DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अमेरिका को कामगार चाहिए

 

राष्ट्रपति ट्रंप ने न तो अप्रवासियों के प्रति अपनी नापसंदगी कभी छिपाई और न ही कानूनी, गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका आने वालों को रोकने के उपायों को समर्थन देने से वह कभी हिचके। बहरहाल, उनका बॉर्डर बंद करने का कदम जब सख्त होता जा रहा है, तो निर्माण, कृषि, परिवहन, ऊर्जा, खाद्य सेवा, खुदरा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी चेतावनी देने लगे हैं कि कामगारों की कमी संकट के स्तर पर पहुंचने लगी है। अमेरिका में कामगारों की कमी का एक कारण हाल के वर्षों में जन्म-दर में आर्ई ऐतिहासिक गिरावट व बुजुर्गों की तादाद में वृद्धि भी है। यदि कर्मचारियों की कमी इस वक्त खराब दिख रही है, तो आने वाले दिनों में, जब अमेरिका से निर्वासन की कोशिशें तेज होंगी और सालाना वैध अप्रवासन में कटौती से जुड़े कानून का दबाव बढ़ता जाएगा, हालात बदतर होंगे। इस वक्त सालाना करीब 10 लाख लोग बाहर से यहां काम के लिए आते हैं। टं्रप का इरादा इन्हें आधे पर समेटने का है। वॉल स्ट्रीट  रणनीतिकार थॉमस जे ली का आकलन है कि आने वाले दशक में अमेरिका में करीब 82 लाख कामगारों की कमी पड़ेगी। वॉल स्ट्रीट  में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि खुली नियुक्ति प्रक्रिया के जरिए मिडवेस्ट के सभी राज्यों के एक-एक बेरोजगार को नौकरी दे दी जाए, तब भी 1,80,000 पद खाली रह जाएंगे। विस्कोंसिन में तो कर्मचारियों का इतना टोटा पड़ गया है कि उसने 10 लाख डॉलर का एक विज्ञापन अभियान छेड़ा है, ताकि शिकागो के बेरोजगारों को अपने यहां नौकरी के लिए आकर्षित कर सके। ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी अप्रवासन व्यवस्था में अधिक कुशल व अंग्रेजी भाषा पर पकड़ रखने वाले कामगारों को ही महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने जिस विधेयक का समर्थन किया है, वह न सिर्फ अप्रवासी कामगारों की संख्या को स्थिर कर देगा, बल्कि इससे अकुशल कामगारों की आमद में भारी कमी आएगी। फिर खाद्य प्रसंस्करण, खुदरा, निर्माण क्षेत्र के नियोक्ता कहां से कामगार लाएंगे? संरक्षणवाद ने भले टं्रप को राजनीतिक लाभ पहुंचाया हो, पर यह अर्थव्यवस्था के हक में कतई नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:videshi media hindustan column on 16 april