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अश्वेत अमेरिकी महिला को ह्यूगो

अमेरिकी लेखिका एनके जेमिसिन को विज्ञान श्रेणी में उपन्यास लेखन के लिए लगातार तीसरी बार प्रतिष्ठित ह्यूगो पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार जीतने वाली जेमिसिन पहली अश्वेत महिला हैं। उच्च और निम्न संस्कृतियों का विभाजन, पाठक की पसंद-नापसंद या आलोचकों की मर्जी, कम से कम विज्ञान कथा लेखन की दुनिया में बहुत स्पष्ट नहीं है, और प्रतिष्ठित ह्यूगो अवार्ड का आधार ही यही है कि पाठकों ने सबसे ज्यादा किसे पसंद किया। इस पुरस्कार का अपना तंत्र और तकनीक है। यहां शामिल होने के लिए कोई बंदिश नहीं, फीस जरूर है।

ह्यूगो का अपना रक्षा तंत्र इसे भीड़ में भी पारदर्शी बनाता है। मसलन यहां प्रतिभागियों की कितनी भी बाढ़ हो, सामान्य पाठक भी अपने वोट से श्रेणी विशेष के सारे के सारे उम्मीदवारों को खारिज कर सकता है या ‘कोई पुरस्कार नहीं’ के लिए वोट कर सकता है। हालिया वर्षों में दक्षिणपंथी ट्रॉल्स ने अपने अभियान से बहुमत प्रभावित करने की नाकाम कोशिशें भी की हैं। इस सब के बीच यह अहसास ही सुखद है कि कोई पहली अमेरिकी अश्वेत लेखिका ‘द ब्रोकन अर्थ’ जैसी उपन्यास त्रयी लिखती है और हर बार इसके लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतती है। ऊपरी तौर पर तो यह ज्वालामुखी के आतंक वाले उस ग्रह की कहानी है, जहां तीन अलग तरह के जीवन हैं। यहां गुलामी है,विद्रोह भी। संवेदना है, दुविधाएं भी।

अलग ही अनुभूति कराने वाले शेड्स के साथ बहुत कुछ ऐसा जो सहज कल्पना से परे है। लेकिन यहां पुरुषवादी किशोरवय फंतासी की भरमार मात्र नहीं है। केंद्रीय कथा एक मां-बेटी के भावनात्मक संबंधों के गिर्द घूमती है जिसमें तमाम नाटकीय तत्व हैं। संदेश यही है कि कुछ भी स्थाई नहीं। न घर, न परिवार न शहर। सब पर वाह्य दुनिया का दबाव है। यहां इमारतों से आशय सिर्फ भवन नहीं सोच और अनुभूतियों से भी है। अधिकांश पात्र अश्वेत भले हों, यह भी साफ है कि यहां गुलामी के दंश में भी रंग आधारित भेद नहीं है। अपनी अद्भुत कथा शैली के साथ यह उपन्यास त्रयी हमारी पूरी संस्कृति और सभ्यता के लिए एक उपहार है।

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  • Web Title:videshi media column of hindustan on 29 august