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ट्रंप और टैक्स

इस विषय पर कई चर्चाएं हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसी मिसाल क्यों कायम की और वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान के करों को उजागर करने से इनकार क्यों कर दिया। एक चर्चा तो यह है कि कर भुगतान उजागर करने से यह पता चल जाएगा कि ज्यादातर बैंकों द्वारा नकदी देने से इनकार के बाद ट्रंप ने धन के लिए किन लोगों से गठजोड़ किया था। एक चर्चा यह है कि कर भुगतान उजागर होने से यह पता चल जाएगा कि वह उतने अमीर नहीं हैं, जितने का वह दावा करते हैं। एक चर्चा यह भी है कि वह राष्ट्रपति होेने का लाभ अपने व्यावसायिक हित में ले रहे हैं। शायद सबसे सहज स्पष्टीकरण यह है कि वह टैक्स के रूप में ज्यादा धन नहीं चुकाते हैं। एक संभावना यह भी है कि वह अपनी कमाई की तुलना में कम कर चुका रहे होंगे। वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने करों के बारे में पहले ही खुलासा कर देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और इसीलिए डेमोक्रेट नेता अब उनसे मांग कर रहे हैं।  वर्ष 1924 के टैक्स लॉ के तहत ही वेज ऐंड मींस कमेटी के प्रमुख रिचर्ड डी मास ने ट्रंप के छह वर्ष के रिटर्न की सूचना मांगी थी, लेकिन ट्रंप के स्टाफ प्रमुख ने दोटूक बता दिया कि डेमोके्रट उसे कभी नहीं देख पाएंगे। ट्रंप के निजी वकील ने एक अनुपस्थित सीमा या मजबूरी का हवाला देते हुए बचाव किया कि इन सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए कांग्रेस (अमेरिकी निम्न सदन) को वैध विधायी कारण की जरूरत पड़ेगी। 
ट्रंप ने यह जाहिर किया है कि टैक्स रिटर्न को उजागर करना वह पसंद करेंगे, लेकिन ऑडिट के तहत होने के कारण वह ऐसा नहीं कर सकते। यह फर्जी बहाना है। ठीक इसी तरह से ट्रंप का बचाव करने वालों ने यह भी कहा है कि सूचना देने से गलत परंपरा शुरू हो जाएगी। अगर भविष्य में किसी समिति ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों या समृद्ध लोगों का रिकॉर्ड मांगना शुरू कर दिया, तो क्या होगा? खैर, राष्ट्रपति का मामला विशेष है और टैक्स रिटर्न दिखाने से राष्ट्रपति का इनकार और भी विशेष मामला है।

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  • Web Title:videshi media hindustan column 16 april