नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में साहित्य और प्रकाशन जगत के वैश्विक स्वरों ने की अगुवाई

Jan 16, 2026 03:04 pm ISTBrand Post
share Share
Follow Us on

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर वैश्विक साहित्यिक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त मंच बना।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में साहित्य और प्रकाशन जगत के वैश्विक स्वरों ने की अगुवाई

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर ने वैश्विक साहित्यिक संवाद के लिए एक सतत मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इस मंच पर यूरोप, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया, लैटिन अमेरिका, दक्षिण एशिया और अमेरिका से आए लेखक, कवि, शिक्षाविद्, नाटककार, अनुवादक और संस्कृतिकर्मी एक साथ जुड़े। संवाद सत्रों, रचना पाठों, पुस्तक लोकार्पण और अन्य विशेष प्रस्तुतियों की श्रृंखला के माध्यम से इस मंच ने साहित्य को सांस्कृतिक आदान-प्रदान, ऐतिहासिक आत्मचिंतन और समकालीन विमर्श के एक जीवंत माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया है। साथ ही मेले की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय विचारों और रचनात्मक परंपराओं के संगम स्थल के रूप में और सुदृढ़ किया है।

कई सत्रों में साहित्य और जीवन के अनुभवों के आपसी संबंध एक प्रमुख विषय के रूप में उभरे, विशेषकर उन संदर्भों में जो प्रकृति, स्मृति और विस्थापन से जुड़े हैं। रूसी लेखक और वन अधिकारी इल्या कोचेर्गिन ने लेखन को प्राकृतिक जगत के साथ संवाद के रूप में देखा। उनकी पुस्तक इमरजेंसी एग्ज़िट के संदर्भ में, जो एक वृद्ध घोड़े के साथ उनके संबंधों का वृत्तांत है, ने साहित्य को ऐसे क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जहाँ मानव और गैर-मानव जीवन एक-दूसरे से मिलते हैं, और जहाँ समकालीन पाठकों तक पहुँच बनाए रखने के लिए भाषा का निरंतर विकसित होना आवश्यक है।

Global voices from the literary and publishing world led the way at the New Delhi World Book Fair 2026

इस संवाद में आधुनिक अलगाव (एलियनेशन) की स्थितियों के प्रति उत्तरदायी साहित्यिक रूपों की आवश्यकता पर बल दिया गया, साथ ही सहअस्तित्व और देखभाल से जुड़ी नैतिक चेतना को बनाए रखने की बात कही गई। अनुकूलन और सांस्कृतिक अनुवाद की भूमिका भी प्रमुख रही। अंत्वान द सेंट-एक्ज़ुपेरी की पुस्तक द लिटिल प्रिंस का भारतीय भाषा में चित्र-पुस्तक रूपांतरण छोटा राजकुमार के लोकार्पण से यह स्पष्ट हुआ कि किस प्रकार कालजयी रचनाएँ विचारशील पुनर्कल्पना के माध्यम से संस्कृतियों के बीच यात्रा करती रहती हैं। प्रथम बुक्स द्वारा प्रकाशित और भारत में फ्रांसीसी संस्थान द्वारा प्रस्तुत इस रूपांतरण में अनुष्का रविशंकर का अनुवाद/अनुकूलन और प्रिया कुरियन के चित्रांकन ने दिखाया कि दृश्य भाषा, संक्षिप्त कथानक और सांस्कृतिक संदर्भ मिलकर किसी वैश्विक रूप से मान्य कृति को युवा भारतीय पाठकों के लिए कैसे नया जीवन दे सकते हैं। चर्चा में अनुवाद को केवल भाषायी रूपांतरण नहीं, बल्कि प्रासंगिकता और मूलभाव के संतुलन के साथ किया गया सांस्कृतिक व्याख्यान माना गया।

कविता और बहुभाषिक अभिव्यक्ति भी अंतरराष्ट्रीय संवादों का एक सशक्त माध्यम रहीं है। स्पेनिश, भारतीय और मध्य एशियाई स्वरों के सत्रों में साझा आधुनिकतावादी परंपराओं और काव्य-रूप की स्थायी प्रासंगिकता पर विचार हुआ। फेडेरिको गार्सिया लोर्का के कार्यों के साथ भारतीय कवि जीवनानंद दास को केंद्र में रखकर जनरेशन ऑफ ’27 पर हुई चर्चा ने भाषायी और राष्ट्रीय सीमाओं के पार साहित्यिक प्रभावों के प्रवाह को रेखांकित किया। अनुवाद एक केंद्रीय चिंता के रूप में उभरा, विशेषकर यह प्रश्न कि कविता विभिन्न भाषाओं में भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई कैसे बनाए रखती है। स्पेनिश, बास्क, कैटलन, अस्तूरियन, बांग्ला और हिंदी में हुए काव्य-पाठों ने यह भी स्पष्ट किया कि भाषायी बहुलता समकालीन साहित्यिक आदान-प्रदान की अनिवार्य विशेषता है, बाधा नहीं।

Global voices from the literary and publishing world led the way at the New Delhi World Book Fair 2026

बाल साहित्य और शिक्षाशास्त्र पर भी अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों से चर्चा हुई, जिनमें सुलभता और भावनात्मक संवेदनशीलता पर जोर दिया गया। इज़राइली शिक्षाविद् और लेखिका आइरिस आर्गामन ने बच्चों के लिए बड़े ऐतिहासिक आख्यानों को अंतरंग और पठनीय रूपों में ढालने की प्रक्रिया पर बात की। उन्होंने तर्क दिया कि बाल साहित्य को अतीत से उपदेशात्मक हुए बिना संवाद करना चाहिए। उनके विचारों ने पठन को मूल्यांकन की बजाय जिज्ञासा और कल्पना पर आधारित अनुभव के रूप में रेखांकित किया, और कहानी कहन को विभिन्न समाजों में एक निर्माणकारी सांस्कृतिक अभ्यास के रूप में पुनः स्थापित किया।

स्मृति, पहचान और अपनत्व के प्रश्न भी कई अंतरराष्ट्रीय संवादों में गूंजते रहे। कज़ाख़स्तान के लेखकों और विद्वानों ने यह चर्चा की कि व्यक्तिगत और सामूहिक स्मृतियाँ राष्ट्रीय आख्यानों को कैसे आकार देती हैं, विशेषकर उपनिवेशोत्तर और पोस्ट-सोवियत संदर्भों में। साहित्य को निरंतरता और परिवर्तन के बीच संवाद का माध्यम बताया गया, जो समाजों को अपने इतिहास पर चिंतन करते हुए समकालीन सांस्कृतिक यथार्थ से जुड़ने का अवसर देता है। इन चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की साझा चिंताएँ सामने आईं। जैसे स्मृति का संप्रेषण, पहचान का मोलभाव और युवा संस्कृति की भूमिका।

Global voices from the literary and publishing world led the way at the New Delhi World Book Fair 2026

थिएटर और प्रदर्शन ने इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर को और आयाम दिए। रूसी नाटककार यारोस्लावा पुलिनोविच ने समकालीन रंगमंच को दैनिक भावनात्मक वास्तविकताओं का दर्पण बताया, जहाँ संवेदनशीलता, युवावस्था और लचीलापन जैसे विषय उभरते हैं। उन्होंने नाटक को ऐसा क्षेत्र बताया जहाँ यथार्थ और कल्पना सह-अस्तित्व में रहते हैं और दर्शकों को सामाजिक व व्यक्तिगत प्रश्नों से जूझने का अवसर मिलता है। इसी तरह, खाड़ी क्षेत्र की रंगमंच परंपराओं से जुड़े सांस्कृतिक आदान-प्रदान में यह रेखांकित हुआ कि नाट्य-रूप कैसे सीमाओं के पार यात्रा करते हैं, और साझा मूल्यों व ऐतिहासिक संपर्कों के कारण भारतीय कथाएँ खाड़ी सांस्कृतिक संदर्भों में भी प्रतिध्वनित होती हैं।

साहित्य के अंतर्विषयी (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण भी इनमें स्पष्ट होते हैं। प्रदर्शन, मनोविज्ञान और चिंतन को जोड़ने वाले एक सत्र में कृतज्ञता, आंतरिक शक्ति और स्त्रीत्व जैसे विषयों को ध्वनि और लय के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया, जिससे यह प्रदर्शित हुआ कि मेले के साहित्यिक मंच लिखित शब्द से आगे बढ़कर देहगत और अनुभवात्मक अभिव्यक्तियों को भी समेटते हैं। ऐसे संवादों ने यह पुष्ट किया कि साहित्य व्यापक सांस्कृतिक अभ्यासों और अर्थ-निर्माण की विधाओं से गहराई से जुड़ा रहता है।

साहित्यिक उत्पादन में प्रौद्योगिकी की नैतिकता एक महत्वपूर्ण समकालीन चिंता के रूप में सामने आई। एआई-आधारित अनुवाद की सीमाओं और निहितार्थों पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैनल में तकनीकी दक्षता और मानवीय सृजनात्मकता के बीच तनाव पर चर्चा हुई। डिजिटल उपकरणों की बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए वक्ताओं ने साहित्यिक अनुवाद में व्याख्यात्मक सूक्ष्मताओं और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के क्षरण के प्रति चेतावनी दी। चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि अनुवाद एक रचनात्मक श्रम है, जिसमें संदर्भगत समझ अनिवार्य है, और तकनीकी हस्तक्षेप को सुविधा नहीं, बल्कि नैतिक विवेक द्वारा निर्देशित होना चाहिए।

नेपाल और अन्य क्षेत्रों से हुए पुस्तक विमोचन और काव्य-पाठों ने भी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को समृद्ध किया। प्रवासन, विस्थापन, श्रम और स्मृति जैसे विषयों ने सामूहिक चिंतन को स्वर दिया, यह दिखाते हुए कि साहित्य कैसे अनेक आख्यानों को एक साथ थामे रख सकता है, जहाँ व्यक्तिगत अनुभव और व्यापक सामाजिक यथार्थ पद्य और गद्य के माध्यम से एक-दूसरे से मिलते हैं। समकालीन इज़राइली साहित्य पर एक विचारोत्तेजक सत्र में मातृत्व, स्मरण और शोक को केंद्रीय कथात्मक शक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। साहित्य को ऐतिहासिक आघात के बाद आशा और निरंतरता को संजोने का माध्यम बताया गया, जहाँ लेखन व्यक्तिगत साक्ष्य और सामूहिक विरासत दोनों बन जाता है।

एक अन्य सत्र में भारत और ईरान के बीच गहरे साहित्यिक और बौद्धिक संबंधों की पड़ताल की गई। फारसी को एक जीवंत सभ्यता के रूप में रेखांकित किया गया, जिसने ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों को जोड़ा। न केवल साहित्य की भाषा के रूप में, बल्कि प्रशासन, विज्ञान और बौद्धिक आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में भी। यह उल्लेख किया गया कि ईरानी संस्कृति के संदर्भ के बिना भारतीय अध्ययन अधूरे हैं, और भारत–ईरान संबंध राजनीतिक या आर्थिक हितों से नहीं, बल्कि पुस्तकों के माध्यम से निर्मित हुए हैं। 517 ईस्वी में पंचतंत्र के फारसी अनुवाद कलीला वा दिमना को इस दीर्घकालिक बौद्धिक संबंध का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया।

समग्र रूप से, इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में हुए अंतरराष्ट्रीय संवाद यह दर्शाते हैं कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 ने साहित्य को एक साझा वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित किया है। विविध सांस्कृतिक, भाषायी और ऐतिहासिक संदर्भों से आई आवाज़ों को एक साथ लाकर इस मंच ने प्रकृति और सह-अस्तित्व, अनुवाद और नैतिकता, स्मृति और पहचान, तथा बदलती दुनिया में लेखकों की जिम्मेदारियों जैसे सीमापार विषयों पर निरंतर संवाद को संभव बनाया है।

इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर मेले की भूमिका को केवल पुस्तकों के आयोजन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समझ और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आदान-प्रदान के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में और सुदृढ़ करता है।

अस्वीकरण: इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है।

Diya T Raina

लेखक के बारे में

Diya T Raina

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।