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इंटरनेट पर निगरानी

वेब मॉनिर्टंरग सिस्टम लागू करने लिए पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी के हालिया कदमों के बारे में सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह जल्दबाजी में उठाया जा रहा कदम है। पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी ने इसे लागू करने के निर्देश सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को दे दिए हैं। आईटी कंपनियों को इस सिस्टम या व्यवस्था को लागू करने की अत्यधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पाकिस्तान में इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी की जाएगी, विभिन्न उपाय किए जाएंगे, गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाएगा और फिल्टर भी किया जाएगा। इस व्यवस्था के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह बहुत परेशान करती है। इसे लागू करने से पहले कोई प्रचार नहीं किया गया है। सीनेट स्थायी समिति ने भी पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी के उस समझौते पर चिंता जाहिर की है, जिसके तहत एक अमेरिकी कंपनी को पाकिस्तान में वेब ट्रैफिक निगरानी करने की मंजूरी दी गई है। इससे स्वत: पता चलता है कि इस प्रक्रिया पर संसदीय दृष्टि का अभाव रहा है। सलाह-मशविरा और वित्तीय पारदर्शिता के अभाव के अलावा इस व्यवस्था से अन्य वित्तीय और सामाजिक प्रभावों की भी संभावना है। ज्यादा से ज्यादा वेबसाइट्स को ब्लॉक करने की लागत भी कंपनियों को वहन करनी पड़ेगी और प्रकारांतर से इसका बोझ भी उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाएगा। ब्रॉडबैंड और सेलुलर डाटा भी ज्यादा महंगा हो जाएगा और बहुत से नागरिकों तक उसकी पहुंच दुर्गम हो जाएगी। आशंका है कि वाट्सएप, मैसेंजर और फेसटाइम पर मिलने वाली कॉल-सुविधा बाधित हो जाएगी। कुछ और सवाल हैं, जैसे नई निगरानी व्यवस्था का नागरिक स्वतंत्रता पर क्या असर पडे़गा? व्यक्तिगत डाटा संरक्षण कानून के अभाव व गोपनीयता के विषय पर आधे-अधूरे कानून के कारण व्यावहारिकता और क्षमता के बावजूद एक आम नागरिक को उस निगरानी से बचाना मुश्किल होगा, जैसी एक अपराधी के लिए की जाएगी। जरूरी गोपनीयता भी असंभव हो जाएगी, खासकर स्वतंत्र पत्रकारिता और घोटालों का खुलासा करने के मामलों में भी कठिनाई आएगी। 

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  • Web Title:videshi media hindustan column on 11 june