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मानव तस्करी को रोकें

असुरक्षा, यौन शोषण और तनख्वाह न दिए जाने के आधार पर जून 2005 में नेपाल सरकार ने नेपाली औरतों के खाड़ी देशों में बतौर घरेलू कामगार काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन कई नेपाली महिलाएं वहां पहुंचने के लिए गैर-कानूनी रास्ता अपनाती हैं और बेईमान एजेंसियां उन्हें ठगती रहती हैं। नेपाल व भारत की धूर्त एजेंसियां फर्जी ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ बनाकर उन्हें मध्य-पूर्व के देशों में पहुंचा देती हैं। नेपाल सरकार के पास ऐसा कोई प्रामाणिक आंकड़़ा नहीं है कि कितनी शादी-शुदा स्त्रियां व कुंवारी लड़कियां खाड़ी के देशों में गैर-कानूनी तरीके से भेजी गई हैं। नेपाल और भारत के बीच लचीले बॉर्डर का फायदा उठाते हुए दलाल इन महिलाओं को भारत ले जाते हैं और फिर वहां से उन्हें खाड़ी के देशों में भेज देते हैं। दोनों देशों के धूर्त एजेंटों ने एक गठजोड़ कायम कर लिया है और वे नेपाल के गांवों की भोली-भाली औरतों को खाड़ी के देशों में अच्छी पगार और रहने की जगह दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फांसने के लिए सक्रिय हैं। देखने में यह भी आया है कि इन एजेंटों का शिकार बनी औरतों ने अपने पति को बताए बिना अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया। बीते बुधवार को दिल्ली महिला आयोग ने राजधानी दिल्ली के मुनिरका इलाके से 16 नेपाली औरतों को एजेंटों के चंगुल से आजाद कराया। माना जा रहा है कि उन्हें दुबई और कुवैत ले जाया जा रहा था। दिल्ली पुलिस की मदद से आयोग ने उन्हें मुक्त कराया है। दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन स्वाति मालीवाल ने ट्वीट किया है कि ‘इन लड़कियों को नेपाल से भारत लाया गया था और उन्हें खाड़ी के देश भेजा जा रहा था।’ उन्होंने यह भी बताया कि तस्करों ने उनका पासपोर्ट उनसे ले लिया था और उन्हें एक छोटे से कमरे में बंद करके रखा था। मालीवाल ने बिल्कुल सही कहा है कि इस समस्या से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। हमारी सरकार को भी इसके बारे में जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय स्तर पर ऐसी औरतों के मुफीद रोजगार पैदा करने की जरूरत है।

 

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 30 july