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एक मुश्किल जंग


दुनिया में सिर्फ दो ही मुल्क ऐसे हैैं जो अब भी पोलियो के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। पाकिस्तान उनमें से एक है। ऐसे में, यह बेहद निराश करने वाली बात है कि इस साल के पहले पोलियो विरोधी मुहिम में सिंध सूबे के 73 लाख बच्चों में से करीब 1,75,000 बच्चे पोलियो की खुराक नहीं ले पाए। सूबे के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह को बताया गया है कि 88,472 बच्चे इसलिए वैक्सीन नहीं ले पाए, क्योंकि जिस वक्त टीम खुराक देने उनके घर पहुंची, उस वक्त वे घर पर मौजूद ही नहीं थे, जबकि 86,863 बच्चों के माता-पिता ने ही टीम को पोलियो ड्रॉप नहीं पिलाने दिया। मुख्यमंत्री ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए पोलियो-विरोधी मुहिम से जुडे़ अफसरों से कहा है कि वे आइंदा किसी तरह के इनकार को बर्दाश्त न करें। पाकिस्तान अपने नौनिहालों को पोलियो से पूरी तरह महफूज नहीं कर पाया है, तो इसके पीछे बच्चों के माता-पिता का यही रवैया बड़ी वजह रही है। कुछ तो इस वैक्सीन के सुरक्षित होने को लेकर लोगों में शक रहा और फिर कट्टरपंथियों ने इसके खिलाफ जो दुष्प्रचार किया, उससे भी लोग पोलियो ड्रॉप अपने बच्चों को दिलाने से कतराते रहे। चिंता की बात यह है कि कराची के छह इलाकों में पोलियो वायरस का पता चला है, जिसकी जद में शहर भर के बच्चों के आने का अंदेशा बढ़ गया है।
साल 2014 में मुल्क में पोलियो के 306 मामले सामने आए थे, तभी से पाकिस्तान ने इसके खात्मे के लिए अपनी कोशिशें बढ़ा दी थीं। पिछले साल इसके 12 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से छह मामले कबाइली इलाकों में देखने को मिले, जबकि एक-एक केस सिंध और पंजाब सूबे से सामने आया था। यह साबित करता है कि बीते वर्षों में सिंध ने इस मामले में बेहतर तरक्की की है। मगर कई सारे विशेषज्ञों का कहना है कि सिंध अब भी पोलियो के लिहाज से काफी संवेदनशील सूबा है। दरअसल, जब तक मुल्क के एक-एक बच्चे को इसकी खुराक नहीं मिल जाती, पाकिस्तान पोलियो के खिलाफ अपनी जंग में कामयाबी का दावा नहीं कर सकता।
    

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 12 february