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Hindi News ब्रांड स्टोरीज़पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे गया के जाने-माने लैप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष प्रसाद

पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे गया के जाने-माने लैप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष प्रसाद

गया के प्रसिद्ध लेप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष प्रसाद के पिता स्व. श्री पांडेय राजेश्वरी प्रसाद अपने जमाने के बेहद कुशल और प्रसिद्ध सर्जन थे।

पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे गया के जाने-माने लैप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष प्रसाद
Anup PrakashBrand Post,PatnaThu, 16 May 2024 07:05 PM
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कुछ चीजें बच्चों को माता-पिता से विरासत में मिलती है। ऐसी अनमोल विरासत को संभाले रखना और उसे आगे बढ़ाना बच्चों की जिम्मेदारी होती है। कुछ ऐसा ही कर रहे हैं गया के  प्रसिद्ध  लेप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष प्रसाद। उनके पिता स्व. श्री पांडेय राजेश्वरी प्रसाद  अपने जमाने के बेहद कुशल और प्रसिद्ध सर्जन थे। उनका ही गुण विरासत के रूप में उनके पुत्र डॉ. आशीष प्रसाद को मिला है। जैसे उनके पिता शल्य चिकित्सा और सामाजिक कार्यों के माध्यम से बिहार की जनता की सेवा करते थे, डॉ. आशीष प्रसाद भी आज उसी राह पर चल रहे हैं। डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम के माध्यम से  आमजन को किफायती और गुणवत्तायुक्त चिकित्सा उपलब्ध कराना काबिले तारीफ है। गया सहित पूरे बिहार को डॉ. आशीष पर नाज है।

बिहार के गया जिले में पले-बढ़े डॉ. आशीष प्रसाद ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गया से ही पूरी की। केंद्रीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने मगध रेंज के प्रसिद्ध अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज गया से एमबीबीएस की पढ़ाई की। इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन करने पुणे चले गएं। आज डॉ. आशीष प्रसाद गया के जाने-माने सर्जन हैं, वे सामान्य और लेप्रोस्कोपी सर्जरी के विशेषज्ञ हैं। डॉ. आशीष प्रसाद ने सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद पटना के प्रसिद्ध अस्पताल आईजीआईएमएस में अपनी सेवाएं दी। 2008 से 2012 तक उन्होंने यहां सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्य किया।

डॉ. आशीष प्रसाद के पिता स्व. डॉ.  पांडेय राजेश्वरी प्रसाद अपने समय के प्रसिद्ध सर्जन थे। उन्हीं की विरासत को आज उनके पुत्र  डॉ. आशीष प्रसाद आगे बढ़ा रहे हैं।

पिता से मिली प्रेरणा

डॉ. आशीष प्रसाद के पिता डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद गया के बहुत प्रसिद्ध सर्जन थे। वे अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज गया में प्रोफेसर एवं सर्जन थे। पिता एक प्रसिद्ध शल्य चिकित्सक थे, ऐसे में डॉ. आशीष को भी उन्हीं से सर्जन बनने की प्रेरणा मिली। डॉ. आशीष बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता को सफल सर्जरी द्वारा कई मरीजों को नया जीवन देते देखा है।

पिता थे प्रसिद्ध चिकित्सक, दादा थे प्रसिद्ध शिक्षाविद्

डॉ. पाण्डेय का जन्म 22 जून 1931 को हुआ था।

वहीं उनके दादा जी श्री पाण्डेय परमेश्वरी प्रसाद गया के प्रसिद्ध शिक्षाविद् थे। राजेश्वरी प्रसाद की पढ़ाई जिला स्कूल से ही हुई। उन्होंने अपना एमबीबीएस 1953 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज से किया। उसके बाद 1965 में पीजी किया। श्री पांडेय राजेश्वरी प्रसाद ने बिहार स्वास्थ विभाग में अपनी सेवाएं दी। उसके बाद वे इंग्लैंड गए और वहां सेाफउर की डिग्री प्राप्त की। उस समय इस डिग्री की काफी ख्याति थी।

समाजिक कार्यों में भी थे संलग्न थे पिता डॉ. पाण्डेय राजेश्वरी प्रसाद

डॉ. आशीष प्रसाद के पिता डॉ. राजेश्वरी प्रसाद मगध मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर होने के साथ एक नामचीन शल्य चिकित्सक थे। इतना ही नहीं वे हमेशा से समाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी देते थे। वे रोटरी क्लब से जुड़े रहे। डॉ. पाण्डेय राजेश्वरी प्रसाद बिहार हेल्थ सर्विस में भी कार्यरत थे।

पिता के सपनों को साकार कर रहे हैं डॉ. आशीष

डॉ. आशीष प्रसाद कहते हैं कि मेरे पिता जी ने 1987 में गांधी मैदान के सामने क्लीनिक की स्थापना की थी। आज विरासत में मिले क्लीनिक को मैं संभाल रहा हूं और पिता जी के सपनों को साकार करने में लगा हूं।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी व जेनरल सर्जरी में महारत हासिल

डॉ. आशीष प्रसाद लेप्रोस्कोपिक सर्जरी व जेनरल सर्जरी में निपुण हैं। अपने क्लीनिक पर आने वाले मरीजों का सफल इलाज कर व उन्हें सही सुझाव प्रदान कर डॉ. आशीष हजारों लोगों को बेहतर जीवन जीने की सही राह दिखते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी व समान्य  सर्जरी के हजारों मरीज यहां इलाज करवाने आते हैं।

मरीज की मदद से मिलती है खुशी

डॉ. आशीष प्रसाद कहते हैं कि डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम में आने वाले मरीजों का इलाज हमारी प्रथम प्राथमिकता होती है। 1987 से चल रहा मेरा अस्पताल 21 बेड का है। यहां जनरल सर्जरी होती है। मुझे मरीजों का सफल इलाज करने में संतुष्टि मिलती है।

पैसा नहीं इलाज है प्राथमिकता

डॉ. आशीष प्रसाद कहते हैं कि डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम में इलाज को प्राथमिकता दी जाती है।

वह मरीजों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी कराते हैं। उनका कहना है कि सही समय पर जांच और इलाज से कई लोगों की जान बच सकती है और जीवन सुधर सकता है।

इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

डॉ. आशीष बताते हैं कि यदि आपके पेट में किसी तरह का दर्द या उल्टी हो रही है तो डॉक्टरी सलाह जरूरी है। महिलाएं 21 वर्ष के बाद अपने ब्रेस्ट की जांच समय-समय पर कराएं साथ ही डॉक्टरी परामर्श भी लेती रहें। सही समय पर जांच और इलाज से मरीज क्रिटिकल कंडिशन में नहीं पहुंचता है और उसका इलाज भी आसान हो जाता है।

डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम में जांच की सुविधा उपलब्ध

डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम में मरीजों के लिए इलाज के साथ-साथ जांच की भी सुविधा भी उपलब्ध है। यहां ब्लड टेस्ट, एक्स रे,अल्ट्रासाउण्ड जैसी कई जांचें उपलब्ध हैं।

माता-पिता हैं आदर्श

डॉ. आशीष प्रसाद कहते हैं कि "मेरे पिता जी डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद बहुत ही विनम्र स्वभाव के आदमी थे। बोलते कम थे मगर जो बोलते वो काम की बात होती थी। आज हम उनके ही आदर्शों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं मेरी माताजी भी मेरी प्रेरणा रहीं हैं। मैं उनसे काफी प्रभावित था। उनका नाम इंद्रा प्रसाद था। उन्होंने मेरी जींदगी में काफी प्रभाव डाला है। समाज में कैसे रहना है, किस तरह  व्यवहार करना है ये सारी बातें मेरी माताजी ने मुझे सिखाई।

छोटा और सुखी परिवार

अपने परिवार के विषय में बताते हुए डॉ. आशीष बताते हैं कि मेरी पत्नी  डॉ. निमिशा मधु भी चिकित्सक है ।  मेरी दो बहने हैं। मेरा छोटा परिवार है। हम एक दूसरे से अपनी समस्याओं को शेयर कर और माता पिता की प्रेरणा और आशीर्वाद   से जीवन  में आगे बढ़ रहे हैं।

कोरोना में तत्परता से किया काम

कोरोना काल में डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद नर्सिंग होम में कई मरीजों की जान बचाई है। बकौल डॉ. आशीष उस दौरान यहां एक पेशेंट आईं थीं जो गया के किसी भी अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकीं थीं, उनका इलाज इस नर्सिंग होम में किया गया। वह काफी क्रिटिकल कंडीशन में थीं। अस्पताल ने अपना सौ फीसदी दिया और अंतत: उसकी जान बच गई।

संक्षिप्त जीवन परिचय

नाम : डॉ. आशीष प्रसाद

लैप्रोस्कोपी सर्जन,

डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद

नर्सिंग होम

पिता : स्व. डॉ. पांडेय राजेश्वरी प्रसाद

माता : इंद्रा प्रसाद

पत्नी : डॉ. निमिशा मधु

उपलब्धियां

एफ.आई.ए.जी.एस में फेलोशिप (2012)  

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में फेलोशिप (2013)

फेलोशिप ऑफ इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ सर्जरी( अमेरिका )

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य

वर्तमान में ए.एस.आई गया चैप्टर के सचिव।

 

"चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले युवाओं से कहना चाहते हैं कि यहां पेशेंस, पर्सीवरेंस और डेडिकेशन की जरूरत है। मेडिकल का क्षेत्र ऐसा है कि यहां जितना काम करेंगे उतना निखार आएगा। आप अगर इस क्षेत्र में आना चाहते हैं तो सेवा भाव के साथ पूरी ईमानदारी से अपने काम को करें।"

- डॉ. आशीष प्रसाद, लैप्रोस्कोपी सर्जन

 

( अस्वीकरण : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है)