देश के सुदूर इलाकों में बैंकिंग क्रांति और रोजगार की नई इबारत लिख रहा संजीवनी विकास फाउंडेशन
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 'मास बैंकिंग' और 'वित्तीय समावेशन' की परिकल्पना की थी । इसी परिकल्पना को धरातल पर उतारने और देश के कोने-कोने तक बैंकिंग सेवाओं को एक आंदोलन बनाने में जिन संस्थाओं ने अहम योगदान दिया उनमें से एक है संजीवनी विकास फाउंडेशन।

एक दौर था जब देश के गांवों, पहाड़ों और दूर-दराज के रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले आम नागरिक या रोजी-रोटी के लिए शहरों में भटकने वाले प्रवासी मजदूर के लिए बैंकिंग एक सपना जैसी थी। बड़े बैंकों के आलीशान दफ्तर, कागजी औपचारिकताएं और दूरी के कारण देश की एक बहुत बड़ी आबादी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से कटी हुई थी। इस खाई को पाटने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 'मास बैंकिंग' और 'वित्तीय समावेशन' की परिकल्पना की। इसी परिकल्पना को धरातल पर उतारने और देश के कोने-कोने तक बैंकिंग सेवाओं को एक आंदोलन बनाने में जिन संस्थाओं ने अहम योगदान दिया उनमें से एक है संजीवनी विकास फाउंडेशन।
संक्षिप्त परिचय
* नाम : अखिलेश अखिल
* प्रेसिडेंट : संजीवनी विकास फाउंडेशन
* बैंकिंग क्षेत्र में लंबे अनुभव के आधार पर देश के दूर-दराज इलाकों तक ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) नेटवर्क पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका
* संस्था के प्रेसिडेंट के रूप में देशभर में 17,000 से अधिक आउटलेट्स के संचालन एवं 20,000 से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ने में नेतृत्वकारी योगदान दिया।
* कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट अमरेश कुमार, सेक्रेटरी रंजन कुमार और ट्रेजरर राजेश कुमार और सीईओ आशीष शर्मा
वर्ष 2004 में हुआ पंजीकरण
सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत साल 2004 में पंजीकृत हुई यह संस्था आज देश के 14 प्रमुख बैंकों के साथ मिलकर कॉर्पोरेट बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (CBC) के रूप में एक विशाल नेटवर्क का संचालन कर रही है। देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले इसके 17,000 से अधिक आउटलेट्स (ग्राहक सेवा केंद्र - CSP) आज न सिर्फ बैंकिंग पहुंचा रहे हैं, बल्कि 20,000 से अधिक लोगों के जीविकोपार्जन का जरिया भी बन चुके हैं।
2004 से 2010: खेल और शिक्षा से 'कॉर्पोरेट बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट' तक का सफर
संजीवनी विकास फाउंडेशन की शुरुआत साल 2004 में एक बेहद पुनीत सोच के साथ हुई थी। संस्था के प्रेसिडेंट अखिलेश अखिल और उनके साथी वाइस प्रेसिडेंट अमरेश कुमार, सेक्रेटरी रंजन कुमार, ट्रेजरर राजेश कुमार और सीईओ आशीष शर्मा
सभी उस समय बैंकिंग क्षेत्र में ही कार्यरत थे। शुरुआत में संस्था का उद्देश्य शिक्षा और खेल के क्षेत्र में कुछ अनूठा करना था। समय के प्रवाह में कई चीजें बदलीं, लेकिन खेल के प्रति उनका शौक आज भी जिंदा है। संस्था आज भी पूरी तरह निशुल्क ऑल इंडिया इंटरनेशनल ऑनलाइन चेस कॉम्पिटिशन का आयोजन हर महीने के अंतिम दिन कराती है, जिसमें देश-विदेश के सैकड़ों खिलाड़ी भाग लेते हैं। लेकिन साल 2010 में संस्था के जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। यह वह दौर था जब आरबीआई और इंडियन बैंक एसोसिएशन के बीच इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि 2,000 से अधिक आबादी वाले हर गांव में बैंक की शाखा कैसे खोली जाए? बैंकों के पास न तो इतना इंफ्रास्ट्रक्चर था और न ही इतनी मैनपावर। तब आरबीआई ने एक 'थर्ड पार्टी मॉडल' निकाला, जिसे सीबीसी मॉडल कहा गया। चूंकि संजीवनी के चारों प्रमोटर्स बैंक के कामकाज को गहराई से समझते थे, इसलिए उन्होंने इस चुनौती को एक सुअवसर के रूप में देखा और साल 2010 से वित्तीय समावेशन के इस महाभियान में कूद पड़े।
क्या है ग्राहक सेवा केंद्र और संजीवनी की भूमिका ?
आम भाषा में जिसे हम 'ग्राहक सेवा केंद्र' कहते हैं, वह वास्तव में किसी बैंक का एक डिजिटल आउटलेट होता है। संजीवनी विकास फाउंडेशन इन केंद्रों को स्थापित करने, उनकी निगरानी करने और उन्हें सुचारू रूप से चलाने का काम करती है।
* संस्था के अध्यक्ष अखिलेश अखिल बताते हैं:
हम पूरे भारत में नए ग्राहक सेवा केंद्रों की संभावनाओं को तलाशते हैं। वहां के योग्य आवेदकों के कागजात की जांच कर अपनी मजबूत रिकमेंडेशन के साथ बैंक को भेजते हैं। बैंक की मंजूरी मिलने के बाद वहां केंद्र स्थापित होता है। बैंकों के साथ हमारा 'सर्विस लेवल एग्रीमेंट' होता है, जिसके तहत हम पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ काम करते हैं।
* आज यह संस्था स्टेट बैंक ऑफ इंडिया , पंजाब नेशनल बैंक , सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे 14 बड़े बैंकों के साथ जुड़ी हुई है। सरकारी स्तर पर सीएससी के ओमनीप्रेजेंट नेटवर्क के समानांतर, संजीवनी जैसी संस्थाएं निजी और सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं।
रोजगार का सशक्त माध्यम : 2 लाख तक की कमाई का अवसर
संजीवनी विकास फाउंडेशन ने ग्रामीण युवाओं के लिए उनके ही घर में रोजगार का एक ऐसा बेहतरीन जरिया तैयार किया है, जिसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है। वह बताते हैं कि आज इस संस्था से जुड़े कई सीएसपी संचालक हर महीने 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं। हालांकि, कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि संचालक अपने काम को कितनी गंभीरता से समझता है।
नअगर पूरे देश के 17,000 से अधिक आउटलेट्स का औसत निकाला जाए, तो एक सीएसपी संचालक हर महीने आसानी से 13,000 से 14,000 रुपये कमा लेता है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में, जिन्हें वित्तीय समावेशन के लिहाज से बेहद 'फर्टाइल' माना जाता है, वहां का औसत मासिक कमीशन 20,000 से 25,000 रुपये के बीच है।
सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के 'सच्चे सारथी' सीएसपी संचालक
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वो इन ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालकों को ही है।
महज 20 रुपये में दुर्घटना बीमा या बीमारी से मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये का सुरक्षा कवच देने वाली इन योजनाओं के प्रति ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाना संजीवनी के सीएसपी संचालकों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है। वे सिर्फ पैसे का लेन-देन नहीं करते, बल्कि सुदूर गांवों में वित्तीय साक्षरता के बड़े वाहक हैं।
संजीवनी विकास फाउंडेशन का वार्षिक सम्मेलन पटना में संपन्न, उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को किया गया सम्मानित
संजीवनी विकास फाउंडेशन का वार्षिक सम्मेलन गत 02 मई 2026 को ज्ञान भवन, पटना में भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न बैंकों के अधिकारियों, फाउंडेशन के प्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. चन्द्र भूषण शर्मा, वाइस चांसलर थे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में श्री संजय कुमार, डीजीएम, कॉर्पोरेट सेंटर मुंबई, श्री रवि प्रसाद, एजीएम, सीबीएस तथा श्री एस.पी. दास समेत कई वरिष्ठ बैंक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अनेक अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर संस्था से जुड़े करीब 500 अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
"संजीवनी विकास फाउंडेशन का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संस्था शुरुआत से ही देशहित और जनसेवा के कार्यों में समर्पित रही है। संजीवनी विकास फाउंडेशन का विश्वास है कि सच्ची सेवा और पारदर्शिता के साथ ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है।"
- अखिलेश अखिल, प्रेसिडेंट, संजीवनी विकास फाउंडेशन
अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट विजिट करें :
Website: https://sanjivanivf.org
( नोट : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति / संस्थान की है)


