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मायूस करने वाला मैच

साल 2019 के विश्व कप के जिस मैच का सबसे ज्यादा इंतजार किया जा रहा था, वह खत्म हो चुका है। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने सरफराज अहमद और उनके साथियों को करारी शिकस्त देते हुए विश्व कप प्रतियोगिता में पाकिस्तान को पराजित करने का अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा है। इस मैच को दोनों मुल्कों के डेढ़ अरब से ज्यादा लोगों ने देखा, जो दोनों देशों के हालिया तनाव और इस साल की शुरुआत में जंग जैसे हालात को देखते हुए महज एक मैच नहीं रह गया था। बहरहाल, यह मुकाबला अमूमन दोस्ताना एहसास के साथ ही हुआ और विराट कोहली ने सभी चीजों को दरकिनार रखते हुए पेशेवराना तेवर का मुजाहरा किया। उनका फोकस सिर्फ किक्रेट पर था। इसमें हैरानी नहीं कि सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से कटु टिप्पणियां की गईं, बल्कि उनमें से कई तो बेहद तल्ख थीं। पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खिलाफ उनके प्रशंसकों ने भी बेहद हमलावर लहजा अपनाया। इस उप-महाद्वीप में खास तौर से क्रिकेट का खेल काफी अहमियत रखता है, मगर अंतत: वह एक खेल ही है। भारतीय टीम ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया है कि क्यों उसे तीसरी बार विश्व-विजेता बन सकने वाली टीम के रूप में देखा जा रहा है। उसके बल्लेबाजों ने 336 रनों का जो बड़ा स्कोर खड़ा किया, वह आखिरकार पाकिस्तानी टीम की क्षमताओं से बड़ा साबित हुआ। फखर जमां के 62 रन और बाबर आजम के 48 रन की अच्छी पारी भी मुकाबले को रोचक नहीं बना सकी, यह एकतरफा मुकाबला था। पाकिस्तान 89 रनों से मैच हार गया और इसके साथ ही यह साफ हो गया कि आखिर वल्र्ड कप की शुरुआत से ही पाकिस्तान के भीतर टीम की लगातार आलोचना क्यों हो रही है। टीम की रणनीति, कप्तानी और जज्बे को लेकर सवाल उठे हैं। बहरहाल, कोई बहाना मददगार नहीं हो सकता। हालांकि दोनों तरफ से कुछ बड़बोलेपन और बदमिजाजी का भी प्रदर्शन हुआ, मगर मैदान में और उसके बाहर सौहार्द व शांति की चाह भी दिखाई पड़ी। हम बेहतर भविष्य की कामना ही कर सकते हैं।
 

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  • Web Title:videshi media hindustan column 19 june