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रोमांच और जोखिम

भारतीय पर्वतारोही रवि कुमार का शव माउंट एवरेस्ट की 8,400 मीटर ऊंची चोटी से रविवार को बरामद किया गया। एवरेस्ट पर किसी शव की तलाश का यह अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान था, जिसके लिए भारत सरकार का खासा दबाव था। यहां सीजन की यह पांचवीं मौत है। सब कुछ बहुत अच्छा होेने के बाद भी एवरेस्ट पर चढ़ाई आसान नहीं है। मई 1953 में तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी की एवरेस्ट फतह के बाद से अब तक चार हजार से ज्यादा पर्वतारोही यहां आए, लेकिन लगभग तीन सौ मौतें भी हुईं।

तमाम दुश्वारियों के बावजूद समुचित समन्वय, पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और सही व त्वरित फैसले की क्षमता के साथ भाग्य बड़ा तत्व है, लेकिन इसमें खतरे तो हैं ही। इस सीजन में 14 सदस्यीय ब्रिटिश गोरखा पर्वतारोही दल सबसे पहला था, जो 15 मई को सफलता के साथ एवरेस्ट पहुंचा। विपरीत मौसम के बावजूद वे सफल रहे, लेकिन उनकी तरह बाकी सभी सौभाग्यशाली नहीं थे। रवि कुमार इन्हीं में से थे। गाइड के अनुसार कुमार ने अनिश्चित परिस्थितियों के बावजूद अपने प्रयास नहीं छोड़े, लेकिन अंतत: ऑक्सीजन की कमी और ऊर्जा क्षरण का शिकार हो गए। 36 घंटे की मेहनत में दस सदस्यीय अभियान दल ने कुमार का शव भले ही ढूंढ़ निकाला हो, पर माना जा रहा है कि कुमार विपरीत मौसम में प्रयास जारी न रखते, तो शायद यह दु:खद अंत न होता।

अपनी क्षमताओं का अंतिम दम तक इस्तेमाल इंसानी प्रकृति है, पर कई बार यही प्रवृत्ति जीवन के लिए खतरा बन जाती है। हमें भावनाओं और इच्छाओं का ख्याल रखना चाहिए, पर जब जोखिम खतरे की हद तक होने की आशंका हो, तो अफसरों को अपने तईं फैसले लेने चाहिए। याद दिलाना होगा कि नेपाल पर्वतारोही अभियान रेगूलेशन ऐक्ट 1978 में लागू हुआ था और 2016 में इसका संशोधित मसविदा आ चुका है, जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से कई व्यवस्थाएं हैं। इनको अमल में लाना जरूरी है। नेपाल को ‘पर्वतारोहण का मक्का’ बने रहने के लिए भी सुरक्षा मानकों पर सबसे पहले ध्यान देना होगा। रोमांच व जोखिम के बीच तालमेल बिठाने के लिए कुछ भी करना होगा।

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  • Web Title:Indian Mountaineer Ravi Kumar Everest