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सेकुलर राज्य? 

वह दुखद और शर्मनाक दिन था। इसकी जडें़ इतिहास के जख्मों और वर्तमान के अतार्किक भय में निहित हैं। कनाडा के क्यूबेक प्रांत की सरकार ने एक विशेष विधेयक प्रस्तावित किया है, जो क्यूबेक के भविष्य के लिए जहरीला सिद्ध हो सकता है। अधिकारी से लेकर शिक्षक तक जितने भी सरकारी पद हैं, उन पर बैठे लोगों के लिए किसी भी धार्मिक प्रदर्शन, प्रतीक या पहनावे से परे रहना अनिवार्य हो जाएगा। राज्य की धर्मनिरपेक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कानून बनाया जा रहा है। इसका क्रियान्वयन व्यापक होगा और अनुमान से ज्यादा कठोर भी। हालांकि यह हर धर्म के लोगों पर लागू होगा, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह मुस्लिमों, यहूदियों और सिखों पर प्रभाव डालेगा। इन धर्म के लोगों के लिए हिजाब, किपास और पगड़ी केवल धार्मिक अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि धार्मिक व्यवहार भी है। इन प्रतीकों को एक शर्ट के पीछे छिपाया भी नहीं जा सकता, जैसे कि क्रॉस को छिपाया जा सकता है। निरपेक्षता बहाल करने के नाम पर मूलभूत अधिकारों को किनारे किया जा रहा है। यह कानून अन्य अनेक अधिकारों को प्रभावित करने वाला है। यह कानून घोषणा करता है कि निरपेक्षता चार तत्वों पर निर्भर करती है। पहला- राज्य और धर्म की पृथकता (जबकि राज्य स्वयं धर्म से छेड़छाड़ कर रहा है), दूसरा- राज्य की धार्मिक तटस्थता (जबकि कानून का प्रभाव धार्मिक रूप से तटस्थ नहीं रहेगा), तीसरा- सभी नागरिकों की समानता (जबकि कुछ ही नागरिकों के अधिकार रौंदे जाएंगे), पांचवां- विवेक और धर्म की स्वतंत्रता। प्रस्तावित विधेयक जितना अपमानजनक है, उतना ही गैर-जरूरी है। क्यूबेक प्रांत में कोई नहीं चाहता कि प्रांत सेकुलर न रहे। अभी जो कानून है, वह भी राज्य की धार्मिक तटस्थता को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है। नए विधेयक के पीछे यह गैर-वाजिब डर है कि कहीं मुस्लिम प्रवासी अपने धर्म को न लादने लगें। यह कानून अगर बन गया, तो क्यूबेक को अलग तरह का समाज बना देगा और यह प्रवासियों की पसंद का प्रांत नहीं रह जाएगा। यहां का समाज प्रगतिशील नहीं रह जाएगा। 
 

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  • Web Title:videshi media hindustan column 20 april