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रूस और चीन की मित्रता

यह विगत छह वर्ष में राष्ट्रपति सी जिनपिंग की आठवीं रूस यात्रा है। इतनी यात्राएं स्वयं बता देती हैं कि रूस के साथ अपने रिश्तों को बीजिंग कितना महत्व देता है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश द्विपक्षीय राजनय संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। जब दुनिया संरक्षणवाद, एकपक्षवाद और आर्थिक अंधराष्ट्रीयता की चुनौतियों का सामना कर रही है, तब रूस और चीन, दोनों ही बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थक हैं। रूसी मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में जिनपिंग ने कहा कि चीन और रूस रिश्ते इतिहास में सबसे श्रेष्ठ दौर में हैं और भावी विकास के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। सात दशकों के विकास के बाद बीजिंग-मास्को रणनीतिक साझेदारी पहले से काफी मजबूत है और द्विपक्षीय व्यापार में झलक रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार वर्ष 2018 में 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है और प्रति वर्ष 27.1 की दर से बढ़ रहा है। चीन के दस टॉप व्यावसायिक भागीदारों में यह सबसे ज्यादा है। ऊर्जा, अंतरिक्ष, परस्पर संपर्क और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, उच्च तकनीक, उत्खनन और सुदूर पूर्व के विकास में दोनों के रिश्ते शानदार मुकाम पर हैं। बेशक, जिनपिंग की वर्तमान यात्रा भी रूस के साथ चीन के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। ये रिश्ते दूसरे मुख्य देशों के लिए उदाहरण हैं। दोनों के बीच रणनीतिक भागीदारी केवल इन दोनों को ही फायदा नहीं पहुंचा रही है, इसकी वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका है। संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स और जी-20 आदि मंचों पर भी दोनों देशों के बीच समन्वय है। बड़े वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान के लिए भी चीन और रूस अनिवार्य ताकत बन चुके हैं। दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने और गुटनिरपेक्षता की नीति मजबूत करने के प्रति दोनों की प्रतिबद्धता आज पश्चिमी शैली के सैन्य गठजोड़ के विरुद्ध खड़ी है। ये रिश्ते बताते हैं कि दुनिया के प्रमुख देशों को एक दूसरे से कैसे व्यवहार रखना चाहिए। इस यकीन की हर वजह मौजूद है कि चीन-रूस की दोस्ती का वृक्ष भविष्य में और सशक्त होकर बढ़ेगा। 
 चाइना डेली, चीन

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  • Web Title:videshi media hindustan column 10 june