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शेख हसीना से बढ़ी उम्मीदें

चौथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के तौर पर अपने सफर का आगाज कर रहीं शेख हसीना को हम बधाई देते हैं। इस कार्यकाल को मिलाकर दो दशकों तक सत्ता में रहना एक बड़ी उपलब्धि है; और इस स्थिति में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां और चुनौतियां भी काफी बढ़ जाती हैं। अवामी लीग के लगातार सत्ता में बने होने से उसके आगे एक बड़ी चुनौती यह खड़ी हो जाती है कि अपने पिछले कार्यकाल में उसने जिन कामों की शुरुआत की थी, उनको अब मुकम्मल करे। पिछली हुकूमत ने कई मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, उन्हें अब वक्त पर पूरा करने को तवज्जो मिलनी चाहिए। ऐसा करना अवामी लीग के घोषणापत्र में दर्ज ‘सतत विकास’ के अनुरूप ही होगा। दरअसल, कई पुरानी परियोजनाएं नौकरशाही की लेटलतीफी और निर्माण लागत बढ़ने के कारण अवरोध का शिकार बन गई हैं, ऐसी योजनाओं को पूरा करने के प्रति इस कार्यकाल में गंभीर पहल होनी चाहिए। इसी तरह, लगभग तमाम सरकारी महकमे भ्रष्टाचार से बुरी तरह पस्त हैं, इससे पूरी सख्ती से लड़ने की जरूरत है, क्योंकि भ्रष्टाचार विकास को तो बाधित करता ही है, इससे वक्त और धन की इस कदर बर्बादी होती है कि उसकी भरपाई नहीं हो पाती। बांग्लादेश को दक्षिण एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में गिना जा रहा है। ऐसे में सरकार पर यह बड़ी जिम्मेदारी आ गई है कि वह इसे नई ऊंचाई पर ले जाए। इसके लिए बांग्लादेश में कारोबार के मुफीद पेशेवर माहौल बनाने की जरूरत है। देश को एक स्थिर आर्थिक विकास देने के लिए अवामी लीग सरकार के पिछले कार्यकाल की सराहना होती रही है, लेकिन अब उसके सामने आर्थिक विषमता में कमी लाने की चुनौती बहुत बड़ी होगी। निस्संदेह, नई सरकार का फोकस विकास पर रहेगा, लेकिन उसे लोगों के हक-हुकूक की हिफाजत को लेकर भी जागरूक होना चाहिए। अवामी लीग सरकार के पिछले कार्यकाल में मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं ने दुनिया भर में हमारी छवि को नुकसान पहुंचाया था। इसलिए इस बार शेख हसीना से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।
 

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  • Web Title:videshi media column of Hindustan on 10 january