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सीरिया में कब आएगी शांति

पिछले सात वर्षों से जारी सीरियाई गृह युद्ध में लगभग पांच लाख लोग मारे जा चुके हैं, शहरों से लेकर गांवों तक के लाखों लोगों को इसके कारण आस-पास के मुल्कों में पनाह लेने को मजबूर होना पड़ा है। चारों तरफ सिर्फ तबाही का मंजर दिखता है। बागी ताकतों का नियंत्रण अब सिर्फ इदलिब सूबे के छोटे से हिस्से पर रह गया है। इस स्थिति तक पहुंचने के पीछे भले भी अन्य कई कारण जिम्मेदार रहे हो, मगर रूसी और ईरानी फौजों की मदद की वजह से ही सदर बशर अल-असद की हुकूमत उन तमाम हिस्सों को फिर से हासिल करने में कामयाब हो सकी, जिन्हें वह बागी ताकतों के हाथों हार चुकी थी। दरअसल, असद सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले आंदोलनकारियों को भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिला भी नहीं। बहरहाल, सीरिया का मसला अंतत: इदलिब सूूबे में सीजफायर की बहाली, एक सांविधानिक समिति के गठन और लाखों शरणार्थियों की घर वापसी के वादे के साथ अपने अंत के करीब दिख रहा है। हालांकि असद सरकार की प्राथमिकता युद्ध के दौरान तबाह बुनियादी ढांचों के पुनर्निर्माण और शरणार्थियों की सशर्त घर वापसी बन रही है, न कि करोड़ों सीरिया वासियों की जवाबदेही की मांग पर कोई विचार और युद्ध अपराधियों को इंसाफ के कठघरे में खड़ा करना।

पिछले पखवाडे़ तुर्की, रूस, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने सीरिया के मसले पर इस्तांबुल में एक बैठक की और उन्होंने सीरिया के लोगों का आह्वान किया कि वे युद्ध से तबाह हो चुके अपने मुल्क में अमन कायम करने के प्रयासों का नेतृत्व करें। यकीन किया जा रहा है कि इदलिब में सीजफायर से शांति प्रयासों को गति मिलेगी। इस सूबे में लगभग 40 लाख लोग रहते हैं और यह प्रांत दर्जनों बागी गुटों का घर भी है। निस्संदेह, इदलिब के इस युद्ध विराम से नागरिकों की रक्षा हुई है और तुर्की व यूरोप की तरफ शरणार्थियों का प्रवाह भी थमा है, लेकिन यह इलाका तब तक अस्थिर ही रहेगा, जब तक कि वहां तुर्की के कुर्द गुटों और पूर्वी इलाके में आईएस की गतिविधियों के जारी रहने का खतरा बरकरार रहेगा।

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  • Web Title:Qatar The Peninsula article in HIndustan on 05 november