सुरक्षा की छांव और खेल-खेल में सीखने का आनंद, नन्हे कदमों को नई दिशा दे रहा आदर्शनगर स्थित यूरोकिड्स प्री स्कूल
मुजफ्फरपुर के आदर्श नगर स्थित यूरोकिड्स प्री-स्कूल में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय खेल, जिज्ञासा और अनुभव के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाता है।

यूरोकिड्स प्री-स्कूल, आदर्श नगर, मुजफ्फरपुर
खेल, जिज्ञासा और सुरक्षा पर आधारित प्रारंभिक शिक्षा
मुजफ्फरपुर के आदर्श नगर स्थित यूरोकिड्स प्री-स्कूल में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए खेल, जिज्ञासा और अनुभव आधारित सीखने की पद्धति पर विशेष बल दिया जाता है। स्कूल की डायरेक्टर रश्मि कुमारी के अनुसार, यहां ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाता है जिसमें बच्चे सहज रूप से सवाल पूछें, चीजों को समझें और अपने आसपास की दुनिया के प्रति जिज्ञासा विकसित करें। इस दिशा में खेल-आधारित शिक्षा, यूरेका पाठ्यक्रम और ' चाइल्ड फर्स्ट सेफ्टी फर्स्ट ' के सिद्धांत को स्कूल की पहचान माना जाता है।
यूरेका पाठ्यक्रम: खेल-खेल में सीखने पर बल
यूरोकिड्स का यूरेका पाठ्यक्रम बच्चों के समग्र विकास - मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक - को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस पद्धति में बच्चों को सीधे जानकारी देने के बजाय उन्हें देखने, सोचने और सवाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। दृश्य चिंतन पद्धति के माध्यम से बच्चे किसी वस्तु को देखकर उसके बारे में सोचते हैं और उससे जुड़े प्रश्न पूछते हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया स्वाभाविक और रुचिकर बन जाती है।
आयु-अनुकूल शिक्षण संरचना
दो से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए उनकी उम्र और सीखने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। प्ले ग्रुप, नर्सरी, यूरो जूनियर और यूरो सीनियर स्तरों पर सीखने की प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से तय की जाती है। छोटे बच्चों से सीधे लेखन कार्य शुरू कराने के बजाय पहले उनकी पूर्व-शिक्षण क्षमताओं - देखना, समझना, पहचानना, सवाल पूछना और अभिव्यक्ति - पर कार्य किया जाता है। पूरे शैक्षणिक वर्ष की योजना पहले से तैयार रहती है, जिससे सीखने की प्रक्रिया क्रमबद्ध ढंग से आगे बढ़े।
बाल मनोविज्ञान और सामाजिक विकास
आज के समय में छोटे परिवारों के कारण बच्चों को घर पर सीमित सामाजिक अनुभव मिल पाते हैं। ऐसे में स्कूल में साथियों के समूह के साथ बातचीत, गतिविधियों में सहभागिता और सामूहिक शिक्षण के अवसर बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक बच्चों की सोच और व्यवहार को समझते हुए उनके विकास पर सतत रूप से कार्य करते हैं।
माता-पिता से अलगाव की सहजता
दो वर्ष की उम्र में स्कूल में पहला अनुभव अक्सर बच्चों के लिए माता-पिता से अलग होने की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए स्कूल में आरंभ से ही एक सहज और सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास किया जाता है। गेट पर शिक्षकों द्वारा स्वागत और खेल-गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को धीरे-धीरे स्कूल के वातावरण, शिक्षकों और सहपाठियों से परिचित कराया जाता है।
सुरक्षा: सर्वोच्च प्राथमिकता
बच्चों की सुरक्षा स्कूल की सबसे पहली प्राथमिकता है। परिसर में सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा गार्ड, फोम फ्लोरिंग, गोलाकार किनारों वाला फर्नीचर तथा उंगलियों को चोट से बचाने वाले सुरक्षित दरवाजे और खिड़कियां जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक उपचार किट और चिकित्सा कक्ष की सुविधा भी उपलब्ध है, जिनकी उपयोगिता और वैधता की नियमित निगरानी की जाती है। इसके अतिरिक्त, हर महीने शिक्षक और सहयोगी स्टाफ मिलकर बाल सुरक्षा से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं।
प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षक टीम
शिक्षकों के चयन में विशेष सावधानी बरती जाती है — नर्सरी शिक्षक प्रशिक्षण की योग्यता, शैक्षणिक क्षमता और यूरोकिड्स के मानकों के अनुरूप साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद ही नियुक्ति की जाती है। शिक्षकों का प्रशिक्षण निरंतर चलता रहता है और लगभग हर तीन माह में इसका आयोजन किया जाता है, ताकि वे नई शिक्षण पद्धतियों और बच्चों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रख सकें। बच्चों और शिक्षकों का अनुपात भी सीमित रखा जाता है, जिससे प्रत्येक बच्चे पर पर्याप्त ध्यान दिया जा सके।
गैर-पारंपरिक कक्षा व्यवस्था
कक्षाओं को पारंपरिक ढांचे के बजाय बच्चों की आयु और आवश्यकता के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है। प्ले ग्रुप और नर्सरी स्तर पर टेबल-कुर्सी की जगह गोल स्टूल और कुशन का प्रयोग किया जाता है, तथा शिक्षक बच्चों के साथ उनकी आंखों के स्तर पर बैठकर गतिविधियां संचालित करते हैं, जिससे सहज और प्रभावी शिक्षण संभव हो पाता है।
अभिभावक परामर्श सुविधा
बच्चों से जुड़ी व्यवहारिक या अन्य चुनौतियों पर अभिभावकों को मनोविज्ञान-आधारित परामर्श उपलब्ध कराया जाता है, जिससे घर और स्कूल के बीच समन्वित सहयोग सुनिश्चित हो सके।
स्वच्छता और पौष्टिक आहार पर बल
स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा है, जिनमें बच्चों के अनुकूल सहायक व्यवस्थाएं और नियमित स्वच्छता सुनिश्चित की जाती है। परिसर में जंक फूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित नहीं किया जाता; इसके बजाय घर से लाए गए पोषणयुक्त भोजन - जैसे पोहा, चीला, रोटी-सब्जी और पराठे ( घर का बना खाना)- को प्राथमिकता दी जाती है। जन्मदिन के अवसर पर मिठाई की जगह मौसमी फल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जाता है, तथा हाल की अभिभावक-शिक्षक बैठक में अंकुरित अनाज और नींबू पानी जैसे विकल्प भी सुझाए गए।
निष्कर्ष
रश्मि कुमारी के अनुसार, स्कूल का उद्देश्य बच्चों को ऐसा वातावरण प्रदान करना है जहां वे सुरक्षित, सहज और प्रसन्न महसूस करें। हाल की अभिभावक-शिक्षक बैठक में अभिभावकों ने भी बच्चों को मिल रहे सुरक्षित और घरेलू वातावरण को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। खेल-आधारित शिक्षा, यूरेका पाठ्यक्रम और *' चाइल्ड फर्स्ट ,सेफ्टी फर्स्ट '* के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से यूरोकिड्स आदर्श नगर बच्चों के शुरुआती वर्षों को सीखने, सवाल करने, खेलने और आत्मविश्वास विकसित करने का एक सशक्त अवसर बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
एक नजर में
यूरेका पाठ्यक्रम: प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में जिज्ञासा और प्रश्न पूछने की आदत का विकास।
खेल-आधारित शिक्षा: खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के सहज अवसर।
सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षित परिसर, फोम फ्लोरिंग, गोलाकार फर्नीचर और प्राथमिक उपचार व्यवस्था, सिक्योरिटी गार्ड गेट ऐप,
प्रशिक्षित शिक्षक: योग्य शिक्षकों का सुनियोजित चयन और हर तीन माह में नियमित प्रशिक्षण।
स्वस्थ आदतों को बढ़ावा: जंक और पैकेटबंद भोजन से दूरी, घर के पौष्टिक भोजन एवं मौसमी फलों को प्राथमिकता।
बर्थडे पे बच्चों के पेरेंट्स फ्रूट्स भेजते हैं उनके साथी को रिटर्न गिफ्ट में देने के लिए, चॉकलेट और पैकेट वाली जंक फूड अलाउड नहीं है|
संपर्क विवरण
पता: यूरोकिड्स प्री-स्कूल, आदर्श नगर,
मुजफ्फरपुर, बिहार
ईमेल: adarshngareurokids@gmail.com
फोन: +91-8969524402
( नोट : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है)


