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चुनाव से निकले संकेत

स्थानीय चुनावों के तीसरे व आखिरी दौर का मतदान पूर्वी तराई प्रांत संख्या 2 में बीते सोमवार को संपन्न हुआ। और चुनाव काफी शांतिपूर्ण तरीके से हुए। हिंसा और बाधा डालने की घटनाएं तो पहले दो दौर के मतदान के मुकाबले काफी कम रहीं, और सबसे सुखद बात है कि एक भी व्यक्ति को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी। यह शांतिपूर्ण चुनावी माहौल इसलिए भी गौर करने लायक है, क्योंकि पूर्वी तराई क्षेत्र के बारे में यही धारणा रही कि खास तौर से चुनावों के दौरान यह काफी तनावग्रस्त रहता है। 1990 के दशक में तराई इलाके में चुनावी धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए थे। इसलिए सुरक्षा बल खासे चिंतित थे। मगर उनकी आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं। इसके अलावा, सुरक्षा बलों का आचरण भी काफी संयम भरा रहा। जैसी कि कुछ लोगों को आशंका थी, उनको लोगों को धमकाते या उकसाते हुए नहीं देखा गया।  अब मतगणना शुरू हो रही है, और चुनाव आयोग ने इसके लिए काफी सावधानी भरी प्रक्रिया अपनाई है। आयोग इस बात को लेकर काफी सतर्क है कि पहले दौर के मतदान के बाद भरतपुर में व्यवधान डालने की जैसी घटना घटी, उसकी पुनरावृत्ति न हो।

इसीलिए मतगणना की कवायद काफी धीमी है। चूंकि मतगणना की प्रक्रिया काफी धीमी है, इसलिए इन चुनावों के पूर्ण नतीजे के लिए एकाध सप्ताह तक का इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, शुरुआती मतगणना से यही संकेत मिल रहे हैं कि पहले दो दौर के चुनावों के मुकाबले इस दौर के चुनाव नतीजे अलग रुझान के हो सकते हैं। पहले दो दौर के चुनावों में जहां सीपीएन-यूएमएल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, इस दौर में नेपाली कांग्रेस से काफी पिछड़ती हुई दिख रही है। इसके अलावा, सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) भी अच्छा प्रदर्शन करती प्रतीत होती है। और कुछ लोगों को चौंकाते हुए राष्ट्रीय जनता पार्टी- नेपाल (आरजेपी- एन) कुछ स्थानीय इकाइयों में काफी अच्छा करती हुई दिखती है। यह रुझान बता रहा है कि तराई क्षेत्र का बड़ा तबका अब भी यूएमएल और इसके नेता केपी ओली से काफी नाराज है। मतदाता मधेसी पार्टियों के एजेंडे के साथ भी खड़े दिख रहे हैं। 

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  • Web Title:The Kathmandu post Article on Nepal election in Hindustan Hindi Newspaper 24th of September