DA Image
28 मई, 2020|3:24|IST

अगली स्टोरी

ट्रंप की एक और चूक

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और अमेरिकी हितों के प्रति एकांगी नजरिये ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाल दिया है। वह सऊदी अरब और चार अन्य सुन्नी बहुल देशों के पक्ष में खड़े हो गए हैं, जो अपने पड़ोसी देश कतर को अलग-थलग करने और डराने की चेष्टा कर रहे हैं। गौरतलब है कि कतर मध्य-एशिया (भारत से पश्चिम एशिया) का एक छोटा सा मुल्क है, जहां पर इस इलाके में अमेरिका का सबसे अहम सैन्य आउटपोस्ट है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्य-पूर्व के तनाव को शांत करने वाली मुद्रा अपनाने की बजाय एक बड़ी प्रतिद्वंद्विता के भीतर की छोटी सी होड़ में एक पक्ष का साथ ले लिया। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, बहरीन और यमन ने कतर के साथ अपने रिश्ते तोड़ने का कदम कई वजहों से उठाया है, उनमें से कई तो बेहद मामूली हैं, लेकिन मुख्य वजह यह है कि इन सुन्नी देशों के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी शिया देश ईरान के साथ उसका करीबी रिश्ता है।

ईरान कई लिहाज से एक बुरा देश है, फिर भी इसके साथ अमेरिका के कुछ हित जुडे़ हुए हैं, इनमें आईएस के खिलाफ जंग भी एक हित है। बुधवार को तेहरान में ईरानी पार्लियामेंट और अयातुल्लाह खुमैनी के मकबरे पर हुए हमलों की जिम्मेदारी आईएस ने कुबूली है। इन घटनाओं में 12 लोग मारे गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वह ईरान को कोई मौका नहीं देना चाहते और उसके प्रति ओबामा प्रशासन की सफल नीति पर आगे बढ़ने के कतई इच्छुक नहीं हैं। लेकिन उनका मकसद ईरान को अलग-थलग करना भी था, तब भी कतर को दंडित करने के लिए सऊदी अरब के साथ खड़ा होना आत्मघाती ही होगा, क्योंकि कतर न सिर्फ अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुख्यालयों का मुल्क है, बल्कि वहां 11,000 से अधिक अमेरिकी व गठबंधन सेनाओं के सैनिक भी रहते हैं। कतर को अलग-थलग करने का यह बिल्कुल गलत समय इसलिए भी है कि अमेरिका के सहयोगी सीरिया में आईएस की ‘राजधानी’ रक्का पर हमला शुरू करने वाले हैं, और अमेरिका को इस अभियान में कतर के सैन्य अड्डों की दरकार होगी।