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रूस से डरते क्यों हैं ट्रंप

सीआईए के पूर्व निदेशक जॉन ब्रेनन से जब बुधवार को पूछा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा स्टाफ के मना करने के बावजूद व्लादिमीर पुतिन को गलत तरीके से जीते गए चुनाव की बधाई क्यों दी, जरा भी हिचके बिना ब्रेनन का जवाब था, ‘शायद वह रूसी राष्ट्रपति से डरते हैं। मुझे लगता है कि रूसी उन्हें लंबे समय से और नजदीक से जानते हैं, इसलिए उन्हें लगता है कि कहीं वे उनके भेद न खोलकर रख दें।’ 

ब्रेनन ‘मॉर्निंग जो’ कार्यक्रम में सवालों के जवाब दे रहे थे। ट्रंप पर पुतिन के दबाव की बात एक साल से चर्चा में है। पुतिन के प्रति उनके अनावश्यक और अतिशय पे्रम प्रदर्शन के साथ ही कई अवसरों पर पुतिन के आक्रामक व अनुचित व्यवहार को उनके द्वारा नजरअंदाज करने से भी इसे बल मिला है। ट्रंप समर्थक भले तर्क दें कि 2012 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद बराक ओबामा ने भी पुतिन को आमंत्रित किया था, लेकिन अब हालात बहुत बदल चुके हैं। इधर पुतिन एक ऐसे तानाशाह बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपने अधिकांश राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कुचलकर रख दिया है। बीते सप्ताह गलत तरीके से जीतकर तो वह खुद को अजेय ही समझने लगे हैं।

अमेरिकी खुफिया मानती है कि 2016 के चुनावों में खासा खेल किया था और अब 2018 में वह अमेरिका ही नहीं, यूरोपीय देशों में वही खेल करने की कोशिश में हैं। हालांकि चुनाव में हस्तक्षेप और कुछ साइबर हमलों में प्रशासन ने हाल ही में रूस पर कुछ प्रतिबंध लगाए और एक पूर्व रूसी जासूस और उनकी बेटी को ब्रिटेन में जहर देने का दोष भी रूस पर लगा, लेकिन ट्रंप ने इस मामले में किसी भी रूप में पुतिन का नाम खींचे जाने से मना कर दिया। ‘मॉर्निंग जो’ में जो कुछ हुआ, वह इस धारणा को मजबूत करता है। जॉन ब्रेनन ने तो महज खतरे का इशारा किया है, क्योंकि वह इसकी गंभीरता को बेहतर समझ रहे होंगे। खतरे का इशारा कई और स्तरों से भी हुआ है। अभी वक्त है। कहीं ऐसा न हो कि संभलने में बहुत देर हो जाए।

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