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सर्जन नहीं बनना चाहतीं महिलाएं

सर्जरी का पेशा महिलाओं को रास नहीं आ रहा है। ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड की महिला डॉक्टरों पर हुए एक सर्वे से यह चौंकाने वाली बात निकलकर आई है। यौन शोषण, सताना, धमकाना और नीचा दिखाना इसकी खास वजह है। उन्हें बेहतर प्रोफेशनल न होने का तमगा दिया जाता है। महज बच्चे पैदा करने और पालने वाली कहा जाता है। इन दो देशों के मेडिकल कोर्स में करीब साठ फीसदी महिलाएं आती हैं। लेकिन 11 फीसदी ही महिला सर्जन हैं। पिछले दिनों डॉ यूमिको कोदाता का मामला सुर्खियों में था। 31 साल की यूमिको ने एक दिन बैंक्सटाउन हॉस्पीटल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग को छोड़ दिया। उन्हें लगातार 24 दिन बुलाकर काम कराया गया। थकान और नींद के मारे उनका बुरा हाल था। एक रात घर लौटते हुए उन्होंने अपनी गाड़ी कहीं भिड़ा दी। और फिर उन्हें नींद न मिलने की वजह से छह सप्ताह अस्पताल में रखा गया। उसके बाद भी किसी को उन पर तरस नहीं आया। उन्हें भावुक औरत करार दिया गया। सर्वे बताता है कि इस मामले में यूमिको अकेली नहीं हैं। ढेरों महिला सर्जन इसी तरह का कुछ महसूस करती हैं। गोल्ड कोस्ट में मशहूर जनरल सर्जन डॉ रिया लियांग की वजह से यह सर्वे हो पाया है। इसके लिए पहल उन्होंने ही की, और टे्रनी सर्जनों से सच्चाई जानने की कोशिश की। खुद रिया इन्हीं हालात से गुजरी थीं। कई बार उन्होंने सर्जन की जिंदगी को छोड़ने का मन बनाया था। किसी तरह वह अपने मुकाम पर पहुंचीं। अब वह महिला सर्जनों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने की कोशिश कर रही हैं।  रॉयल ऑस्टे्रलेशियन कॉलेज ऑफ सर्जन के पास पिछले साल 81 शिकायतें आईं। ये शिकायतें काम के ज्यादा घंटे, साप्ताहिक छुट्टी न मिलने, भेदभाव, धमकाने और यौन शोषण से जुड़े थे। डॉ रिया इस संस्था से भी जुड़ी हैं। उन्होंने इस मसले से न्यू साउथ वेल्स के स्वास्थ्य मंत्री बै्रड हैजार्ड को भी जोड़ा है। मंत्री महोदय ने भरोसा दिलाया है कि वह शिकायत मिलने वाले अस्पतालों पर छापा मारेंगे। जरूरी होगा, तो वह उनका लाइसेंस भी खत्म कर सकते हैं। 

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 11 february