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अघोषित बैंक खातों का सच

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने चुनाव आयोग को सौंपी अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि सत्ताधारी सियासी पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ यानी पीटीआई पूरे मुल्क में 18 अघोषित बैंक खातों का संचालन कर रही है। इस खुलासे ने अनेक लोगों को हैरान किया है, क्योंकि पीटीआई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़़-चढ़कर मोर्चा लिया था और जवाबदेही तथा पारदर्शिता के हक में एक से बढ़कर एक तकरीरें की थीं। पीटीआई को मिले चंदे में गड़बड़ी की शिकायत के बाद यह जांच शुरू की गई थी। दरअसल, पार्टी के एक संस्थापक सदस्य अकबर एस बाबर ने चुनाव आयोग में यह शिकायत दर्ज कराई थी कि पीटीआई के भीतर फर्जीवाड़ा जारी है। इस पार्टी के पास पूरे पाकिस्तान में 26 बैंक खाते हैं, जिनमें से महज आठ को घोषित किया गया था। यह वाकई एक बेहद संजीदा मसला है और पीटीआई से उम्मीद की जाती है कि वह इससे जुड़ी जांच में पूरा सहयोग करे। 
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने पिछले साल ही पीटीआई को मिले चंदे की जांच शुरू की थी, लेकिन उसके बाद से अब तक पार्टी चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ सहयोग करने से बचती रही है। इस बुधवार को भी, जब इस मामले को लेकर बैठक हो रही थी, तब पार्टी का कोई नुमाइंदा सवालों के जवाब देने के लिए वहां मौजूद नहीं हुआ। अगर चुनाव आयोग का दावा सही है, तो यह पीटीआई के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता है, क्योंकि वजीर-ए-आजम इमरान खान, पार्टी के नेता इमरान इस्माइल और दूसरे दीगर नेताओं के दस्तखत से ये खाते खुले हैं। हुकूमत को इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ करानी चाहिए और अवाम से किए अपने वादे को निभाना चाहिए। वजीर-ए-आजम ने वादा किया था कि अगर उनसे जुड़ा कोई भी मसला सामने आया, तो वह हर जांच के लिए मौजूद होंगे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने इस जांच को छिपाने की कोशिश की। इस मामले से जुडे़ जो भी दावे-प्रतिदावे हैं, उनका सच ईमानदार व पारदर्शी जांच के जरिए सामने आना ही चाहिए।
 

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 12 january