videshi media column of Hindustan on 22 january - 2030 का जापान DA Image
20 फरवरी, 2020|8:50|IST

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2030 का जापान

यह साल 2020 की शुरुआत है, लेकिन नए दशक की शुरुआत भी है। 2010 के दशक में उभरी कई प्रौद्योगिकियां निश्चित रूप से इस नए दशक में त्वरित गति से विकसित होंगी और हमारी जीवनशैली को नाटकीय रूप से बदल देंगी। इस साल टोक्यो ओलंपिक और पैरालिंपिक खेल संभवत: पहले गेम चेंजर होंगे। अगली पीढ़ी का 5-जी वायरलेस नेटवर्क जापान में शुरू होगा, जिससे सुपरफास्ट मोबाइल संचार और अन्य विभिन्न सेवाएं मिल सकेंगी। हाइपर-फास्ट कनेक्टिविटी, उन्नत स्वचालन और एक संवद्र्धित संवेदी डिजिटल दुनिया एक सच्चाई बन जाएगी। दूसरी ओर, जनसंख्या संबंधी बदलावों में संतुलन बनाने की जरूरत पडे़गी। जापान में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, युवा आबादी की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचना पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के अनुसार, भारत की जनसंख्या 2027 में चीन से ज्यादा हो जाएगी। 2030 में भारत में 1.536 अरब लोग होंगे, जबकि चीन की जनसंख्या 1.464 अरब होगी। जापान की जनसंख्या जो साल 2019 में लगभग 12.61 करोड़ थी, 2030 तक 11.52 करोड़ रह जाएगी। अनुमान है कि आर्थिक मजबूती के संदर्भ में 2030 तक चीनी अर्थव्यवस्था अमेरिका से आगे निकल जाएगी। भारत तीसरे स्थान पर रहेगा, जबकि जापान नंबर चार पर चला जाएगा। हालांकि जापान के भविष्य को निराशा की नजरों से देखना जल्दबाजी होगी। वैसे, जापान के बूढ़े होते किसान बेचैनी के साथ मदद की बाट जोह रहे हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (एआई) और अन्य तकनीक की मदद से ही जापान में कृषि को बचाया जा सकता है। जापान सर्वाधिक रोबोट बनाता है। करीब 60 प्रतिशत रोबोट जापान में ही बनते हैं। सेवा क्षेत्र में रोबोट और एआई को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना होगा। 2030 की दुनिया की कल्पना अब जरूरी है। सोचना होगा कि भविष्य में लोगों को कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और हम किस तरह के समाधान पेश कर सकेंगे। एक प्रसिद्ध कहावत है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। समस्याओं का हल करने से ही रचनात्मकता व नवीनता आ सकती है।

 

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