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अलीम खान की गिरफ्तारी

सूबे के मंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सीनियर नेता अलीम खान की गिरफ्तारी ने मुल्क के सियासी माहौल में एक खलबली सी पैदा कर दी है। लंबे अरसे से जवाबदेही के मामले में हमारे यहां जो लचर रवैया रहा है, उस पर इस गिरफ्तारी का गहरा असर होगा। अलीम खान नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) के अफसरों को मुत्मइन करने में नाकाम रहे, नतीजतन उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-नवाज) जैसी मुख्यधारा की सियासी जमातों का यह आरोप रहा है कि ब्यूरो पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्रवाई कर रहा है। ऐसी अनेक गिरफ्तारियों में, जिनके पीछे एनएबी की भूमिका रही, उस पर ऐसे आरोप लगे हैं। अब अलीम खान की गिरफ्तारी से सबमें यह पैगाम जाएगा कि जवाबदेही ब्यूरो बिना किसी पार्टी का नाम देखे कार्रवाई करेगा। अलीम खान के खिलाफ आमदनी से ज्यादा जायदाद जुटाने के कई मामले चल रहे थे। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में न सिर्फ एक ऑफशोर कंपनी रखने का मामला है, बल्कि पार्क हाउसिंग सोसायटी के जेनरल सेक्रेटरी के तौर पर अपने ओहदे का बेजा फायदा उठाने का केस भी चल रहा है। यही नहीं, पूर्व में बतौर विधायक रिवर एज हाउसिंग सोसायटी और मुल्तान रोड से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका की भी जांच चल रही है। जैसे ही अलीम खान की गिरफ्तारी हुई, उन्होंने अपना इस्तीफा पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री को भेज दिया। जाहिर है, मुख्यमंत्री ने फौरन उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। यह ऐसा कदम है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। गंभीर आरोप के जवाब में अगर कोई वजीर खुद इस्तीफा देता है, तो यह सराहनीय है। एक मंत्री की जिम्मेदारी का यह बुनियादी कायदा है कि अगर उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगते हैं, तो उसे फौरन कुरसी छोड़ देनी चाहिए और पीटीआई इस कायदे का सम्मान कर रही है, जो एक सुखद बदलाव है। फिर यह बेहद जरूरी था कि हुकूमत जवाबदेही तय करने की मुहिम के साथ खड़ी दिखे और हितों के टकराव के हालात न पैदा होने दे।
 

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 8 february