता की पहचान देती है। उनके जैसे सच्चे सनातनी और राष्ट्रप्रेमी को कानपुर की जनता का भरपूर प्यार मिल रहा है। लोगों से मिल रहे इस प्रेम, स्नेह और समर्थन से रमेश अवस्थी बहुत ही भावुक हैं। उनके लिए तो हर कानपुरवासी उनका अपना परिवार है।

अस्वीकरण : यह एक प्रायोजित फीचर है। इसमें किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है।