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पाकिस्तानी लड़कियों की चिंता

 

 

कुछ महीने पहले पाकिस्तानी मीडिया चीनी लड़कों की पाकिस्तानी लड़कियों से शादी को सोशल मीडिया के जरिए बन रही जोड़ियों के रूप में प्रचारित कर रहा था। अब यह एक कांड नजर आने लगा है। पाकिस्तान में मानव तस्करी अपने आप में एक बड़ी समस्या है, जिसके समाधान के लिए सरकार को समस्या की जड़ों में जाना चाहिए। 1980 के दशक में मानव तस्करी को संगठित स्वरूप मिल गया था, जिसकी कड़ियां मुख्य रूप से पाकिस्तान, ईरान और तुर्की आधारित रहीं। प्रतिवर्ष 30 हजार से 40 हजार पाकिस्तानी सड़क, समुद्र व हवाई मार्ग से अवैध रूप से यूरोप, तुर्की, रूस और मध्य-पूर्व के देशों में पहुंच जाते हैं। पिछले दशक में 200 से ज्यादा पाकिस्तानी विदेश जाने की कोशिश में डूबकर या सीमा सुरक्षा बलों की गोली से मारे गए हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की अप्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में 80,000 से ज्यादा पाकिस्तानी प्रत्यर्पण के जरिए वापस किए गए हैं, इनमें से आधे से ज्यादा तो सऊदी अरब से प्रत्यर्पित होकर आए हैं। इनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी आर्थिक तंगी से परेशान होकर सपनों के पीछे भागे थे। अब ऐसे लोगों में चीन गई या भेजी गई लड़कियों का समूह भी शामिल है, जिनकी संख्या पिछले वर्ष से बढ़ी है। लड़कियों के दलाल अखबारों में विज्ञापन देते हैं, सड़कों पर बैनर लगाए जाते हैं, उलेमा भी मदद करते हैं, परेशान अभिभावक इनके निशाने पर होते हैं। ऐसे अभिभावकों से लड़कियों के बदले संपन्नता का वादा किया जाता है। यह सब पाकिस्तान में तो खुशनुमा लगता है, लेकिन एक बार लड़कियां जब चीन पहुंच जाती हैं, तो फिर असहाय हो जाती हैं। 
इस मामले को चीन ने भी गंभीरता से लेते हुए कहा है कि वह अवैध अंतरराष्ट्रीय विवाह एजेंसियों के प्रति शून्य सहिष्णुता रखता है। चीन ने इस बढ़ते अपराध को रोकने के लिए एक टास्क फोर्स पाकिस्तान भेजा है। अब चीन-पाकिस्तान परस्पर संबंधों को बचाने के संयुक्त प्रयास में लग गए हैं। 
 

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  • Web Title:videshi media hindustan column on 14 may